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दौलते निज़ाम

 

 

यह सर्व विदित है कि आजादी पूर्व भारत के सभी रियासतोँ मे हैदरबाद का रियासत सबसे ज्यादा दौलत वाला था .निजाम के पूर्वजोँ ने बेशुमार दौलत जमा कर रखी थी . सोने के भारी भारी छड ,ईंटे ,हीरे जवाहरातो का भंडार देखकर उनकी आंखोँ मे असीम सुख उत्पन्न हो जाता था . इसके अलावा उसके पास तमाम जमीन ,मकान ,हवेलियाँ और कोठियाँ थीँ ,जिनसे कई लाखोँ की आमदनी होती थी .उनके पास जैकब नाम का मशहूर हीरा था जिसे वह पेपर वेट की तरह प्रयोग करते .कहा जाता है कि एक बार उनके किसी बेहद अजीज ने उस नायाब हीरे को जरा सा छूने की तमन्ना की ,उसे छूने तो दिया मगर निजामकी आंखे उस पर ऐसी गडी थी कि छूने वाले व्यक्ति का हाथ थर थर काँप उठा था .उस ने पल भर मे ही उसे वापस टेबल पर रख दिया था सन .1937 मे निजाम की सम्पत्ति तात्कालिन भारत सरकार के बजट से दुगुनी थी .और सन 2012‌‌ ‌,13मे भारत सरकार के बजट से 1.5 ज्यादा है. भारत सर्कार का बजट 2012‌‌‌‌, 13 मे 9,35,685 करोड था ,जबकि निजाम की सम्पत्ति 12,98,000 करोड था . इंग्लैंड और स्कौट्लैंड को मिला कर हैदराबाद का क्षेत्रफल था . ब्रिटिश भारत मे पूरे विश्व मे हीरे का आपूर्ति करने वाला गोल् कुन्डा माइन हैदराबाद के निजाम का ही था . पहलीविदेशी कार रोल्स रोयल हैदराबाद की धरती पर कदम रखी .उसके पास पचास रोल्स रोयल थे .हाथी दांत के स्टीयरिंग, सोनेचांदी के कल पूर्जे वाली ये कारे निजाम की शान हुआ करती थी . आज भी वहाँ उन स्वर्णिम दिनो की यादगार मे रोल्स रोयलका एक म्युजियम बनाहै . निजाम के आखिरी समय मे उसके पास 14,718कर्म चा री थे ,सिर्फ मुख्यमहल मे ही करीब 3000 अरब बॉडी गार्ड थे .28 लोग पानीलाने के लिए थे ,38 आदमी झाड्फानूस साफ करने के लिए थे और बहुत से पान लगाने ,पान खिलाने के लिए . निजाम को महिलाओँ का बडा शौक था .उसके महलोँ मे औरतो का एक अच्छा खासा संकलन भी था


संसार का इतना धनी आदमी ,मगर उनकी कंजूसी के किस्से भी उतने ही मशहूर थे .लक्ष्मी को अप् ने पास बांध कर रखने की कला वे अच्छी तरह जानते थे .उनका कुर्तापैजामा भी मैला ही रहता था . छोटे फैले पैजामे की लम्बाई पैर से चार अंगुल उपर ही रहता मौजे टांगोँ के नीचे आ जाते. वे सिर पर झब्बेदार लाल तुर्की टोपी जो पैतिस साल पुरानी थी और बदरंग होकर जगह जगह से अपना दांत दिखा रही थी ,बेखौफ पहने रहते थे


