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Swargvibha स्वर्गविभा

www.swargvibha.in पर उच्च स्तरीय रचानाएँ (कविता, ग़ज़ल, हाइकु, मुक्तक, शेर, कहानी, संस्मरण, पुस्तक समीक्षा आदि) नि:शुल्क प्रकाशनार्थ आमंत्रित हैं। रचानाएँ Mangal यूनीकोड, अथवा अँग्रेज़ी में टंकित कर swargvibha@gmail.com या फिर swargvibha@ymail.com पर भेजी जा सकती हैं। 

 

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                            अंक:  दिसम्बर २०१४

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Swargvibha (www.swargvibha.in) is the well known and popular Hindi Website which not only helps in propagation of Hindi, but also provides universal meeting grounds to the writers, poets, Gazalkars, story writers, critics and journalists. It publishes and propagates their best creations and writings free of cost to enable them to claim honour and laurels in the society.

 

स्वर्गविभा (www.swargvibha.in) पर नि:शुल्क प्रकाशनार्थ हिन्दी रचनाएँ ( किसी भी विधा में ) यूनिकोड (मंगल) में टंकित कर, अप्रकाशित एवं मौलिकता के प्रमाण-पत्र के साथ ही मेल द्वारा swargvibha@gmail.com अथवा swargvibha@ymail.com पर भेजें । सामग्री की मौलिकता के लिए लेखक/ प्रेषक स्वयं जिम्मेदार होगा । प्रकाशित विचार लेखकों के अपने हैं, इनसे सम्पादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है । सभी प्रसंगों का न्याय क्षेत्र नवी मुम्बई ( महाराष्ट्र ) ही होगा ।

 

 

डॉ० बी० पी० सिंह
सम्पादक, स्वर्गविभा

 

 

स्वर्ग विभा (www.swargvibha.in),नये-पुराने साहित्यकारों का वह मिलनमंच है ,जहाँ विश्व के कवियों ,लेखकों, गज़लकारों तथा उपन्यासकारों को ससम्मान एक मंच पर नि:शुल्क लाकर खड़ा करती है । केवल आदान मात्र मनुष्य को पूर्ण संतोष नहीं देता, उसे प्रदान का भी अधिकार चाहिये ,और इसी अधिकार का विकसित मंच है स्वर्ग विभा । यह विद्वानों व साहित्य-प्रेमियों के बुद्धिकार्य के स्थूल ग्यान से लेकर इसके जन्म देने वाले सूक्ष्म विचारों की अनुभूतियों को भी स्वयं में संचित करती है । इस प्रकार वामन जैसा लगने वाली स्वर्ग विभा, असीमता में बढ़ती-बढ़ती विराट हो सकती है ; बशर्तेकि आप सबों का सहयोग और प्यार यूँ ही मिलता रहे ।

 

स्वर्गविभा तारा राष्ट्रीय सम्मान 2015 हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित

 

 

पिछले दश वर्षों से सर्वाधिक लोकप्रिय वेबसाइट स्वर्गविभा (www.swargvibha.in ), देश-विदेश के पाँच साहित्यकार / पत्रकार बन्धुओं को ’ स्वर्गविभा तारा राष्ट्रीय सम्मान’ से सम्मानित करती आ रही है । इस वर्ष ( 2015 ) के लिए भी स्वर्गविभा टीम, आप सभी हिन्दी विद्वानों से नि:शुल्क प्रविष्टि की अपील करती है । आप अपनी प्रविष्टियाँ ( साल 2010-2012 के बीच प्रकाशित पुस्तक / पत्रिका की एक प्रति, परिचय-पत्र एवं अपने छाया-चित्र के साथ ) 31 अक्टूबर 2015 तक इस पते पर भेज सकते हैं

---अध्यक्ष, स्वर्गविभा, 1502 सी क्वीन हेरिटेज़, पाम बीच रोड,प्लाट—6, सेक्टर—18, सानपाड़ा, नवी मुम्बई---400705 ; email:
swargvibha@gmail.com, (m) +919322991198 | चयनित पाँच प्रतिभागियों में से प्रत्येक को उक्त सम्मान के परिपेक्ष्य़ में पशस्ति-पत्र एवं दो हजारएक सौ रुपये की नगद राशि प्रदान की जायगी ।

 

डॉ० बी० पी० सिंह
का० अध्यक्ष, स्वर्गविभा

 

स्वर्गविभा तारा ऑन लाइन प्रतियोगिता 2015

 

रचनाकार बंधुओं को यह जानकारी देते हुए , हमें गर्व हो रहा है, कि स्वर्गविभा ( www.swargvibha.in ) गत वर्षों की भाँति इस साल भी ऑन लाइन प्रतियोगिता आयोजित करने जा रही है । आप सबों से अनुरोध है कि इस प्रतियोगिता में भागीदारी निभाकर पत्रिका को सफ़ल बनावें । आलेख विषय है , ’संवेदना’ ( यह एक स्वस्थ समाज के लिए कितना आवश्यक है और इसकी आवश्यकता, भावना से व्यवहार लोक तक क्यों जरूरी है ? ) । प्रविष्टियाँ युनिकोड में टंकित कर 30 सितम्बर, 2015 तक मेल द्वारा swargvibha@gmail.com पर भेजी जा सकती हैं । प्रथम तीन चयनित विजेताओं को सम्मानार्थ क्रमश: 1500/-, 1300/- और 1100/- की राशि के साथ प्रशस्ति-पत्र अक्टूबर 2015 में प्रदान किया जायगा । कृपया पूर्व सम्मानित बंधु , पुन: प्रतियोगिता में अंश-ग्रहण न करें ।

 

ई० राजीव कुमार सिंह
महामंत्री, स्वर्गविभा(m)+919322991198

 

 

 

 

डॉ० तारा को शताब्दी कमलारत्नम सम्मान-पुरस्कार

 

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झारखंड राज्य की सांस्कृतिक राजधानी देवघर में 29 जून 2014 को विवेकानन्द शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले जसीडीह पब्लिक स्कूल परिसर में ’संस्कृत अकादमी पुरस्कार’ विजेता कमलारत्नम की शताब्दी जयन्ती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मान-पुरस्कार समारोह में, हिन्दी भाषा के क्षेत्र में अतुलनीय सेवा एवं राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अभूतपूर्व उपलब्धियों के लिए स्वर्गविभा की संस्थापिका एवं प्रवीण साहित्यकार डॉ० श्रीमती तारा सिंह, नवी मुम्बई को ’कमलारत्नम साहित्य सलिला शताब्दी राष्ट्रीय शिखर सम्मान-पुरस्कार’ से अलंकृत किया गया । देवघर के उपायुक्त ,श्री अमित कुमार के हाथों डॉ० सिंह को सम्मान-पत्र, शॉल, प्रतीक चिह्न एवं पुष्पमाल्य प्रदान किये गये ।
सम्मान-समारोह उपरान्त आयोजित ’एक शाम कवियों के नाम’ की 100 वीं संगोष्ठी में डॉ० तारा सिंह का राष्ट्रगीत ’करो भारत को नमन, बोलो भारतीय हैं हम’, उनकी सुरीली आवाज ने महफ़िल में शमा बाँध दिया ।
डॉ० सिंह को अब तक देश-विदेश की संस्थानों द्वारा 237 सम्मान / पुरस्कार / मानदोपाधि से नवाजा जा चुका है तथा उनकी 30 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं ।

 

 

 

 

 

 

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 संस्थापिका एवं प्रधान सम्पादिका--- डॉ० श्रीमती तारा सिंह

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