नैनो तकनीक ; भविष्य पर एक दृष्टि

 

 

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अनुक्रमणिका
• परिचय
• भविष्य के लिये इस का क्या अर्थ है?
• नैनो तकनीक की कल्पना
• नैनो तकनीक के वर्तमान उपयोग
• चिकित्सा मे नैनो तकनीक
• नैनो रोबो करेगा काया की सैर
• नैनो तकनीक देगी सुरक्षित जल
• उद्गम
• नैनो प्रोद्योगिकी के वृहद अनुप्रयोग
• नैनो तकनीक से होगी कृसि की कायापलट

 

• चमत्कार भी होंगे
• नैनो भरेगी अधिक सूचना
• भारत मे जारी नैनो परियोजनाएं
• क्या है नैनो टेक्नोलॉजी?
• एक नैनोमीटर का एक मीटर की तुलनात्मक उपमाएं
• भविष्य के विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी में नैनो तकनीक
• क्या हो सकतें हैंदुष्प्रभाव(नैनो तकनीक केखतरे)
• उपसंहार


 

नैनो तकनीक ; भविष्य पर एक दृष्टि

 


परिचय

 


तकनीक के क्षेत्र में अगली क्रांति का नाम है नैनोटैक्नोलॉजी. वैज्ञानिकों का दावा है कि नैनो के दम पर इस सदी के मध्य तक पूरीदुनिया का कायाकल्प हो जाएगा, बड़े-बड़े काम बेहद छोटे उपकरण कर देंगे.
लिलिपुट जैसे बौनोँ की दुनिया की कल्पना सबने की है. इस बारे मे सोंचे तो अजीब सी सिहरन होती है. दरअसल सूक्ष्म से सूक्ष्मतर की क्रांतिकारी खोज ही नैनो टेकनोलॉजी है. एक नैनो एक मीटर का अरबवां भाग होता है. मोटे तौर पर कहेँतो मानव के बाल का अस्सी हजारवां भाग.अभी तक परमाणु को सबसे छोटा कण माना जाता रहा है, मगर नैनो उससे भी सूक्ष्म है. इसी सूक्ष्मतम भाग को लेकर हल्की मगर मजबूत वस्तुओँ का निर्माण किया जायेगा. इससे चमत्कारिक उपकरण तैयार होंगे, जो आश्चर्यजनक होंगे मगर सच्चाई लिये होंगे. ऐसे नैनो रोबो तैयार होंगे जो ह्रदय के लिये खतरा बनी हुई धमनियोँ को खोलते चले जायेंगे. ऐसी मिनी माईक्रोचिप ,जो बडी मात्रा मे सूचनाएँ भंडारित करेंगी ,कम्प्युटर , मोबाईल, टीवी की दुनिया बदल जायेगी. खान पान, सुरक्षा के नये रूप होंगे.
नैनो तकनीक जो दिन दूनी रात चौगुनी विकसित हो रही है कोई बहुत नयी तकनीक नही है. 50 के दशक से ही इसकी सैद्धांतिक चर्चा होती रही है. लेकिन पिछ्ले दशक मे ही इस सिद्धांत मे कुछ वैज्ञानिक प्रगति हुई. मूलत: परमाणुओँ की क्रमबद्ध पुन:व्यवस्था से बनी संरचनाओँ द्वारा ही यह तकनीक कार्य करती है. यह उन कणो पर भी आधारित हो सकती है जो किसी पदार्थ को अधिक शक्तिशाली,हल्का और टिकाउ बना सकते हैँ. इसका अनुप्रयोग उपयोग चिकित्सा विज्ञान मे भी हो सकता है जैसे कि कैंसर की दवाओँ को सही स्थान पर स्वस्थ कोशिकाओँ को बिना हानि के पहुंचाना. यह घाव को शीघ्र भरने, आहत उतकोँ एवं धमनियों की मरम्म्त करने मे भी काम आ सकते हैँ.
अगले कुछ दशकों मे नैनो तकनीक मे विभिन्न क्षेत्रों मे प्रगति के द्वार खुलने की सम्भावना है. कुछ ही वर्षों मे इस तकनीक द्वारा उत्पन्न उत्पादों द्वारा विश्व की अर्थव्यवस्था मे 1 ट्रिलियन डॉलर का योगदान होगा. अर्थाथ इस नैनो उद्योग मे 20 लाख लोगों के लिये रोजगार के सीधे द्वार खुलेंगे. और इससे तीन गुने लोगों को परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा.
एक समय था जब हथेली मे समा सकने वाले कम्प्युटर भी मात्र कल्पना की उपज एवं एक वैज्ञानिक परीकथा समझे जाते थे जो मात्र टीवी मे स्टार ट्रेक आदि मे दिखलाये जाते रहे थे परंतु आज हमारे पास आई-पैड्स (iPads), निजी पीडीए ( personal PDA’s), आई फोन (iPhones)हैं. नैनो तकनीक जो 50 वर्ष पूर्व मात्र एक सिद्धांत हुआ करती थी अब चिकित्सा विज्ञान, सेना, और अन्य वैज्ञानिक क्षेत्रोँ मे वास्तव मे अनुप्रयोग मे देखी जा सकती है.
भविष्य के लिये इस का क्या अर्थ है?
सेना और कानून व्यवस्था के लिये इसका अर्थ है हल्के और अधिक मजबूत बुलेट प्रूफ जैकेट (bullet proof materials)वह दिन भी शीघ्र ही आयेगा जब युद्धक्षेत्र (रणभूमि) मे ही सिपाही अपने घावों का उपचार वहीं पर इंजेक्शन लेकर कर सकेंगे या स्वयँ को अधिक जवान स्फूर्तिमान और तेज बना सकेंगे. कानून व्यवस्था सम्भालने वाले व्यक्ति अपना कर्तव्य बिना घायल होने के डर/खौफ के और भी सुचारु रूप से निभा सकेंगे.
चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र मे वंशानुगत विकृतियां शिशु के जन्म से पूर्व ही ठीक की जा सकेंगी.इसकी सहायता से नेत्रहीन फिर से देख सकेंगे तथा अल्ज़ाईमर्स और देम्निशिया जैसी बीमारियोँ का इलाज सम्भव हो सकेगा. लोग मोटापा कम कर सकेंगे, अधिक वर्षोँ तक जीवित कर सकेंगे, कैम्प/टेंट मे उपयोगी कपडे वाटरप्रूफ होंगे, कपडे कभी घिसेंगे नही या पुराने पडेंगे, मोटर कार हलके, और मजबूत और उर्जा क्षमतावान हो जायेंगे. कैंसर जैसी बीमारी का इलाज माईक्रोस्कोपिक रोबोट द्वारा म्युटेटेड कोशिकाओं को खदेड बाहर कर सम्भव हो सकेगा. ईंधन की क्षमता बढ जायेगी, ल्युब्रिकेंट्स बेहतर काम कर सकेंगे या ईंजन और अन्य पुर्जे अपना ल्युब्रिकेशन स्वयँ ही कर सकेंगे.
