राम एक अच्छे पति थे

 

 

डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव

 

 

राम जेठमलानी का यह निर्णय कि राम एक अच्छे पति नहीं थे तर्को पर आधारित नहीं है। यह उनका व्यक्तिगत मत प्रतीत होता है। आश्चर्य है कि ऐसा व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कैसे करता होगा। कोई भी समझदार आदमी इस तरह के निर्णय पर नहीं पहुँच सकता। आश्चर्य एवं दुख भारतीय जनता पार्टी पर भी होता है कि उसने राम जेठमलानी को पार्टी से निष्कासित क्यों नहीं किया।
राम एक अच्छे पति थे और यह निर्णय उन घटनाओं पर आधारित है जो उस दम्पति के जीवन में घटी। वाल्मिकी रामायण की उन घटनाओं के विश्लेषण पर आधारित यह तथ्य है। राम का विवाह सीता के साथ उनके पौरूष के कारण हुआ था। जो धनुष कोई हिला नहीं पाया था उसे राम ने क्षण भर में उठाया, प्रत्यंचा खींची और तोड़ दिया था। राम वीर के साथ एक सुन्दर पुरूष भी थे। सीता ने उनको वरमाला प्रसन्न्ता पूर्वक डाली थी। राम को धनुष तोड़ने का कभी भी अभिमान नहीं हुआ। अतः उन्होने सीता को हमेशा पत्नि माना, एक दासी नहीं । नहीं तो वे कई और शादियाँ भी कर सकते थे।
जनक की सभा में जब परूष राम आये तब सभी मृत्यु के भय से काँपने लगे थे। राम झूठ बोल सकते थे कि वह धनुष उन्होने भी नहीं तोड़ा । बल्कि वीरता पूर्वक कहा कि वह धनुष उन्होनें तोड़ा है और परिणाम का वह वीरता पूर्वक सामना करने को तैयार है। उन्होने परूष राम का धनुष चढ़ा कर यह बतलाया कि वह उस समय धरती पर सर्वाधिक वीर पुरूष थे। असली परूष राम नहीं थे।
राम सीता को अपने साथ अयोध्या लेकर आये। शादी की तमाम रस्मों को उन्होने उत्साह पूर्वक पूरा किया दिये गये उपहारो की कभी आलोचना नहीं की। उन्होने सीता का कहना प्रेम पूर्वक माना। जीत कर लाने के बाद भी ऐसा कहीं नहीं आता कि उन्होंने कोई इच्छा सीता पर कभी भी थोपी हो।
दशरथ के द्वारा कैकई को दिये गये वरदानों के फलस्वरूप राम वन में जाने तैयार हो गये। उस समय सीता ने राम का साथ देने का हठ किया। यदि उस समय राम को किंचित भी विजेता होने का भाव आता तो बलपूर्वक सीता को वहीं छोड़ सकते थे। मगर उन्हें अपनी भुजाओं पर विश्वास था कि वह जंगलों में भी सीता की रक्षा कर सकते थे। उन्होनें पूरे समय सीता की सुविधाओं का ख्याल रखा।
सीता ने उनसे स्वर्णमृग लाने का आग्रह किया। राम ने यह नहीं कहा कि चुप रहो, ऐसा दूसरा मृग जब निकलेगा तब उसका शिकार वह कर देगें, कि जंगल में ऐसे मृग आते ही रहते है। जब कपट पूर्वक रावण सीता को हर ले गया तब राम ने विलाप किया। उनके मन में कभी भी यह भाव नहीं आया कि वे वापिस जाकर दूसरी शादी कर लेंगे। वे सीता तो अपनी शक्ति मानते थे।
(घन, घमण्ड नभ गरजत घोरा,
प्रिया हीन डरपत मन मोरा)
उन्होंने अकेले होते हुये भी सीता को ढँूढने का पूरा उद्यम किया। यदि रावण को केवल स्वाभिमान के लिये मारा होता तो सीता को रावण वध के पश्चात वहीं छोड़ कर वापिस आ सकते थे पर उन्होने ऐसा नहीं किया। वह सीता से निश्चित पूर्वक अदम्य प्रेम करते थे। उनके एक निष्ठ प्रेम का उदाहरण यह भी है कि लंका विजय के पश्चात वह मात्र सीता के साथ ही वापिस आये, हजार दो हजार और सुन्दरियों को साथ में नहीं लाये।
