छोटी बुराई पर बड़ी बुराई की विजय

 

 

डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव

 

 

असत्य पर सत्य की विजय का पर्व प्रति कैलेण्डरानुसार आ रहा था। मंत्री जी ने सचिव से कहा “कहीं से सत्य को पकड़ कर लाओ जिससे उसकी असत्य पर विजय करवाई जा सके।” सचिव “यस सर” कह कर भुनभुनाने लगा “तुम्हारी वजह से सत्य हिमालय की गुफाओं में भी नहीे मिलता। यहाँ राजधानी में तो असत्य ही बिलबिला रहा है। “यह कह कर वह कुर्सी पर सिर पीछे रख कर बैठा और पी.ए. को बुलाया और कहा “हर कलेक्टर को “मेसेज” भिजवा दो। हर गली कूचे में सत्य को ढँूढा जाये। मिल जाये तो उसे सरकारी खर्चे पर राजधानी मेरे पास भिजवा दिया जाये। जो भिजवायेगा उस कलेक्टर को सरकार चार लाख रूपये का पुरस्कार देगी।
कोई आश्चर्य न करे। सरकार आज कल फेमिली प्लालिंग का टारगेट पूरा होने पर भी कलेक्टर को लाखो रूपये इनाम देती है। यानि दमड़ की नसबंदी हो और फूल मालायें पहनायी जाये मिठाई खिलाई जाये, और रूपयो का लिफाफा दिया जाये कलेक्टर को। ये तो मात्र सत्य को राजधानी पहँुचाने की बात थी। हर जिले से चार पाँच सत्य राजधानी पहुंच गये। राजधानी में अच्छाइयो की भीड़ लग गई। एक से एक बड़ी अच्छाइयाँ। कोई धोती कुर्ता पजामा पहने अच्छाई। किसी अच्छाई ने जैकेट पहिना था तो किसी ने टोपी लगाई थी कोई कोई अच्छाई टाइ पहिने थीे।
सब अच्छाइंयो सचिच के चेम्बर के सामने इकट्ठी हो गई। सबने अपनी अपनी स्लिप भिजवा दी। सचिच आश्चर्य चकित हो गये। उन्होने सच्चाईयों को इंतजार करने को कहा क्योंकि वे एक बुराई से बाते कर रहे थे।
खैर, उन्होने उन सच्चाइयो की मीटिंग मंत्री के साथ रख दी। मंत्री ही छांटे कि कौन सी अच्छाई बुराई पर विजय प्राप्त करेगी। मंत्री पद तक वह ऐसे नहीं पहंुच गये थे। उन्हें ऐसी सच्चाइयो की अच्छी पहचान थी। मीटिंग से हरेक अच्छाई ने खड़े होकर उसका परिचय दिया। किसर अच्छाई के बच्चे को तीस लाख के डोनेशन से मेडिकल में दाखिला दिलाया गया। कौन सी अच्छाई हर रविवार को वृद्धाश्रम में घर से निकाले गये माँ बाप से मिलने चली जाती थी। कौन सी अच्छाई धोखाधड़ी, घपला, हत्या और बलात्कार करके न्यायालय से साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी हो गई थी। सभी अच्छाइयां कह रही थी कि बुराई दिखाओं हम उसे खत्म कर देंगे।
मंत्री जी ने मीटिंग में माइक को लेकर ठोका फिर बोले डीयर अच्छाइयों, आप सब से मिल कर बहुत खुशी हुई। आपको मालूम है कि हमारी पार्टी अच्छे लोगो की पार्टी है। आज रात को अच्छाई बुराई में आग लगायेगी। आप सब उस पर्व पर आमंत्रित है। रात को उन सब अच्छाइयों की पंचायत को वी.आई.पी कुर्सियों पर बिठाला गया और कोक के डिब्बो में विदेशी दारू दी गई। बुराई अच्छाई के पैक में ही मिलती है। सबने छक कर पान किया। उस अच्छाई द्रव से कुछ तो बहकने लगे।
मैदान में तीन असत्य के पुतले लाये गये। मंत्री जी अच्छाई के परिवेश में हाथ जोड़े हुये आये। उनका हार से स्वागत किया गया। बहुत सारे उपहार दिये गये। फिर मंत्री जी को एक धनुष बाण दिया गया। मंत्री जी ने एक बाण को छुआ। उनके अंग रक्षक (मालूम नहीं कौन से अंग के रक्षक) ने उसे मैदान में अकेली खड़ी बुराई पर छोड़ा। उस छोटी बुराई का कोई चेहरा नहीं था। वह बड़ी बुराई के प्रहार को सहन नहीं कर सकी और धू-धू करके जल उठी।
मंत्री जी बुराई का जलना नहीं देख सके और बीच में ही उठ कर चले गये। उनके अनुसार वह बुराई जिसको उन्होने जलाया या विरोधी पार्टी थी। विरोधी पार्टी के अनुसार बेईमानी ने ईमानदारी को जलाया था। सासों के अनुसार मंत्री ने बहू को जलाया था। बहू के अनुसार बुराई की जगह सास को जलना चाहिए था। साहित्यकारो के अनुसार मंत्री ने साहित्यक अस्मिता को जलाया था। कलाकारो के अनुसार उन्होने कला को और गरीबों के अनुसार उन्होने उनकी मेहनत की कमाई में आग लगाई थी।

 

 

 

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