अंतरिक्ष अन्वेषण मे भी बहुत सम्भावनाएं पैदा होंगी. चंद्रमा पर बेस बनाये जा सकेंगे. स्वयँ मरम्मत करने की क्षमता रखने वाले स्पेस स्टेशन और उपगृह बनेंगे. स्पेस शटल के साथ कोई दुर्घटनाएँ नही होंगी और किसी खराबी की स्थिति का आभास होते ही नैनो तकनीक स्वत: ही दुर्घटनाओँ और मृत्यु की रोकथाम कर सकेगा. नैनो तकनीक के अनुप्रयोग के ये मात्र कुछ उदाहरण हैं जो देखने सुनने मे परिकथाओँ जैसे ही लगते हैँ जैसे की कुछ सौ वर्ष पूर्व आज की उपलब्ध आधुनिक दूरसंचार एवं मोबाईल तकनीक भी लगती रही होंगी.
नैनो तकनीक की कल्पना
जब सामान्य जन नैनो तकनीक के बारे मे कल्पना करता है तो उसे स्टार ट्रेक की याद आती है जिसमे छोटे छोटे रोबोट शरीर मे प्रवेश करते हैं या ऐसे स्थानो पर भेजे जाते हैँ जहाँ एक सामान्य व्यक्ति नही पहुंच सकता जैसे रेडियोधर्मी तत्वोँ के मध्य, परमाणविक प्लांट्स आदि. हालांकि यह कुछ हद तक सत्य है परन्तु यह मात्र छोटे छोटे रोबोट बनाने जो ऐसे कार्य करेँ जो हम नही कर सकते, तक ही सीमित नही है. अब तो यह मुख्य धारा से जुडने वाली तकनीक बन रही है और विज्ञान एवं शैक्षिक संस्थाओँ मे वास्तविक दैनिक जीवन मे इसके सम्भावित अनुप्रयोगोँ पर आम चर्चा होती है.
यह लेख वैज्ञानिकों के लिये नही लिखा गया है अत: गैर तकनीकी व्यक्तियों के लिये सरल भाषा मे नैनो तकनीक का अर्थ कुछ इस प्रकार समझाया जा सकता है. यह परमाणविक स्तर पर निर्माण पर आधारित तकनीक है जिसमे परमाणुओँ को क्रमवार सजा कर सूक्ष्म ढांचे बनाने से सम्बंधित है. इनमे से अनेक संरचनाएं आज चिकित्सा, ईंजीनियरिंग एवं अन्य विभिन्न क्षेत्रों मे उपयोग मे लायी जा रही हैं. इनकी सहायता से डीएनए की मैपिंग की जा सकती है. ऑपरेशन के उपरांत या किसी दुर्घटना के बाद घाव को शीघ्र भरने मे के साथ साथ ग्लुकोमा, ह्रदय रोग और मानसिक बीमारियों मे भी ये सहायक सिद्ध हो सकती हैं.
नैनो तकनीक का उपयोग वैकल्पिक उर्जा के क्षेत्र मे भी हो सकता है. नैनाईट्स की सहायता से पवनचक्कियां सुचारु रूप से कार्यशील रखी जा सकती हैँ. सौर उर्जा पैनल्स का भी ठीक रखरखाव किया जा सकता है. और साथ ही बायोईंधनमे प्रयुक्त काई ( अलगी) के उत्पादन की दर मे वृद्धि की जा सकती है. हालांकि नैनो तकनीक काफी नयी है इसकी क्षमताओं एवं इसके मूल सिद्धांत के विषय मे प्रसिद्ध नोबल पुरस्कार प्राप्त भौतिकशास्त्री रिचर्ड फाईनमैन ने पहले ही (1959 मे) आशाएं व्यक्त की थीं.
एक सामान्य व्यक्ति के लिये आखिर इसके क्या मायने हैं? वह दिन दूर नही जब नैनो तकनीक की सहायता से अधिक खाद्य पदार्थ उत्पन्न किये जा सकेंगे, अधिक स्वच्छ जल उपलब्ध किया जा सकेगा, और बेहतर जीवन यापन किया जा सकेगा. जापान मे हाल ही मे आये भूकम्प जैसी स्थिति मे न्युक्लीयर पॉवर प्लांट के पिघलने के पूर्व ही नैनाईट्स की सहायता से ढांचे का पुर्निर्माण कर रेडियेशन लीक होने से बचाव किया जा सकेगा.
सैनिक व्यवस्था मे इनकी सहायता से (युद्धभूमि) सीमा पर सिपाही के घाव शीघ्र भर सकेंगे, उनमे अधिक तेजी लायी जा सकेगी, लम्बे समय तक बिना थके (निढाल हुए) वे मुकाबला कर सकेंगे. अपने शस्त्रोँ को बेहतर बना सकेंगे. भविष्य मे नैनाईट्स दुश्मन के प्लांट्स और भंडारों का नाश कर युद्ध को कम अंतराल मे समाप्त कर सकेंगे. युद्ध मे ध्वस्थ हुए देशोँ मे नये और बेहतर सुरक्षित ढांचे शीघ्र बनाये जा सकेंगे.
यह कुछ क्षेत्र हैं जिसमे नैनो तकनीक का अनुप्रयोग किया जा सकता है. जितना अधिक शोध एवं विकास इस क्षेत्र मे होगा उतने ही अधिक इसके अनुप्रयोग बढते जायेंगे. शायद वह दिन भी आयेगा जब हम इन नैनाईट्स को चांद, मंगलगृह या किसी दूसरे गृह पर भेज सकेंगे वहा बेस बना सकेंगे, अंतरिक्ष खेती फार्म (terraform) बना सकेंगे. इनका उपयोग पर्यावरण एवं अपने घरों के वातावरण को बेहतर बनाने मे भी किया जा सकेगा. ये ओज़ोन परत की मरम्म्त मे (छिद्रों को भरने मे), वायुमंडल से प्रदूषण कारी तत्वों के निदान मे भी उपयोगी सिद्ध हो सकेंगे.
नैनो तकनीक के वर्तमान उपयोग
आज हर दैनिक जीवन की घरेलु वस्तु मे नैनो तकनीक का समावेश है. उपभोक्ता वस्तुओँ मे इनके अनेकोँ अनुप्रयोग हैं. उदाहरण के लिये धूप का चश्मा. ग्लास की कोटिंग मे नैनो तकनीक का उपयोग होता है जिसके कारण वे और भी मजबूत और हानिकारक पैराबैंगनी (UV rays) किरणों को पहले की तुलना मे अधिक बेहतर तरीके से ब्लॉक कर सकते हैँ. सनस्क्रीन और अन्य कॉस्मेटिक्स मे भी नैनो कण होते हैँ जो प्रकाश को आर पार जाने देते हैं परंतु पैराबैंगनी (UV rays) किरणों को रोक देते हैं. पहनावे हेतु कपडों को भी ये अधिक टिकाउ बनाते हैं उन्हे वाटरप्रूफ और हवा प्रूफ बनाते हैं. टेनिस की गेंद भी नैनो कम्पोसिट कोर से बनाई जाती हैं ताकि उनका बॉउंस अधिक हो और पुरानी तकनीक से बनी गेंदों की तुलना मे अधिक टिकाउ हो. पैकेजिंग जैसे की दूध आदि के कार्टन मे नैनो कण इस्तेमाल किये जाते हैँ ताकि दूध प्लास्टिक की थैली मे अधिक समय तक तरोताजा रहे. ये कुछ उदाहरण हैं उन वस्तुओँ के जिन्हे हम अपने दैनिक जीवन मे उपयोग मे लाते हैं.
