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कहते हैं लोग अक्सर , पहला प्यार नहीं भूलता ...

 

 

अक्सर आपने अखबारों , पत्रिकाओ में पढ़ा होगा "पहला प्यार /फर्स्ट क्रश " जैसे आलेख । लोगो का मानना है की प्यार सिर्फ एक बार ही होता है। पर मेरा मानना ऐसा नहीं है। क्यूँ ? ..... क्यूंकि अक्सर देखा ये गया है की प्यार सिर्फ एक तरफ से होता है और अगर दोनों तरफ से होता भी है तो शायद बराबरी का नहीं। अगर पहला प्यार दोनों तरफ से हुआ होता तो वो रिश्ता बिखरता ही क्यूँ ? अगर दोनों दिलो में उतनी ही चाहत होती तो वो रिश्ता टूटता ही क्यूँ ? और फिर उसके भूलने की नौबत ही ना आती .. पर सत्य तो ये है की अक्सर प्यार एक तरफ़ा होता है और ऐसे में कोई मुझसे कहे की "पहला प्यार भूलता नहीं " तो इस पर मैं सिर्फ इतना कहना चाहूँगा की "भूले , चाहे ना भूले पर जिंदगी आगे जीना है तो भूलना ही होगा "। अच्छा मान लो थोड़ी देर के लिए की पहला प्यार नहीं भूलता, पर एक तरफ़ा प्यार में दूसरा साथी आपसे दुर्व्यवहार करे , आपकी की अवहेलना करे , आपके प्यार का मजाक बनाये या आपका साथ छोड़ कर चला जाये। ऐसे में "क्या जिंदगी उसकी यादो के भरोसे गुजारना चाहिए ?? " , "सारे काम धाम छोड़ कर उसकी यादों में डूबे रहना चाहिए ??" भविष्य में यदि कोई उससे अच्छा साथी मिले , जो आपको बहुत प्यार करे , आपका ख्याल रखे , तो क्या उसे नहीं अपनाना चाहिए ?? और उससे ये कहना चाहिए की "पहला प्यार तो भूलता नहीं " ?? वस्तुतः जिंदगी का उद्देश्य प्यार नहीं बल्कि खुद का विकास करना , समाज का विकास करना तथा खुद की जिंदगी की दौड़ में आगे ले जाना .... अपना नाम करना तथा अपने पैरो पर खड़े होने ही असल जिंदगी है। पर प्यार हो जाना भी स्वाभाविक है , जीवन साथी की चाहत भी स्वाभाविक है और दिल की भावनाओ का भी जिंदगी में महत्व पूर्ण स्थान है .. प्यार एक से अधिक बार हो सकता है पर ये सच्चा तभी संभव है जब आप पुरानी यादो को दिल में संजोय ना बैठे हो ... जो इंसान तुम्हारी भावनाओं को नहीं समझता , तुम्हे छोड़ गया बीच मजहर में उसके लिए आंसू बहाना बेकार है , क्यूँ अपनी जिंदगी खराब करो उसके लिए। प्यार एक से अधिक बार हो सकता है पर एक ही समय में कई लोगो से प्यार करना प्यार नहीं कहलाता वो तो सिर्फ एक फरेब है , एक धोखा है। अब प्रसन्न ये है की यदि किसी ने एक से अधिक बार प्यार किया तो उसे कैसे सच्चा कहा जाये ? तो इसके लिए मैं कहना चाहूँगा की यदि कोई एक ही समय में कई लोगो से प्यार करे तो उसे किसी भी मायने में सच्चा नहीं कहा जा सकता पर यदि किसी ने प्यार किया और उसका साथी उसे छोड़ कर चला जाये या धोखा दे, और बाद में कभी उसे दूसरा प्यार हो जाये ऐसे में इसे सच्चा तभी कह सकते है यदि -
1. आप पुराने साथी की यादें भूल चुके हो , 2. पुराने साथी से आपका कोई भी संपर्क नहीं होना चाहिए , 3. आपके लिए वर्तमान साथी ही सब कुछ होना चाहिए। शायद आप कहोगे की ये सम्भव नहीं है। तो मैं ये कहना चाहूँगा की कठिन बहुत है पर असंभव नहीं। यदि आप पुराने साथी को दिल मे बसाये बैठे रहोगे तो सिर्फ अपना नुक्सान करोगे और वर्तमान साथी को सच्चा प्यार कभी नहीं कर पाओगे। मनुष्य की भलाई इसी में है की वो उपरोक्त तीन बिन्दुऒ पर ध्यान दे , अगर दे लिया तो आप सच्चा प्यार दुबारा कर सकते हो अन्यथा नहीं ......
इश्वर ने मनुष्य को पुरानी बाते भूल जाने का अमूल्य उपहार दिया है अन्यथा उसका जीना दूभर हो जाता। कहते है समय और पैसा सब कुछ भुला देते है पर पैसा जो भुलाता है वो अहंकार दे जाता है . जब एक इन्सान अपने दादा / दादी , नाना/नानी या अन्य किसी प्रिय जन की मृतु के उपरान्त उसकी यादो को भूल जाता है , अपनी असफलताओ को सफलताओ के आगे भूल जाता है , पैसे के भाई . बहन यहाँ तक की माँ बाप को भूल जाता है तो कैसे कह
सकते हो की पहला प्यार नहीं भूलता ? मान भी लो अगर इसे एक बार , लेकिन जिंदगी जीना है तो भूलना ही होगा .. दुःख को संजोय रखने से कोई फ़ायदा नहीं ... ये आपकी अमूल्य जिंदगी के लम्ब्हो को खा जाता है। इसलिए आगे बढकर जिंदगी में खुशी तलाशने में ही वस्तुतः "जिंदगी" है। अगर नहीं भूल पाओ तो सिर्फ ये सोच लेना -" ज़िंदगी का मूल उददेश्य ये नहीं ... ये तो अपनी खुशी , अपने अरमानो के लिए किया जाता है या सच कहूं तो हो जाता है , पर यदि ये दुःख का कराण बन जाये तो आप अपने उद्देश्य से भटक चुके हो ये स्वतः जान लेना" पर इन सबका मतलब ये कदापि नहीं की यदि आपकी जीवन संगिनी से तकरार हो जाये तो आप आगे दूसरे के बारे में सोचने लगो। जीवन साथी सिर्फ आपका साथी ही नहीं बल्कि आपकी जिम्मेदारी है और वो रिश्ता तोड़ने के लिए नहीं बल्कि निभाने के लिए होता है।
इसलिए अब आप मेरे कहने का अभिप्राय समझ गए होंगे की क्यूँ कहा मैंने की - मैं नहीं मानता की पहला प्यार नहीं भूलता , मुश्किल जरुर है पर भूलना ही होगा .. और अगर दोनों तरफ से हुआ तो सच बताऊ दोस्तों भूलने की नौबत ही नहीं आयेगी और ये जिंदगी सुहानी नजर आयेगी।
धन्यवाद्।

 

 

 

लेखक :- विनय कुमार शुक्ल

 

 

 

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