पाक अधिकृत कश्मीर का पाकिस्तान के विरूद्ध विद्रोह

 

 

डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव

 

 


पाक अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान की सेना बंग्लादेश का इतिहास दुहरा रही है। पहले हम समझ लें कि पाक अधिकृत कश्मीर अस्तित्व में कैसे आया ? सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत के पहले गृह मंत्री थे। उस समय भारत कई छोटी बड़ी “स्टेटस” में बंटा हुआ था। बहुत सी “स्टेट्स” भारत में सम्मिलित होने के लिये तैय्यार नहीं थी। इनमें जूनागढ़, भोपाल और हैदराबाद प्रमुख थी। अन्नतः दबाव में वे भी भारत में शामिल हो गई लेकिन कश्मीर के राजा ने भारत में शामिल होने से स्पष्ट मना कर दिया। मगर वह एक कमजोर राज्य था। इसका लाभ पाकिस्तान ने उठाया। कबाइलों को आगे कर उसने कश्मीर से “प्रोक्सी वार” छेड़ दिया। इससे कश्मीर का राजा घबड़ाया। उसने रक्षा के लिये भारत से गुहार लगाई। मगर जली रस्सी के बल तब भी नहीं गये थे। उसने भारत से चार शर्ते रखी।
(1) दो राष्ट्र होंगे (2) दो झण्डे होंगे (3) दो राष्ट्रगान होंगे और (4) दो प्रधानमंत्री होंगे
इस संधि के अनुसार उनकी रक्षा के लिये सेना भारत की रहेगी पर कानून वहां की जनता के होंगे। यह व्यवस्था आज तक चली आ रही है। कश्मीर, मालूम नहीं क्यों भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की कमजोरी था। उन्होने सरकार वल्लभ भाई पटेल को दर किनार कर कश्मीर के तत्कालीन राजा (डा. कर्णसिंग के पिता) की सारी शर्ते मान ली पर तब तक कश्मीर का कुछ हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में जा चुका था। पर अभी भी भारत में दो संसद सदस्य पाक अधिकृत कश्मीर के माने जाते है एवं वे दो “सीट्स” भारत की लोकसभा में खाली रखी जाती है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू की कुछ गल्तियां श्रीमती इंदिरा गांधी ने सुधार ली थी। उन्होने दो राष्ट्रगीत, दो प्रधानमंत्री एवं दो राष्ट्रध्वज हटा दिये। मगर धारा 370 बनी रहीं जिसके तहत कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है। अभी भी कुछ कानून कश्मीर पर लागू नहीं होते एवं भारत का कोई अन्य नागरिक कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकता एवं फैक्ट्री इत्यादि नहीं डाल सकता।
अब जो पाक अधिकृत कश्मीर है वहां के लोगो को समझ में आने लगा है कि भारत में कितनी अधिक आजादी है। यहां बोलने की तो इतनी अधिक आजादी है कि एक गरीब आदमी भी देश के प्रधानमंत्री की गल्तियां सार्वजनिक रूप से निकाल सकता है। चुनाव में किसी भी जाति या धर्म के लोग खड़े हो सकते है। यहां राष्ट्रपति के पद को ही 4-5 मुस्लिम सुशोभित कर चुके है। किसी भी धर्म के लोग कोई भी नौकरी प्राप्त कर सकते है। हर राजनैतिक पार्टी में हर धर्म के खिलाड़ी योग्यतानुसार खेल रत्न का पुरूस्कार प्राप्त कर सकते है। यदि अभिनेता सलमान खान कहते है कि उन्हें पाकिस्तान की आलोचना पसंद नहीं है तो कोई आपत्ति नहीं लेता। जम्मू-कश्मीर में यदि पाकिस्तान समर्थक झण्डे फहराये जाते है तो उन्हें गोली नहीं मार दी जाती।
जबकि पाकिस्तान में ही शिया मुसलमानों, खोजा मुसलमानों इत्यादियों पर अत्याचार किये जाते है। पाकिस्तान में सेना हर प्रान्त को उपनिवेश समझती है। बंग्लादेश इसीलिये पाकिस्तान से अलग हुआ था कि तत्कालीन पश्चिमी पाकिस्तान पूर्वी पाकिस्तान को उपनिवेश समझकर बेइन्तिहा अत्याचार कर रहा था। यही अब सेना पाक अधिकृत कश्मीर पर कर रही है। वहां नागरिको को खुले आम घसीटा जा रहा है। नवयुवको को जबरदस्ती आतंकवादी बनाया जा रहा है। सेना लड़कियों तक का अपमान कर रहीं है। उन्हें मालूम है कि पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का भाग समझकर उन पर अत्याचार ढ़ाये जा रहे है। इस समय फारूख अब्दुल्ला एवं उमर अब्दुल्ला के वक्तव्य प्रशंसानीय आ रहे है। वे बधाई एवं पद्म पुरूस्कारों के पात्र है।
पाक अधिकृत कश्मीर के नागरिको का आंदोलन को देख कर यहां के अलगाववादी कश्मीरियों की आंखे खुल जाना चाहिये कि भारत से अलग होकर पाकिस्तान उनके क्या हाल करने वाला है ?
अलगाववादी कश्मीरियों को पाकिस्तान केवल मोहरा बनाना चाहता है। जीतने के बाद मोहरे फेंक दिये जाते है। आतंकवादियों ने घाटी के लोगो के धंधे चैपट कर दिये है। अन्यथा कश्मीरियों की मुख्य आय पर्यटकों एवं धार्मिक पर्यटन से थी। केवल वहीं आय उन्हें समृद्ध बनाने के लिये पर्याप्त थी। बगीचों एवं वनोपज की तो बात ही अलग है।
दरअसल घाटी के लोगो को मोहरा बना कर पाकिस्तान बंगलादेश के अलग होने का बदला लेना चाह रहा है पर बंगला देश के अलग होने का दोषी पाकिस्तान खुद था। आज मुंबई के श्रृंखलाबद्ध विस्फोटो का मास्टर माइंड हाफिज सईद पाकिस्तान सरकार को ही गालियां देने लगा है जिन आतंकवादियों को पाकिस्तान संरक्षण ट्रेनिंग और आर्थिक मदद दे रहा है वे पाकिस्तान पर ही कब्जा करने की सोच रहे है जैसा कि उन्होने ईराक पर किया था। यह पाकिस्तान के देशभक्त नागरिको को समझ लेना चाहिये।
भारत सरकार ने कश्मीर को धारा 370 की परिधि में रख कर मुसलमानों का ही नुकसान किया है। आज कश्मीर में आतंकवाद का दंश केवल मुसलमानों को ही झेलना पड़ रहा है। वहां उद्योग नहीं लगने से वहां के नौजवानों में बेकारी बहुत है।
यदि पाक अधिकृत कश्मीर को भारत अपना अंग मानता है तो वहां के नागरिको का आना जाना एवं कश्मीर में बसना सरल बना देना चाहिये, लेकिन लभी जब धारा 70 समाप्त कर दी जाये। पाकिस्तान को अहसान मानना चाहिये कि जिस बेशर्मी से वह जम्मू कश्मीर में हस्तक्षेप कर रहा है, भारत वहां पंजाब या हमारे ही पाक अधिकृत कश्मीर में हस्तक्षेन नहीं कर रहा।

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