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Swargvibha स्वर्गविभा

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                            अंक: दिसंबर २०१५

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Swargvibha (www.swargvibha.in) is the well known and popular Hindi Website which not only helps in propagation of Hindi, but also provides universal meeting grounds to the writers, poets, Gazalkars, story writers, critics and journalists. It publishes and propagates their best creations and writings free of cost to enable them to claim honour and laurels in the society.

 

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डॉ० बी० पी० सिंह
का० सम्पादक, स्वर्गविभा

 

 

स्वर्ग विभा (www.swargvibha.in),नये-पुराने साहित्यकारों का वह मिलनमंच है ,जहाँ विश्व के कवियों ,लेखकों, गज़लकारों तथा उपन्यासकारों को ससम्मान एक मंच पर नि:शुल्क लाकर खड़ा करती है । केवल आदान मात्र मनुष्य को पूर्ण संतोष नहीं देता, उसे प्रदान का भी अधिकार चाहिये ,और इसी अधिकार का विकसित मंच है स्वर्ग विभा । यह विद्वानों व साहित्य-प्रेमियों के बुद्धिकार्य के स्थूल ग्यान से लेकर इसके जन्म देने वाले सूक्ष्म विचारों की अनुभूतियों को भी स्वयं में संचित करती है । इस प्रकार वामन जैसा लगने वाली स्वर्ग विभा, असीमता में बढ़ती-बढ़ती विराट हो सकती है ; बशर्तेकि आप सबों का सहयोग और प्यार यूँ ही मिलता रहे ।

 

 

डॉ० तारा को नेशनल ऑनर अवार्ड

 

national award

 


देवघर विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान ( VECSO ) तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले 20 सितम्बर 2015 को पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक नगर मुर्शिदाबाद में लाला लाजपत राय की 150 वीं जयन्ती के अवसर पर आयोजित एक विशेष समारोह में ,मुम्बई की प्रसिद्ध साहित्यकार एवं स्वर्गविभा हिंदी वेबसाइट की स्थापिका, डॉ० श्रीमती तारा सिंह को हिंदी साहित्य क्षेत्र में विशिष्ट अवदान तथा अभूतपूर्व उपलब्धियों के लिए ’लाला लाजपत राय मेमोरियल नेशनल ऑनर अवार्ड 2015 ‘ से नवाजा गया । डॉ० तारा को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न, श्री कृष्ण दीवान (वरीय लेखक, छत्तीसगढ़ ), डॉ० सुभाश चन्द्र राय ( प्राध्यापक, विश्व भारती ), डॉ० प्रदीप कुमार सिंह देव ( अध्यक्ष, VECSO) के हाथों प्रदान किये गये । डॉ० तारा अब तक 250 राष्ट्रीय / अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा अवार्ड/मानदोपाधि/पुरस्कार/सम्मान पा चुकी हैं ; साथ ही उनकी प्रकाशित पुस्तकें 32 हैं ।

 


डॉ० बी० पी० सिंह
सह सम्पादक, स्वर्गविभा
नवी मुम्बई

 

 

 

 

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