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रेल की व्यवस्था लगती है फेल

 

 

हमारे देश भारत को आजाद हुए तकरीबन 67 साल हो गए हैं लेकिन फिर भी अंग्रजों द्वारा की गर्इं कुछ खोज ऐसी हैं जिनके लिए शायद उन्हें हम कभी भुला नहीं सकते, उनमें से एक बड़ी प्रमुख खोज है जिसे हम 'रेल के नाम से जानते हैं। आज हमें चाहे कुछ दूरी की यात्रा करनी हो या लम्बी दूरी की, हम रेल को ही अपना साथी बनाते हैं क्योंकि शायद और यातायात साधनों की अपेक्षा सबसे आरामदायक और सस्ता सफर इसी का लगता है। गरीब हो या अमीर, छोटा शहर हो या बड़ा, हर आदमी हर जगह रेल से ही यात्रा करना उचित समझता है। अंगे्रजों के जमाने से शुरु हुर्इ ट्रेन और आज की ट्रेन में काफी बदलाव हो चुके हैं और हो भी क्यों ना, जब आज हमारा देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है तो भला रेल व्यवस्था में क्यों नहीं मगर इसी रेल में सफर करने वाली लाखों करोंड़ों जनता कभी कभी बहुत परेशान हो जाती है।

 



कुछ ही समय पहले की बात है मैं ट्रेन से कानपुर जा रहा था। बड़ा खुशी खुशी अपने घर से निकला, ट्रेन में बैठा ट्रेन चल दी परंतु कुछ ही क्षण बाद कुछ साधुओं और बाबाओं का एक जत्था टे्रन में चढ़ा। वे सभी एक-एक करके हर यात्री के पास जाते और उनके सामने अपने पास रखे हुए सांप के पिटारे को खोल देते और कहते कि कुछ पैसे दो, दान करो, भगवान तुम्हारा भला करेगा और अगर कोर्इ इसका विरोध करता तो वही पिटारा उसके सिर पर लगा देते और जबरदस्ती करते। एक महिला यात्री तो इतना डर गर्इ कि उसने अपने बगल बैठे व्यकित से कहा कि भैया, इनसे कहो कि यहां से जाएं और लोगों को मजबूरन कुछ न कुछ पैसे देने पड़ते, अब भगवान के नाम पर इस तरह से डरा कर जबरदस्ती करना गलत नहीं है लेकिन इस पर ध्यान देने वाला शायद कोर्इ नहीं है।

 

 

इसी तरह लगभग हर शहरों में, जहां से भी रेल गुजरती है, वहां- वहां हिजड़ों का भी समूह लोगों को परेशान करने में पीछे नहीं रहता या बलिक यूं कहें कि सबसे ज्यादा परेशान लोगोेें को यही करते हैं खासकर उन्हें जो बड़े-बड़ें शहरों से पैसा कमा के लौटते हैं और जो थोड़ा कम पढ़े-लिखे होते हैं। इनका आतंक तो ऐसा है कि लोग किसी से डरें न डरें पर एक बार इनसे जरुर खौफ खाते हैं कि इनसे न उलझना पड़े, वही अच्छा है। एक समय था कि यह लोग उन घरों में जाते थे जहां किसी बच्चे का जन्म होता था और यह प्रथा आज भी है और कहते हैं कि इनकी दुआएं अच्छे अच्छों को लग जाती हैं लेकिन अब यह लोग टे्रनों मेें जबरदस्ती लोगों से पैसे वसूलते हैं और जनता को परेशान करते हैं। इनका इतना आगे बढ़ने में पुलिस महकमे का भी साथ होता है और हिजड़ों को मिलने वाले पैसे वे भी बांट लेते है तभी तो पुलिस प्रशासन कुछ नहीं करता।

 

 

आखिर कब तक ऐसा चलता रहेगा, सरकार को चाहिए कि अपने पुलिस प्रशासन को दुरुस्त करे ताकि जनता को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

 

 


-कोणार्क रतन

 

 

 

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