चिकित्सा के क्षेत्र मे भी अनुसंधान जारी हैं. अनेक औषधी पहुंचाने की तकनीकों मे इसका उपयोग होता है जिससे वह सीधे शरीर के प्रभावित स्थान पर ही जाकर असर करती है. ऑर्गेनिक नैनो कण जो कैंसर की दवा के साथ मिलाकर दिये जाते हैं उनका सफल परीक्षण चूहोँ पर किया जा चुका है और शीघ्र ही मनुष्य पर आजमाया जायेगा जिससे मात्र कैंसर की कोशिकाएं नष्ट होंगी और उनका असर स्वस्थ कोशिकाओं पर नही पडेगा. नर्व के पुनर्निर्माण पर भी अध्ययन जारी है. यह इस प्रकार कार्य करता है कि नैनाईट्स ओप्टिक नर्व और आँख के मध्य लिंक बनाते हैं और उस पुल की कोशिकाओं के पुन:वृद्धि का मार्ग बनाते हैं. इसका उपयोग ह्रदयाघात के मरीजों को भी राहत पहुंचाने,अल्ज़ाईमर्स और डेम्नेशिया के मरीजों एवं अन्य कई बीमारियों मेकी सहायता मे किया जाता है,
नैनो तकनीक का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स मे भी बखूबी होता है. ये LED’s मे , और आजकल डिजिटल केमेरा मे छोटे PDA’s मे एवं अन्य कई वस्तुओँ मे. हालांकि अभी यह कम पैमाने पर ही होता है परंतु यह बेहतर प्रकाश देने, फ्लेक्सिब्ल सौर पैनल्स मे तथा पेंट की तरह घर मे, नावोँ और हवाईजहाज के फोटोवोल्टेइक झिल्लियों मे भी इस्तेमाल किये जाते हैं.
औटोमोबाईल उद्योग मे नैनाईट्स ईंधन, तेल एवं अन्य द्रव मे मिलाये जाते हैं ताकि वे अधिक सक्षमता से कार्य करें. अन्य द्रवों को बेहतर ल्युब्रिकेंट बनाने और इस प्रकार इंजन का कार्यकाल (जीवन) बढाने मे भी वे उपयोगी सिद्ध हुए हैं. धातु मे भी मिलाकर उसे अधिक मजबूत और हल्का बनाने मे जो अंतत: ईंधन की क्षमता बढाने तथा गाडियों को अधिक टिकाउ बनाने मे भी नैनो कण कारगर सिद्ध होते हैं.
चिकित्सा मे नैनो तकनीक
नैनो तकनीक आज तक की सभी तकनीकी इजाद मे सबसे महान तकनीक मानी जाती है. इसका उपयोग अनेक क्षेत्रों जैसे यांत्रिकी, कम्प्युटर्स, हथियार, चिकित्सा विज्ञान आदि मुख्य क्षेत्रो मे होता है. चिकित्सा विज्ञान मे इसके अनुप्रयोग की असीमित सम्भावनाएं हैं. कुछ मात्र कल्पना मे हैं कुछ अभी परीक्षण मे हैं और कुछ प्रचलन मे भी हैं.
राष्ट्रीय अमेरिकन नैनो तकनीकी (National US Nano Technology) ने नैनो तकनीक मे अनुसंधान द्वारा लोगों के जीवन को और भी बेहतर बनाये जानेकी दिशा मे कई कदम उठाए हैं. तत्व पहुंचाने (drug delivery) की प्रक्रिया मे नैनो कण दवा, प्रकाश, उष्मा या अन्य कोई तत्व को विशिष्ट कोशिकाओं (उदाहरण के लिये कैंसर कोशिकाओं) तक पहुंचाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इन नैनो कणों को इस प्रकार जनित किया जाता है कि वे कैंसर पीडित कोशिकाओँ की ओर आकर्षित होते हैं और सीधे ही उनका इलाज करते हैं. साथ ही यह तकनीक स्वस्थ कोशिकाओं को हानि से बचाते हैं और बीमारी को उसकी प्रारम्भिक अवस्था मे ही पता लगा लेते हैं. जाहिर तौर पर इनका अनुप्रयोग केमोथिरेपी मे भी होता है. समस्त शरीर को लक्ष्य बनाने की आवश्यकता नही पडती बल्किकैंसर ग्रस्त कोशिकाओं पर सीधे हमला किया जा सकता है. जाहिर तौर पर अधिकांश लोग इंजेक्शन लेने से डरते हैं उनके लिये नैनो तकनीक मे दवा को नैनो कणो मे केंद्रित कर दिया जाता है जिसे मुंह से लिया जा सकता है और जो इसे पेट से होकर रक्त धमनियों मे प्रवाहित कर देते हैं. अब हम नैनो तकनीक का अनुप्रयोग उपचार के तरीकोँ मे देखें. नैनो तकनीक द्वारा नैनोशेल्स बनाये जा सकते हैं जो इंफ्रारेड किरणो से प्राप्त उष्मा को केंद्रित कर सकते हैं जो मात्र कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को ही नष्ट करते हैं ताकि समीप के स्वस्थ कोशिकाओं को कम से कम हानि पहुंचें. इस तकनीक का उपयोग रेडिएशन थिरेपी जिनमे कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं के साथ स्वस्थ कोशिकाएं भी नष्ट हो जाती हैं, के एक बेहतर विकल्प की तरह किया जाता है. कुछ इस प्रकार के नैनो कण भी होते हैं जो गम्भीर रुप से घायल मरीज के शरीर से जल का अधिशोषण कर रक्त के बहाव को शीघ्र नियंत्रित (तुरंत क्लॉटिंग) कर सकती हैं. ऐसे भी नैनो कण होते हैं जिनको सांस के साथ लेने से श्वास सम्बंधित बीमारियोँ के प्रति इम्युन प्रणाली को उत्तेजित कर सकते हैं.
नैनोतकनीक का उपयोग निदान एवं इमेजिंग तकनीकों मे भी होता है. इस बात पर शोध हुआ है कि क्वांटम डॉट्स का उपयोग निकट भविष्य मे कैंसर की गांठ (ट्युमर) की पह्चान एवं निदान एवं नमूना परीक्षण मे किया जा सकता है. परंतु वे हानिकारक हो सकते हैं अत: क्वांटम डॉटस जिसमे सिलिकन का अंश होता है उसे उपयोग मे लाया जा रहा है क्योंकि वह केड्मियम की तुलना मे कम हानिकारक है. नैनो कणो का उपयोग कैंसर ट्युमर के एमआरआई (MRI) से प्राप्त प्रतिकृति (इमेज) मे परिशुद्धता लाने मे भी होता है. बेशक यह तब सम्भव होता है जब इसे लोहे के ऑक्साईड से मिश्रित किया जाता है. चिकित्सा के क्षेत्र मे एंटी माईक्रोबियल तकनीक एक और विधा है जिसमे नैनो तकनीक का उपयोग किया जाता है. मुख्यत: यह घावों को शीघ्र भरने से सम्बंधित है. नैनोकण वाले क्रीम छूत की बीमारियों से बचाव मे सहायता कर सकते हैं. अंतत: यह कोशिकओं की मरम्म्त मे भी इस्तेमाल हो सकते हैं. नैनो रोबोट बीमार कोशिकाओं की मरम्म्त के लिये प्रोग्राम किये जाते हैं. ये नैनोरोबोट उसी प्रकार कार्य करते हैं जिस प्रकार प्राकृतिक चिकित्सा मे घाव भरने मे एंटिबॉडीस करते हैं. बावजूद के नैनो तकनीक मे अनेक जोखिम पैदा हो सकते हैं परंतु इसके लाभ इतने अधिक हैं कि यदि पूरे नियंत्रण मे कार्य करें तो स्वास्थ्य के लिये यह बहुत कारगर सिद्ध हो सकते हैं.
