पहलवान फूलचन्द्र का दीर्घाहारी होना उसके लिए बना कष्टकारी

 

 

pahalwan

 

 

ट्रैक्टर, ट्राली का एक हिस्सा उठाने के साथ ही मोटर साइकिल भी अपने सिर तक हवा में उठाने की क्षमता रखता है फूलचन्द्र। उसका भोजन इतना कि बड़े-बड़े खिलाने वालों को छूट गये पसीने। गोण्डा के सांसद ठाकुर ब्रजभूषण शरण सिंह वर्तमान में फूलचन्द्र यादव पहलवान की करा रहे हैं क्षुधा शान्ति। फूलचन्द्र पहलवान का नाश्ता छः लीटर दूध और 2 किलो कच्चा चना। एक वक्त के भोजन में लेता है तीन किलो आटे की रोटी, दो किलो दाल, और ढाई सौ ग्राम घी। भोजन न मिलने की स्थिति में फूलचन्द्र को अपनी क्षुधा शान्ति के लिए पीना पड़ता है कम से कम 160 कच्चे अण्डे। इस पहलवान को लोग सीकिया पहलवान कह कर पुकारते हैं।

 

यह सुनने में अजीब जरूर है पर है पूरी तरह सत्य। जिले का एक ऐसा युवा पहलवान है जो भरपेट भोजन के लिए भटक रहा है। क्योंकि उसका आहार ही इतना अधिक है कि कोई भी उसे दो चार दिन भोजन कराने के बाद ही हिम्मत हार जाता है। यह अलग बात है कि देखने मे दुबला-पतला सा वह युवक अपनी ताकत की बदौलत ट्रैक्टर-ट्राली का एक हिस्सा हाथों से पकड़ कर उठाने के साथ-साथ मोटर साइकिल भी हवा में उठा देता है।
अम्बेडकरनगर जिले की जलालपुर तहसील मुख्यालय के तमसा पार उत्तर तरफ स्थित ग्रामीण बाजार मंगुराडिला से सटे मदरहा पुरवे का फूलचन्द्र यादव (25 वर्ष) अपने अप्रत्याशित भोजन के साथ तरह-तरह के शारीरिक करतबों को लेकर चर्चा मंे है। जब वह महज 19 वर्ष का था तब उसके घर के निकट तमसा नदी में एक ट्रैक्टर फंस गया था, उस समय फूलचन्द्र ने उक्त ट्रैक्टर को बड़ी आसानी से खींच कर बाहर निकाल दिया था। इस घटना के बाद फूलचन्द्र की ताकत देख सभी हैरत में पड़ गये थे। वहीं से मिले प्रोत्साहन और आत्मबल के चलते उसका साहस दिनों दिन बढ़ता रहा। वह मोटर साइकिल दोनों हाथों से पकड़ कर सर्कसी अन्दाज में अपने सिर के ऊपर तक उठा लेता है, और खड़ी ट्रैक्टर-ट्राली को भी हाथों से पकड़ कर उठाने की क्षमता रखता है।
शारीरिक शिक्षा में स्नातक इस युवा की सबसे खास बात यह है कि उसे नाश्ते में छह लीटर दूध, दो किलो कच्चा चना, कम से कम चाहिए। जिसके बाद भोजन में तीन किलो आटे की रोटी दो किलो दाल, और ढाई सौ ग्राम घी की आवश्यकता होती है। यहीं भोजन उसे शाम को भी चाहिए। यदि शाम को भोजन न मिले तो वह कम से कम 160 कच्चे अण्डे तोड़ कर पीने के लिए विवश होता है, तब जा कर कही उसकी क्षुधा को शांति मिल पाती है। आखिर कम कमाई मंे उसके माँ बाप उसे कैसे भोजन दे पायें? यह एक बड़ी समस्या है। पेट पालने के लिए उसने कई सत्ता पक्षीय माननीयों के अलावा अफसरों की शरण ली, लेकिन वहां भी ज्यादा दिन तक उसे ठौर नहीं मिल सका। इस समय वह अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष/गोण्डा के सांसद ठाकुर ब्रज भूषण शरण सिंह के अखाड़े की देख-भाल करता है, जहाँ से उसके भरपेट भोजन और अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है।
हालांकि फूलचन्द्र यादव के उपरोक्त वर्णित करतबों को देख-सुनकर कहा जा सकता है कि वह बलशाली है, जबकि उसकी शारीरिक बनावट सामान्य है। जिसे देखकर कोई नहीं कह सकता कि वह अपनी क्षुधा शान्ति के लिए इतना भोजन उदरस्थ करता होगा। यदि भोजन/आहार के अनुसार उसका शरीर अपेक्षाकृत भारी होता तो लोग उसे देखकर अवश्य ही कलयुगी भीम कहते। भीम के बारे में जैसा कि सभी लोग जानते हैं कि उनका आहार सामान्य से कई गुना अधिक था और महाभारत में वर्णित उल्लेखों के अनुसार कई हजार हाथियों का बल उनके शरीर में समाहित था।
यह तो रही इतिहास/पुराण की बात लेकिन 21वीं सदी में फूलचन्द्र यादव को देखकर इस बात की पुष्टि होती है कि द्वापर युग में सामान्य लोगों से कई गुना अधिक आहार ग्रहण करने वाले महाबली, गदाधारी भीम में कई हजार हाथियों की ताकत जरूर रही होगी। हमें फूलचन्द्र यादव के बारे में यह रिपोर्ट और करतब दिखाते उसकी फोटो अम्बेडकरनगर (उ.प्र.) के पत्रकार घनश्याम भारतीय ने भेजा है, जो वर्तमान में पायनियर हिन्दी दैनिक समाचार-पत्र से सम्बद्ध रहकर स्वतंत्र लेखन भी कर रहे हैं। यहाँ बताना अवश्यक हो गया है कि घनश्याम भारतीय की रिपोर्ट में फूलचन्द्र यादव के माता पिता के नामों का जिक्र नहीं था, यदि ऐसा होता तो हम उनका जिक्र जरूर करते।

 


-रीता विश्वकर्मा

 

 

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