काशी में हिन्दू राज्य कैसे

 

काशी की समृद्धि को उस समय बड़ा धक्का लगा जब १२वीं सदी
के अंत में काशी पर मुगलों का आधिपत्य हो चला |काशी का गवर्नर हाजी इदरीस जियासुद्दीन बलबन का शासन था |जो काल
१३२१-१४२५ ई० जियासुद्दीन तुगलक के काल में जलालुद्दीन काशी का क्षेत्रीय शासक बना जिसने जलालुद्दीन पूरा बसाया था |
तुगलक वंश का प्रसिद्ध सुलतान मुहम्मद तुगलक के शासन काल में जैन आचार्य जिन प्रभुसूरि हुए जिन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा कि "वाराणसी उस समय समृद्ध थी | कलाकार ,विद्द्वान तपस्वी यहाँ निवास करते थे वाराणसी चार भागों में बटी थी |"जौनपुर से
शर्की वंश का उदय १४ वीं शदी में हो गया | काशी के मंदिर महमूद शाह १४३६-१४५८ के शासन काल में पुन : तोड़ गये | जौनपुर के पदमेश्वर मंदिर के मलवे से लालदरवाजा मस्जिद का निर्माण हुआ |
काशी का तत्कालीन गवर्नर गुलाम अमीन स्वतंत्र शासक हुसेन शाह के समय में १४७० ई० के समय के आसपास हुआ | बाबर और लोदी वंश के पराजय के पहले लोदी वंश के सिकंदर लोदी के अधीन १४९४ ई० में काशी रही |
बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराकर मुगलों का अधिकार प्राप्त कर लिया |किन्तु हुमायूं के दिल्ली लौट जाने पर जो बाबर का पुत्र था को अफगानियों ने १५२७ में मुगलों को भगा दिया परिणाम स्वरुप
बाबर को पुनःकाशी को जीतनी पड़ी |
घमाशान युद्ध होता रहा ,अफगान और मुगलों में १५२५ से १५३९ तक युद्ध होता रहा और परिणाम निकला कि काशी के शासक बार-बार बदलते रहे ,वहीं हुमायूं पराजित हुआ | काशी पर शूर वंश का शासन हो गया |
काशी में अकबर काल - काशी पर १५५९ ई० में अकबर काल में पुनःमुसलमानों का शासन आ गया अकबर का शासन दिल्ली पर १५५६ से १६०६ तक काल खण्ड में रहा |
राजा टोडरमल और पुत्र गोवर्धन का काशी से विशेष लगाव होने से उनका काशी से काफी संपर्क बना रहा | अकबर के शासन काल में काशी में शिक्षा ,धर्म क्षेत्र में उन्नति हुई ,मंदिरों कुंडो का निर्माण हुआ हिन्दू जमीदारों द्वारा वाराणसी (काशी )में तो मंदिर तालाब और घाटो का भी निर्माण कराया गया |
अंग्रेज यात्री का काशी में पदार्पण -उसने लिखा शान्ति प्रिय वाराणसी ,प्रजा स्वतंत्र ,कपड़ा व्यापार उन्नति पर है | इसी समय कबीर,तुलसी, रैदास और स्वामी रामानंद जी का उदय हुआ जिससे काशी भक्त -भक्ती का क्षेत्र पुनःकाशी बन गया | इस समय शैव धर्म की प्रधानता थी काशी में | और काशी के हिन्दू यात्रियों पर लगने वाला कर उठाने का आदेश शाहजहाँ बादशाह ने दिया था |
उधर इलाहाबाद के सूबेदार ने बनारस में बन रहे मैथ,मंदिरों को तोड़े जाने की सूचना दी | शाहजहाँ ने मंदिरों को नहीं तोड़ने को कहा लेकिन नया निर्माण पर रोक लगा दिया |
जहांगीर और शाहजहाँ का काल १६०५ से १६२६ ई० तक था |संत कविन्द्राचार्य के प्रयास से यात्रियों पर लगे जकात दाराशिकोह द्वारा जो उन दिनों इलाहाबाद का सूबेदार था ,वाराणसी उसके क्षेत्र में आता था हटा लिया गया |
दाराशिकोह शाहजहाँ के शासनकाल में अनेक धर्मग्रंथों का अध्ययन करता और धर्मिक उदारता से ओतप्रोत था इतिहास में उसकी उदारता प्रसिद्द है|
औरंगजेब के समय विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण क्रूर शासक औरंगजेब द्वारा कराया गया वह हिन्दुओं के प्रति भारतीय दर्शन पढने वालों को मूर्ख कहता था | बहुत से उसने देश के प्राचीन एतिहासिक मंदिर मैठ को नष्ट करवाया |संस्कृत पाठशालाएं बंद कराया |उसने १८०९ में अशोक की प्रसिद्द लाट भी तोद्वा डाली |
उसकी मनसा पूर्ण हुई होती तो वह काशी (वाराणसी ) को ही समाप्त कर देना चाहता था इसीलिए औरंगजेब ने काशी का नया नामकरण मुहमदाबाद कर दिया तिफाक से इसीबीच उसकी मृत्यु हो गई साथ ही मुगल शासन का अंत उसी के साथ हो गया |
काशी पर हिन्दू राजाओं का शासन १८ वी सदी में हो गया |
मुस्लिम सूबेदार मीर रुस्तम ने भूमिहार ब्राह्मण मनसा राम को काशी को सौप दिया और मंसाराम काशी के प्रथम हिन्दू शासक बन गए |

 

 

 

Sukhmangal Singh

 

 

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