नैनो रोबो करेगा काया की सैर
आज चिकित्साजगत मे ईलाज के लिये “ हिट एंड ट्रायल “ पध्दति है अर्थाथ अनुमान के आधार पर रोग की दवा दी जाती है. लेकिन अब नैनो पध्द्ति द्वारा दवा ठीक ठिकाने पर पहुंचेगी.इस दिशा मे तेल अवीव विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण सफलता सामने आयी है. रिपोर्ट के अनुसार मात्र एक परमाणुकी मोटाई का एक ऐसा नैनो कण आधारित नैनो रोबो तैयार कर लिया गया है, जो स्टील की तरह मजबूत है और रबड की तरह एकदम लचीला. विश्वविद्यालय के रिसर्चएंड ईम्यूनोलॉजी विभागमे कार्यरत शोधकर्ता प्रो. डेन पीयर के अनुसार यह ‘मिनी सबमैरिन‘ शरीर के कोने-कोने की खबर लेने मे सक्षम है. इसके द्वारा धमनियोँ- शिराओँ की रुकावट को खोल पाना सम्भव है तो वहीँ पूरे इम्यून सीस्टम मे यह दवा भी ठिकाने पर पहुंचा देता है.
नैनो कणों मे उसके आकार के अनुरूप रंग प्रदर्शित करने की क्षमता है. अत: इसके द्वारा कैंसर कोशिकाओँ की पकड भी संभव हो चली है. दो नैनो मीटरआकार के कण चमकीले हरे होते हैँ तो वहीं 5 नैनोमीटर आकार के कण गहरा लाल रंग प्रदर्शित करते हैँ. लंबे समय से इस बात की आवश्यकता महसूस की जा रही थी कि कोई इतना सूक्ष्म उपकरण मिल जाये, जो कोशिकाओँ मे प्रवेश कर वहाँ उपस्थित डीएनएऔर प्रोटीन से सम्पर्क कर पाए. नैनो कण ने यह सपना साकार कर दिखाया है. इसके आधार पर कैंसर प्रभावित कोशिकाओँ को बेहद प्रारम्भिक अवस्था मे पकड पाना संभव होगा. इसके बाद नैनो कणो के सहारे ही कैंसर कोशिकातकदवा पहुंचाना संभवहो जायेगा. इससे अन्य कोशिकाएँ प्रभावित नही होंगी. इसके आगे की सफलता जियार्जीयाई वैज्ञानिकों ने प्राप्त की है. जिआर्जिया स्थित ओबेरियन कैंसर इंस्टिट्युट के वैज्ञानिकोद्वारा कैंसर प्रभावित कोशिकाओँ को धोकरउन्हे तैराते हुए शरीर के बाहर निकालने की प्रभावकारी तकनीक विकसित की गयी है. यहाँ के स्कूल ऑफ बायोलॉजी के डॉ. जॉन मैक्डॉनल्ड द्वारा चुम्बकीय नैनो कणों का प्रयोग करते हुए रक्त मे तैरती कैंसरकोशिकाओँ की धरपकड की और उन्हे तैराते हुए शरीर से बाहर ले आये. रिपोर्ट के अनुसार ट्युमर से कैंसर कोशिकाओँ कोनिकाल उदर मे पहुंचाना भी संभव हुआ है. इस तकनीकका प्रयोग ओवेरियन कैंसर के इलाज के लिये प्रभावी होगा. इस दिशा मे भारतीय वैज्ञानिकों की एक उल्लेखनीय दर्द निवारक सफलता सामने आयी है. डीआरडीओ के वैज्ञानिकों द्वारा ईलेक्ट्रिक शॉक के लिये मैग्नेटिक नैनो पार्टीकल्स का प्रभावी प्रयोग कर दर्द को घटाया गया है. आने वाले समय मे नैनो टेक्नोलॉजी का प्रयोग एड्स जैसी गंभीर बीमारी के लिये भी संभव होगा.
चमत्कार भी होंगे
जर्मन वैज्ञानिकों ने पिछले दिनों नैनो पार्टिकल्स आधारित ऐसा स्प्रे तैयार किया है जो सफाई के लिये विशेष तौर पर सहायक होगा. नैनोपूल नामक फर्म द्वारा तैयार यह स्प्रे मानव बाल से भी छोटेस्थान की सफाई कर उसे कीटाणुरहित कर डालता है. स्नानागृह आदि मे यह स्प्रे आनन-फानन मे उन्हे साफ कर डालेगा. यह दावा किया जाता है कि ओवन, गैस चूल्हा, बर्तन आदि मे जले खाद्य,जले के दाग, पत्थर पर जमी गंदगी हो, कार का शीशा या कपडे के दाग इस नैनो स्प्रे के आगे टिक नही पायेंगे.
नैनो भरेगी अधिक सूचना
हालाँकि कम्प्युटर चिप आज भी भरपूर सूचना संजोने मे सक्षम हैँ, लेकिन आने वाले समय मे नैनो इसे कई गुना बढा देगी. ऑक्स्फोर्डविश्वविद्यालय की कम्पनी आईसिस इन्नोवेशन द्वारा ‘द ओक्स्फोर्ड इंवेंशन‘ नामक एक प्रभावी तकनीक विकसित की गयी है,जिससे कार्बन नैनोट्यूब को शुद्ध कर इसे सिलिकॉन चिप के रूप मे प्रयोग किया जा सकेगा. नैनोट्यूब वर्तमान ट्रांजिस्टर के आकार के 500 वेँ भाग के बराबर होती है और इसमें बेहतर विद्युतीयगुण होते हैं. ब्रिटेनऔर स्पेनके वैज्ञानिकनैनोमीटर ड्रिल काइस्तेमाल चिप मे ईलेक्ट्रॉन के स्थान पर प्रकाश का प्रयोग करने की दिशा मे मे करने मे कार्यरत हैं.
मोबाईल की कम कीमतें
नैनो तकनीक आधारित मोबाइल अत्यंत संवेदी, सूचना से भरपूर, अनेक फीचर वाले तो होंगे ही, साथ ही इसकी कीमत भी बहुत कम होगी. इसा दिशा में न्युकैसल विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ नैनोस्केल साइंस एंड टेक्नोलॉजी आईएनईएक्स के वैज्ञानिकों और इंन्जीनियरोँ ने उत्तरी ब्रिटेन के दो पर्यटक स्थान इतने छोटे पैमाने पर बना लिये हैं, जो कोरी आंखों से दिखाई भी नही देते.
