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अण्णा हजारे और सोती जनता

 

- श्री सुनील कुमार परीट

 

anna hazare

 

श्री अण्णा हजारे पिछले साल २०११ से ही एक मजबूत लोकपाल बिल के लिए आंदोलन-अनशन कर रहे हैं। पर शायद अभी तक कामयाबी नहीं हासिल हुई है, इसमें कुछ इच्छाशक्ति की कमी है। हम लोग समझ बैठे हैं कि, लोकपाल बिल यानी श्री अण्णा हजारे जी को चाहिए है, पर इसमें उनका कोई स्वार्थ नहीं है। वे तो हमारे लिए लढ रहे है, स्वास्थ्य की फिकर न करते हुए अनशन कर रहे हैं। सच है कि ये अभी नहीं हुआ तो शायद कभी नहीं होगा। देश में एक ऐसा कठिन कानून भी चाहिए। वरना देश अधोगति की ओर चला जायेगा। इसलिए श्री अण्णा हजारे जी का २०१२ में भी आंदोलन शुरु हुआ है। जिसे कुछ लोग अण्णा पार्ट-२, तो कुछ लोग कबतक आंदोलन कह रहे हैं। एक सच्चा आंदोलन तबतक चलता है, जबतक न्याय नहीं मिलता। एक प्रजासत्तात्मक देश में न्याय-अन्याय की बात करना बहुत ही लज्जास्पद बात है।

 

 

श्री अण्णा हजारे जी इस ढलते उम्र में भी इतनी ऊर्जा से लढ रहे हैं, ये तो बहुत ही सराहनीय बात है। पर शायद जनता का साथ कम पड रहा है। भारत की जनसंख्या १२० करोड से भी अधिक है, पर क्या करे अण्णा जी के साथ लाखों में भी लोग नहीं हैं, समर्थक कम हैं। इसका कारण क्या है, क्या ये जनता सो रही है...? अण्णा जी के कुछ समर्थक कहते हैं, ये आजादी की दूसरी लढाई है। क्या ये जनता भूल गयी कि १९४७ में ही हमे आजादी मिली है। आण्णा जी कहते हैं गोरे चले गये, ये काले आ गये, यानी हम फिर गुलामी में जी रहे हैं। हमारे देश में जो जनता चाहती है वे कानून नहीं है तो हम गुलाम ही हुए ना? अब इस जनता को ही कुछ करना होगा, हमे ही जागना होगा। कुछ लोग तो देश को लूट-लूट कर देश को नंगा कर रहे हैं। कहीं देर न हो जाए अब जनता को जगना ही होगा, नहीं तो निद्रा की तंद्रा से जागकर देखे तो कहीं हम भी नंगे न हो!
आखिर सो-सोकर कितना सोयेगा
क्या कल मरकर जाग पायेगा॥

 

 

जी हाँ ये बात भी सही है कि, श्री अण्णा हजारे एक ही नेता काफी है सभी भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ लढने के लिए। उन्हें किसी तरह का नेता कहने में हिचकिचाते हैं। एक हाथ से ताली नहीं बजती, उसी तरह श्री अण्णा हजारे जी को सब भारतीय जनता का समर्थन हो तो वे इस पवित्र काम में सफल हो जायेंगे। श्री अण्णा हजारे जी अपने स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि देश के लिए अनशन करते हैं। अपना सर्वस्व ही उन्होंने देश के हित में समर्पित किया है, अपने परिवार के बारे में भी कभी इन्होंने सोचा नहीं। क्या कोई विधायक, सांसद या प्रधानमंत्री देश के लिए तो छोडो अपने स्वार्थ के लिए तो कभी अनशन किया है? तो अण्णा जी का कसूर तो क्या है, क्यों वे भूखे पेट अनशन करते हैं, उनके सर पे देश की जनता का बुखार है। शायद ही ऐसा कोई नेता होगा, जो आरंभ से अपने आप को देश की अग्निकुँड मे समर्पित किया है। जी हाँ इस बात से सब अवगत हैं कि, अण्णा जी के साथ या उनके आसपास जो लोग हैं, वे सब कोहिनूर रत्न नहीं हैं, सब पावन-पवित्र नहीं हैं। पर चाहते हैं हमारा समर्थन श्री अण्णा हजारे जी के लिए बहुत जरुरी है। भारत की जनसंख्या १२० करोड सब अण्णा हजारे हो।

 


नहीं चाहिए हमे ऐसे नेता
जो हैं सब बेईमान।
चाहिए सिर्फ एक अण्णा हजारे
जो हैं सबसे महान॥

 


सांसद सभा पर जोर लगाया जा रहा है कि मजबूत लोकपाल बिल लाया जाए, पर ये सांसद नहीं चाहते कि अपने पाँव पर खुद पत्थर मारे। दिनदहाडे कोई कुएँ में गिरना नहीं चाहता। और इस तरह के विचार तो सत्तारुढ पक्ष के सांसदों का भी हो सकता है और विपक्ष के सांसदों का भी। सरकार प्रामाणिक है, प्रधानमंत्री ईमानदार हैं, सभी सांसद ईमानदार हैं तो लोकपाल बिल लाने में क्या कठिनाई है? चाहे सत्तारुढ पक्ष के सांसद हो या विपक्ष के सांसद हो सभी भारतीय हैं, कोई गैर नहीं है। हमारे देश में यह अधिकार बनता है कि हमारा हक हम पाये। मजबूत लोकपाल बिल लाया जाए सभी सामान्य जनता चाहते हैं, १२० करोड जनता चाहती है। मजबूत लोकपाल बिल चाहते हैं क्या कोई अंग्रेजों से आजादी नहीं, आज के दिन आजादी पाना होता तो जाने क्या क्या करना पडता भगवान ही जाने...!

 

 

 

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