अपनों से अपनी बात . . .

 

 

मित्रों ! समस्त समस्याओं का एकमात्र कारण है -- मनुष्य में मनुष्यता का पतन | मनुष्यता का विकास व मनुष्य में देवत्व का उदय ही एकमात्र हल है | मनुष्य में मनुष्यता का विकास न तो कोई कानून कर सकता है और न ही कोई राजनेता या मसीहा (अवतार) | न जाने कितने ही देशों में कड़े कानून बने, अच्छे राजनेता और महापुरुष आये और चले गए परन्तु मानवीय चेतना ऊपर न उठ सकी, फलत: सामाजिक समस्याओं का स्थायी समाधान भी न हो सका | स्वयं में देवत्व के उदय का पुरुषार्थ तो मनुष्य को स्वयं ही करना होगा | बाहरी दबाव और वातावरण, क्षणिक दिखावा व परिवर्तन तो करा सकता है परन्तु स्थायी आन्तरिक परिवर्तन नहीं | मित्रों ! जितनी रूचि आप राजनीतिक विश्लेषण में, निषेध में व मसीहा खोजने में रखते हैं, उतनी ही रूचि व क्षमता यदि आपने स्वयं को व दूसरों को मनुष्यता तथा देवत्व सिखाने में दिखाई होती तो आपको आनंद आ गया होता | मित्रों ! स्वयं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यकता है -- आत्मप्रेरणा की, स्वयं को दृढ़ इच्छा के साथ समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करने की | मित्रों ! जो स्वयं को अनुकरणीय उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी उठाने के लिए प्रयासरत नहीं हैं, जो अनीति और कुसंग में ही खुश हैं, ऐसे संवेदनाहीन व्यक्ति प्रतिभावान होते हुए भी त्याज्य हैं | ऐसे व्यक्ति स्वयं के लिए व समाज के लिए घातक हैं, इनका भयंकर कष्ट भोगना निश्चित है |
तुम ऐसे कभी न बनना ! ठीक है|

 

 


सप्रेम
आपका
डाo अमित त्रिपाठी
वैज्ञानिक/अभियंता- एससी
अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, इसरो, अहमदाबाद

 

 

 

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