वैज्ञानिकों के इस दल ने रसायंशास्त्र , भौतिकी और मेकेनिकल इंजीनियरिंग का प्रयोग करते हुए ‘द एंजल ऑफ द नॉर्थ’ और ‘दटाइन ब्रिज’ नामक दो नन्हे ढांचे बनाए हैं. दोनो ही सिलिकनके बने हुए हैं और लगभग चार सौ माइक्रॉन चौडे हैं.इन मॉडलोंको बनाने मे इस्तेमाल टेक्नोलॉजी को अगली पीढी के मोबाइल फोन के सूक्ष्म एंटीना बनाने के काम में लाया जा सकता है.
भारत मे जारी नैनो परियोजनाएं
वर्ष 2003 के अंत में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा कोलकाता में ‘इंटर्नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन नैनो साइंस एंद टेक्नोलॉजी’ का आयोजन किया गया था. बैंगलोर स्थित जवाहर लाल नेहरु सेंटर फ़ॉर एड्वांस साइंटिफिक रिसर्च में नैनो विज्ञान पर उल्लेखनीय कार्य किये जा रहे हैँ. यहांसे 1.5 नैनोमीटर व्यास की नैनो ट्यूब तैयार की गयी. पुणे स्थित राष्ट्रीय रसायन प्रयोगशालाद्वारा नैनोकणोंकी दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है. यहां नीम आधारितस्नव के प्रयोग हुए क्रायोजनिक मेटल और बायोमेटलिक नैनो कणों का निर्माण किया गया है. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग संस्थान, नई दिल्ली स्थित केंद्रीय प्रयोगशाला जैसे देश के विभिन्न संस्थान व विश्वविद्यालय भी नैनो तकनीक की दिशा मे शोधरत हैं.
क्या है नैनो टेक्नोलॉजी?
नैनो तकनीक के सहारे वस्तुओँ को अतिसूक्ष्म तरीके से बनाया जा सकेगा. इसका प्रयोग व्यापक रूप मे होगा. यह शब्द ग्रीक भाषा से आया है. हालांकि वहां मूलत: नैनो ना हो कर ‘ नैनोज़’ है. इसी नैनोज़ को प्रारम्भिक स्तर पर वैज्ञानिकों ने किसी विशिष्ट अभिप्राय और भविष्य की सूक्ष्मतर कणों से सम्बंधित शाखा को स्पष्ट करने के लिये प्रयोग किया. लम्बेसमय तक इस शब्द को अपनाने के लिये वादविवाद भी हुआ मगर अंतत: इसका प्रयोग सूक्ष्म से सूक्ष्मतर अंश के लिये किया गया. वास्तव मे ग्रीक भाषा मे नैनोज का शाब्दिक अर्थ बौना (ड्वार्फ) है.
पिछले कुछ सालों में नैनो टेक्नॉलोजी ने जो दिन दूनी रातचौगुनी तरक्की की है उससे साफ लगने लगा था कि बीसवीं सदी के अन्तिम वर्षो में सूचनातकनीक (आईटी) ने जो व्यापक क्रांति पैदा की थी, 21वीं सदी के शुरूआती दशकों मेंनैनो टेक्नॉलोजी उससे बडी क्रांति लाएगी. ऎसी क्रांति जो हर उद्योग और जीवन के हरपहलू को एक नए धरातल पर ला खडा करेगी.
आईटी ने वाकई सब कुछ बदल डाला. गौर करनेपर पता चलेगा कि अब कुछ अछूता रह ही नहीं. आज की आर्थिक मन्दी ने जहां और उद्योगोंके विकास पर ब्रेक लगाया है, वहीं आईटी को भी प्रभावित किया है.
नैनो का हाल यहहै कि इसके कारण हर तकनीक (टेक्नॉलोजी) बदल जाएगी. इस तकनीक (टेक्नॉलोजी) का भविष्य बहुत उज्ज्वलमाना जा रहा है. इसके बावजूद यह सवाल बार-बार उठने लगा है कि इस तकनीक पर आधारितउत्पाद कितने सुरक्षित हैं. कई महत्वपूर्ण रिसर्चो और विभिन्न देशों की सरकारीरिपोर्टो में इसके सुरक्षा पहलू पर संदेह व्यक्त किया गया है. आईटी के भारत मेंतेजी से विकास का एक कारण यह भी था कि यह उद्योग सरकारी नियंत्रण और सरकारी बाबुओंकी अडंगेबाजी से मुक्त था. लाइसेन्स परमिट कोटा राज की अपवित्र परछाई इस पर नहींपडने दी गई. सरकारी तंत्र की रिश्वतखोरी और अडचन डालने की आदत ने इसकी राह नहींरोकी.
आईटी की तरह नैनो भी विश्व भर में सरकारी नियंत्रण से दूर रही. लेकिन अबइस पर कुछ नियंत्रण की बात चल रही है, क्योंकि इसके कारण लोगों के स्वास्थ्य तथापर्यावरण को भारी क्षति पहुंच सकती है. नैनो का "रॉ-मेटेरियल" (कच्चा माल) दरअसल वेसारे तत्व हैं जो सजीव और निर्जीव के सृजन में मूल "बिल्डिंग ब्लॉक" या मकान मेंइस्तेमाल आने वाली ईट की हैसियत रखते हैं.
नैनो में पदार्थ के बहुत ही सूक्ष्मस्तर पर काम होता है. एक नैनो मीटर एक मीटर का अरबवां भाग होता है. यानी हाइड्रोजनके दस अणु (एटम) एक के बाद एक जोडें तो वह एक नैनोमीटर होगा. एक डीएनए अणु, ढाई नैनो मीटर होता है.
खून की एक कोशिका 5000 नैनोमीटर की होती है तथा मनुष्यके एक अकेले बाल की मोटाई 80,000 नैनोमीटर होती है. इससे पता चलता है कि नैनोइंजीनियरिंग में किस अतिसूक्ष्म स्तर पर काम होता है. नैनो स्तर पर पदार्थ का छोटेसे छोटा मापतो होता ही है, उसके गुण भी बदल जाते हैं. तांबे को नैनो स्तर पर लानेपर वह इतना लचीला हो जाता है कि कमरे के तापमान पर ही उसे खींच कर साधारण तांबे केमुकाबले पचास गुणा लम्बा तार बना सकते हैं. नैनो स्तर पर सीधी-सादी चीजें भी बहुतविषैली हो सकती हैं.
इसके जरिए सजीव कोशिकाओं तथा दूसरे सजीव पदार्थो को निर्जीवअणुओं के साथ जोडकर कई चीजें बनाई जा रही हैं. आज इस तकनीक से तैयार किए गए सामानबाजार में आने लगे हैं. चाय-कॉफी, खान-पान के धब्बे न स्वीकार करने वाले पेंट औरदवा से लेकर श्रंगार सामग्री तक बनने लगी है.