एक बार उनको एक नई कम्बल खरीदनी थी ,पहली वाली का फी पुरानी हो चली थी ,उससे सर्दी नही जाती थी ,मगर सहायकोँ को सख्त आदेश था कि 25 रुपए से ज्यादा का कम्बल नही होना चाहिए .कम्बल 35 की थी इस लिए निजाम ने पुराने कम्बल से ही काम चलाने का इरादा कर लिया था .अनंत किस्सोँ मे एक है कि दतिया महाराज ने उन्हे घी के भरे कई मटके भेजे थे ,जिसे निजाम ने तह्खाने मे बंद कर वा दिया .साल दो साल के बाद जब कोई वहाँ किसी काम से गया तो भयंकर दुर्गंध फैली थी .जब नवाब को खबर मिली तो उसने उसे बेचने को कहा .बार बार समझाने पर भी कि सडी घी कौन मोल लेगा ,उसने कहा ,मंदीरो मे बेच दो . एक होशियारअघिकारी ने घी लेजाकर कहीँ नाले मे फेँक दिया और दो तीन रुपए लाकर उन्हेँ पकडा दिया .निज़ाम बहुत खुश हुए और उस अधिकारीकी तरक्की भी कर दी . वे सस्ती सिगरेट पीते ..उन दावतोँ मे जिनका खर्च निजाम को व्यक्तिगत् रुप से वहन करना पडता मेहमानो को बेस्वाद और बेजायका भोजन परोसा जाता ताकि वे जल्दी रुखसत हो जाए . जिन दावतोँ पर शाही खजाने का खर्च होता उन पर दिल खोल कर खर्च करते .इन दावतोँ मे वे माल् दार मेह् मानो को बुलाते उन्हे मामुली सा तोहफा देते और बदले मे उनसे भारी तोहफा वापस लेते .


वे रईसो के यहाँ शादी व्याह जैसे मौके पर शरीक होते और उनसे भेँट मे सोने की गिन्नियाँ कबूल करते .
उनकी रियासत मे अगर किसी ने नयी मोटर कार खरीदी और उन्होँने देख लिया तो उस बंदे के घर निजाम का आदमी पहुँच जाता ,निजाम एक बार उस गाडी को खुद चला कर देखना चाहते हैँ .गाडी का मालिक खुश होता था कि निजाम ने उसे इस लायक समझा ,मगर एक बार गाडी निकल जाने के बाद निजाम के गराज से वह कभी निकल नही पाती . निजाम के गैरेज मे 250 से300 के करीब गाडियाँ थीँ .


जब भारतीय रियासतो को भारत मे विलय करने की बात आई तब सरकार ने निजाम को सलाह दी कि अप् नी संचित धन राशि ,सोने की इंटे और हीरे जवाह् रात ,जेवर सब सुरक्षा को ध्यान मे रखते हुए बम्बई के एक बैंक मे रख देँ . उनकी जेवरोँ को कई बार जनता को दिखने के लिए सालार् जंग म्युजियम की मदद से एक्जिबिशन भी लगाया गया .


विभाजन से पहले और कुछ बाद मे भी ,निज़ाम के वित्त मंत्री मोईन नवाज जुंग जो पकिस्तानका समर्थक थ, ने 10,07,940 पाऊण्ड स्टर्लिंग और 9 सिलिंग लंदन के तत्कालिन पकिस्तानी हाइकमिश्नर रहीम् तुल्ला के नाम से नेश् नल वेस्ट् मि निस्टर बैंक ,जिसे अब रॉयल बैंक ऑफ स्कोट् लैंड कहते है .जमा कर् वाया था .


निज़ाम के 34 बच्चो मे से दो बेटे और तीन बेटियाअभी जीवित हैँ और एक सौ चार पोते पोतियाँ . . निजाम के वंशजोँ की वित्तिय स्थिति खराब हो चली है .वे चाहते हैँ कि पकिस्तान और भारत दोनो पहल कर के अदालत से बाहर,इंग्लैंड के बैंक मे बंद उनकी सम्पत्ति जिसके वो कानूनी हक्दार हैँ वापस दिल् वा देँ . मामला इतना सहज भी नही दिखता ,साठ सालो से खिचता आ रहा है .


फिल् हाल निजाम की युके बैंक मे 350करोड रुपए की सम्पत्ति भारत और पाकिस्तान के बीच झगडे की वस्तु बनी हुई है .

 

 

 


कामिनी कामायनी .

 

 

 

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