एक नैनोमीटर मीटर का सौ करोडवां, या 10−9, भाग है. तुलना के लिये:
• कार्बन:कार्बन अणुकणिकाओं में अणुओं के बीच की दूरी लगभग .12-.15 नैनोमीटरहोती है.
• डी एन ए की चौडाई करीबन 2 नैनोमीटरहै.
• सबसे छोटी कोशिकाएंमैकोप्लास्माजाति के जीवाणु की चौडाई लगभग 200 नैनोमीटरहै.
एक नैनोमीटर का एक मीटर की तुलनात्मक उपमाएं
• अगर एक कंचा एक नैनोमीटर हो तो पृथ्वी एक मीटर होगा
• एक नैनोमीटर एक आदमी की दाढी में उतनी बढोतरी होगी जब तक वह उस्तरे को अपने चेहरे तक लाता है.
नैनो तकनीक देगी सुरक्षित जल
जल्दही देश में एक ऐसी नैनो तकनीक आने वाली है, जिसके माध्यम से पानी को पहले से भीअधिक स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जा सकेगा. इससे पानी लोगों के घरों में पहुंचने सेपहले ही सभी तरह के संक्रमणों और कीटाणुओं से मुक्त किया जा सकेगा.
इसतकनीक की खोज को लेकर देश के वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं.
खास जीन्स की मदद से अच्छी क्वालिटी के उत्पादों के विकास में बायोटेक्नोलॉजी अहम भूमिका अदा कर रही है.इस तकनीक की पूरक नैनो टेक्नोलॉजी इसक्वालिटी को बढ़ाने में और कारगर रोल निभाने को तैयार है. जैविक कणों और कोशिकाओंके बेहतर इस्तेमाल में यह तकनीक काफी कारगर साबित हो सकती है. इसके जरिए ऐसेलक्ष्यों को भी प्राप्त किया जा सकता है, जो अन्य के माध्यम से असंभव है.
इसके अलावा नैनो टेक्नोलॉजी पेड़ और प्राणी संबंधी जीनोम के अध्ययन में भीमहत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है, जिससे डीएनए को क्रमवार करने में अभी के मुकाबलेकाफी कम समय लगेगा और यह प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी.
नैनो तकनीक में दो प्रमुख पध्दतियों को अपनाया गया है. पहलीपध्दति में पदार्थ और उपकरण आणविक घटकों से बनाए जातें हैं जो अणुओं के आणुविकअभिज्ञान के द्वारा स्व-एकत्रण के रसायनिक सिध्दांतों पर आधारितहै.
नैनो तकनीक या नैनो प्रौद्योगिकी, व्यावहारिक विज्ञान केक्षेत्र में, 1 से 100 नैनो पैमाने मंर प्रयुक्त और अध्ययन की जाने वाली सभी तकनीकोंऔर संबंधित विज्ञान का समूह है.
उद्गम
नैनो तकनीकी केसिध्दांतों का पहला प्रयोग केल्टेक में 29 दिसंबर, 1959, अमरीकन फिजिकल एसोसिएशनकी बैठक के दौरान रिचर्ड फाईनमेनके व्याख्यान में हुआ. फाईनमेन ने एक विधि का उल्लेखकिया, जिसमें एकल अणुओं और अणुकणिकाओं के प्रकलन हेतु सूक्ष्म यंत्रों को बनाने कासुझाव है. उन्होंने इस दौरान गुरुत्वाकर्षण के घटते प्रभाव और पृष्ठ तनाव और वॉन डरवाल आकर्षण की बढती प्रमुखता का उल्लेख किया. नैनो तकनीक शब्द को गढ़ने का श्रेयटोक्यो विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रो. नोरिओ तानिगुच्हि ने किया.
नैनो प्रौद्योगिकी के वृहदउपयोग
हालांकि नैनो तकनीकी के संभावित उपयोगों का एकबडा दायरा है. अधिकतर वाणियिक उपयोग पहली पीढ़ी के निष्क्रिय पदार्थों का ही है.इनमें शामिल है टाईटेनियम डाई ऑक्साइड का प्रयोग प्रसाधन सामग्रियों में, चांदी नैनोकण का प्रयोग खाद पदार्थों के डिब्बा बंदी, कपडों, कीटाणुनाशकों और घरेलू यंत्रोंमें, जस्ता ऑक्साइड नैनो कण का प्रयोग प्रसाधन सामग्रियों, पेंट, बाहरी-फर्नीचरवार्निश, और सेरियम ऑक्साइड ईंधन-उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है. फिर भी, अभीअनुसंधान किए बिना अगले शिखर पर जाना संभव नही है. नैनो शब्द के मूल सिध्दातों कोउत्पादन के स्तर तक ले जाने के लिए नैनो स्तर में अणुओं का परिचालन पर अनुसंधानजारी है.
चिकित्सा क्षेत्र में जैव तकनीक के क्षेत्र मेंनैनो तकनीक की मदद से कई सारी ऐसी बीमारियों का निदान संभव हो सकता है जिसका अभी तकइलाज मुश्किल रहा है. उदाहरण के लिए नैनो तकनीक से बने सूक्ष्म संयंत्र को मनुष्यके शरीर के अंदर स्थापित करके मनुष्य की बीमारी की स्थिति की बराबर निगरानी रखी जासकती है.
नैनो तकनीक से होगा कृषि का कायापलट
स्वास्थ्य, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जैविक वऔद्योगिक क्षेत्रों में नैनो तकनीक की उपयोगिता को पहले ही काफी सराहा जा चुका है, लेकिन कृषि की सूरत बदलने में इसकी संभावित शक्तिकीजानकारी अधिकलोगों को नही है.
हकीकत यह है कि नैनो तकनीक के जरिए खाद्य सुरक्षा की स्थिति कोबरकरार रखने के साथ-साथ फाइबर, ईंधन और अन्य कृषि उत्पादों की भी मांग पूरी की जासकती है. भारत में बायो-टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कुछ देर से शुरू हुआ.इसवजह से यहां इस तकनीक का फायदा कृषि और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में नहीं उठायाजा सका है, लेकिन अब कृषि वैज्ञानिक नैनो तकनीक के मामले में ऐसी गलती दोहराना नहींचाहते. देश के कुछ कृषि विश्वविद्यालयों में पहले ही नैनो तकनीक से जुड़े कोर्स औररिसर्च संबंधी अभियान शुरू कर चुके हैं.
खास जीन की मदद से अच्छी क्वॉलिटी के उत्पादों के विकास में बायो टेक्नोलोजीअहम भूमिका अदा कर रही है.

 

 

हालांकि इस तकनीक की पूरक नैनो टेक्नोलोजी इस क्वॉलिटी को बढ़ाने में और कारगररोल निभाने को तैयार नजर आ रही है. जैविक कणों और कोशिकाओं के बेहतर इस्तेमाल मेंयह तकनीक काफी कारगर साबित हो सकती है.

 

इस तकनीक के जरिये वैसे लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है, जो अन्य तकनीकोंके माध्यम से संभव नहीं है. इसके अलावा नैनो टेक्नोलोजी पेड़ और प्राणी संबंधी जीनोमके अध्ययन में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है, जिससे डीएनए को क्रमवार करनेमें अभी के मुकाबले काफी कम वक्त लगेगा और यह प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी.
योजना आयोग द्वारा बनाई गई एक उपसमिति ने नैनो तकनीक के लिए मजबूत शोध एवं विकास का (रिसर्च औरडिवेलपमेंट) आधार बनाने की सिफारिश की है. योजना आयोग ने आधुनिक तकनीक और किसानों तकनैनो तकनीक की पहुंच को मुमकिन बनाने के मद्देनजर सलाह देने के लिए इस समिति का गठनकिया था. समित का गठन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक मंगला रायकी अध्यक्षता में किया गया था.

 

समिति ने अपनी सिफारिश में नैनो तकनीक के लिए पहल के तहत (राष्ट्रीय कृषि शोध प्रणाली)नैशनल एग्रीकल्चरलरिसर्च सिस्टम बनाने की बात कही है. समिति ने इस मकसद के लिए एक संस्थान नैशनलइंस्टिटयूट ऑफ नैनो टेक्नोलोजी इन एग्रीकल्चर (नीना; NINA) के गठन की भी बात कही है. इससंस्थान को संबंधित क्षेत्रों और प्राइवेट सेक्टर से जोड़ने का भी प्रस्तावहै.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और जापान जैसे विकसित देशों मेंनैनो तकनीक में तेजी से हुई प्रगति के मद्देनजर भारत को विज्ञान और तकनीक केक्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए इस तकनीक पर भारी राशिनिवेश करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तकनीक का लाभ हमारे देश को भी मिलसके.

 

रिपोर्ट के मुताबिक, जीनोमिक्स संबंधी रिसर्च में नैनो तकनीक काफी सहायक सिद्धहो सकती है. इसके अलावा पानी की बचत, पेड़-पौधों की सुरक्षा आदि में भी यह तकनीककारगर होगी.

 

होम्योपैथी की तर्ज पर नैनो तकनीक में भी अणुओं और कोशिकाओं के सूक्ष्म कणों कीतरह काफी संभावना होती है और ये कण अणु और कोशिका की तरह ही कारगर सिद्ध होते हैं.इसी बात को ध्यान मे रखकर इस तकनीक का इस्तेमाल बीमारी के कारणों की खोज और इसके इलाज के लिएदवा और वैक्सीन ढूंढने में किया जा सकता है.

 

जहां तक वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन का मामला है, नैनो के कण संबंधित स्थान परवैक्सीन के सक्रिय अवयवों को पहुंचाने में सफल हो सकते हैं. अर्थाथ इसके जरिएगंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद मिलेगी. उदाहरण के लिये इस तकनीक के जरिये जानवरों में पाईजाने वाली खुड़पका बीमारी का इलाज ढूंढने में भी सहायतामिलेगी. ध्यान रहे इस बीमारीका अब तक उन्मूलन नहीं किया जा सका है.

 

अगर किसानों के दृष्टिकोण से देखें तो नैनो तकनीक से खेती के लागत खर्चों में कमीआ सकती है. उदाहरणके तौर पर नैनो-सेंसर्स और नैनो बुद्धिमत्तापूर्ण वितरण प्रणाली (नैनो स्मार्ट डिलिवरी सिस्टम) के माध्यम सेपौधों को पानी और खाद का उचित पोषण मिल सकेगा. प्रोसेस्ड फूड और अन्य खास कृषिउत्पादों के मामले में नैनो तकनीक का इस्तेमाल हो सकता है, जिसके माध्यम से उत्पादों कीपहचान और क्वॉलिटी बरकरार रखने में मदद मिलेगी.

 

रिपोर्ट के तहत इस तकनीक में अपार संभावनाएं हैं. साथ ही इसमें कई तरह की चीजोंका समावेश है. इसके मद्देनजर इंजीनियरों, बायोलॉजिस्टों, केमिस्टों और पैथोलोजिस्टआदि को मिलकर काम करने की जरूरत होगी. इसके लिए समिति ने नैनो तकनीक पर नैशनलकंर्सोटियम (राष्ट्रीय समूह) बनाने की बात कही है.

 

इसमें नीना के अलावा नैनो तकनीक की शोध एवं विकास (रिसर्च और डेवलपमेंट) से जुड़े अन्य संस्थानोंको शामिल करने का प्रस्ताव है. इन संस्थानों में भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान (आईआईटी), भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएस), बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू), जामिया हमदर्द के अलावा कई कृषि और अन्य विश्वविद्यालयों समेत सर्वोच्च वैज्ञानिकऔर रिसर्च संस्थानों को शामिल करने की बात कही गई है.

 

चूंकि नैनो तकनीक से जुड़े शोध एवं विकास (रिसर्च और डिवेलपमेंट) कार्यक्रम के लिए काफी धन कीआवश्यकता होगी, इसलिए सरकार को इस मामले में फंड उपलब्ध कराने के मामले में काफीउदारता बरतनी होगी.

 

हालांकि, ऐसा नहीं है कि सरकार को काफी लंबे अर्से तक इस बाबत राशि उपलब्धकरानी पड़ेगा. इस रिसर्च के सकारत्मक नतीजे आने के बाद निजी कंपनियों को इसमेंलाभ की संभावनाओं के बारे में पता चल सकेगा. इसके बाद निजी क्षेत्र के इस क्षेत्रमें निवेश करने के लिए आगे आने की संभावना काफी प्रबल हो जाएगी.
भविष्य के विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी में नैनो तकनीक
नैनो तकनीक के सहयोग से अगले पांच दशक मे इसी स्तर पर मनचाही वस्तु जैसे टेलिफिन, कार, हवाईजहाज, अंतरिक्षयान, कम्प्युटर आदि बनाये जा सकेंगे. इसकी सहायता से कैंसर, मधुमेह और अन्य बीमारियोँ पर विजय प्राप्त किया जा सकेगा. इसके द्वारा बीमारियोँ का प्रारम्भिक अवस्था मे पता लगाकर शीघ्र उपचार किया जा सकेगा. इसकी सहायता से कृत्रिम अंग बनाये जा सकेंगे.
अब प्रश्न यह उठता है कि यह कैसे होगा? किसी भी पदार्थ को परमाणुविक पैमाने पर नैनो स्केल पर नियंत्रित ढंग से जोड तोड कर अपनी इच्छानुसार परिवर्तित कने की विद्या का ही नाम है नैनो टेक्नोलॉजी. इसे के द्वारा नैनो असेम्बलर्स की रचना कर जो नैनो रेप्लिकेटर का कार्य का करें इच्छित वस्तु को परमाणुओँ से बनाया जा सकता है. परमाणुओँ की प्रतिलिपि तैयार कर किसी भी इच्छित वस्तु को बनाया जा सकता है क्योंकि सभी पदार्थ परमाणुओँ से बने हैँ . यहां तक मानव शरीर भी. लगभग चालीस वर्ष पूर्व रिचर्ड फाईनमेन ने इस अवधारणा का सुझाव दिया और 1974 मे नारियोतानीगुची ने इसका नामकरण किया. 1990 मे आईबीएम के अनुसंधानकर्ताओं ने एटोमिक फोर्स माईक्रोस्कोपिक यंत्र द्वारा ज़ेनान तत्व के 35 परमाणुओँ को निकल(Nickle) के साथ क्रिस्टल पर एक एक कर व्यवस्थित कर आई बी एम शब्द लिखने मे सफलता पायी थी.
नासा के वैज्ञानिकों ने 1997 मे सुपर कम्प्युटर के द्वारा बेंजीन के अणुओँ को कार्बन के परमाणुओँ से बने किसी सामान्य अणु के आकार के अति सूक्षम नैनोटयुब की बाहरी अतह पर जोडकर आणविक आकार के यंत्र निर्माण के मिथ्याभासी अनुरूपण का दावा किया है. भविष्य मे इसका उपयोग मैटर कम्पाईलर जैसे अति सूक्ष्म यंत्र के निर्माण मे हो सकता है. इन मशीनो को कम्प्युटर द्वारा प्रोग्राम कर प्राकृतिक गैस जैसे कच्चे माल के परमाणुओं को एक एक कर फिर से व्यवस्थित कर किसी मशीन या बडे हिस्से को निर्मित किया जा सकता है.
क्या हो सकतें हैंदुष्प्रभाव(नैनो तकनीक केखतरे)
प्राय: किसी भी उभरती हुए नयी प्रोद्योगिकी/तकनीक का उसके आविष्कार के तुरंत बाद ही आनन फानन मे उपयोग प्रारम्भ हो जाता है और फिर काफी समय पश्चात ही उसके सामाजिक, नैतिक, मनोवैज्ञानिक पहलुओँ, प्रभावोँ एवं दुश्परिणामो पर हमारा ध्यान जाता है.
नैनो तकनीक के व्यापक संभावित उपयोगों के दावोंके कारण कई चिंताओं को व्यक्त किया जा रहा है. नैनो तकनीकी उद्यमी और वैज्ञानिकों द्वारा दुरुपयोग एकप्रतिक्षेप को जन्म दे सकता है. सामाजिक स्वास्थ्य पर इसकेदुष्प्रभाव के डर से नैनो पदार्थों के औद्योगिक स्तर पर उत्पादन पर, जहां शासन केनियंत्रण की अपेक्षा की जा रही है, वहां इन नियंत्रणों से इस अनुसंधान परप्रोत्साहान देने की राय दी जा रही है.
डर है कि इस पद्धति से बनी दवा याक्रीम शरीर के कुछ अभेद्य तंत्रों को भेद कर हर चीज को ध्वस्त न कर दे. कहीं डीएनएको भेद न दे या "ब्लड ब्रेन बेरियर" नामक उस चीज को खत्म न कर दे जिसके जरिएमस्तिष्क और खून के बीच बनाई गई नाजुक सी सीमा है जो अब तक की दवाओं के लिए अभेद्यहै. खान-पान और दवाओं में इस तकनीक के आने से जहां प्रसन्नहोने वाले व्यक्ति बहुत हैं, वहींवैज्ञानिकों और पर्यावरण का ख्याल करने वालों को चिन्ता भीहो रही है.
उपसंहार
नैनो तकनीक आज तक की सभी तकनीकी इजाद मे सबसे महान तकनीक मानी जाती है. इसका उपयोग अनेक क्षेत्रों जैसे यांत्रिकी, कम्प्युटर्स, हथियार, चिकित्सा विज्ञान आदि मुख्य क्षेत्रो मे होता है. चिकित्सा विज्ञान मे इसके अनुप्रयोग की असीमित सम्भावनाएं हैं. कुछ मात्र कल्पना मे हैं कुछ अभी परीक्षण मे हैं और कुछ प्रचलन मे भी हैं. खान-पान और दवाओं में इस तकनीक के आने से जहां प्रसन्नहोने वाले व्यक्ति बहुत हैं, वहींवैज्ञानिकों और पर्यावरण का ख्याल करने वालों को चिन्ता भीहो रही है.किंतु लाभ इतने अधिक हैं कि दुश्प्रभावों की अनदेखी ना कर भविष्य मे इस तकनीक से हमारे जीवन को और भी स्वस्थ एवं खुशहाल बनाया जा सकता है.
संदर्भ
1.नैनो तकनीक की बड़ी दुनिया - Technology Science – LiveHindustan_com
2. नैनोतकनीकी – विकिपीडिया
3. नैनो तकनीक से होगा कृषि का कायापलट
4. Nanotechnology, Looking To The Future

 

 


अमरनाथ मूर्ती

 

 

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