पुष्पक विमान पर वह सीता को प्रेमपूर्वक उन स्थानों को दिखलाते हुये आये जो उन्होने सीता के बिरह में बिताये थे। सीताहरण और लंका विजय के बीच वे लगातार सीता से अदम्य प्रेम करते रहे। विरह ने उनके प्रेम को कम नहीं होने दिया। हनुमान जब सीता का पता लगा कर चूड़ामणि लेकर आये तो राम ने उसे सीने से लगा कर उनका प्रेम प्रदर्शन किया। पूरे विरह के समय वे सीता को बिलख बिलख कर याद करते रहे। जो उनका सीता के प्रति अनन्य प्रेम दर्शाता है। ऐसा नहीं हुआ कि बीच में कहीं भी उनके मन में किंचित भी विचार आया हो कि सीता को कोई जानवर खा गया होगा, कि चलो सीता विहीन वे वापिस लौट जायेंगे और दूसरी शादी कर लेंगे।
रावण के निकट रहने पर भी उन्होने सीता पर कभी भी अविश्वास नहीं किया। उन्हें विश्वास था कि सीता हरण सीता की इच्छा के विरूद्ध हुआ होगा। यह एक उत्कृष्ट विश्वास का उदाहरण है। सीता ने राम से आग्रह किया था कि उनकी इच्छा दुबारा वन दर्शन की है। कहीं भी यह नहीं लिखा गया कि राम ने रूष्ट होकर लक्ष्मण को यह आदेश दिया हो कि सीता को जंगल में कहीं छोड़ कर वापिस आ जाना। बल्कि उन्होनें महर्षि बाल्मीकि का पता दिया जो कि उनके परिचित थे और कहा कि सीता को उनके पास छोड़ देना। उन्हें कभी भी दूसरी शादी का ख्याल नहीं आया अश्वमेघ यज्ञ के दौरान भी, जो बगैर पत्नि के नहीं किया जाता । उस समय भी वे दूसरी शादी कर सकते थे और सपत्नीक यज्ञ पूरा कर सकते थे।
उनके प्रेम का परिचय इस तथ्य से भी मिलता है कि उन्होने सीता की किसी अन्य धातु की मूर्ति नहीं बनवाई, स्वर्ग मूर्ति बनवाई। सीता ने स्वर्गारोहण के पश्चात कभी भी उन्होने लवकुश को नहीं त्यागा। जैसा कि आजकल पत्नि पर शक करने वाले पति करते है।
अंत में हम उस विवादास्पद मुद्दे पर आते है जिस पर कई महिला संगठन कई, छुद्रा बुद्धि वादी हो हल्ला मचाते है। वह मुद्दा है सीता के अग्नि परीक्षण का। अभी तक इस लेख को पढ़ने वाले सोच रहे होंगे कि लेखक ने उसे जान बूझ कर बचने के लिये छोड़ दिया है। पर ऐसा नहीं हैं।
इस प्रकरण का बिन्दुवार अध्ययन करने पर ज्ञात होगा कि रावण वध के पश्चात राम ने लक्ष्मण और विभीषण को सीता को साधारण कपड़े में ही लाने के लिये भेजा था। वह इसलिये कि सीताहरण उन्हीं वस्त्रों में हुआ था। और राम और सीता को यह महसूस न हो कि सीता एक विजेता की पत्नि है। श्रंृगारित वस्त्रों में आती तो सेना को उनके मृत भाइयो की भी याद आती। फिर लिखित साहित्य के अनुसार राम ने अग्नि परीक्षा के लिये चिता तैयार करने का कहा। यहां से काव्य कल्पना तैयार होती है। यहाँ पर अधिकांश मनीषी उनकी तर्क क्षमता को तिलांजली देते है। सीता उस चिता पर लेटती है, खड़ी रहती है या बैठती है ? वह चिंता स्वय ही जल उठती है। आज क्या कोई कल्पना कर सकता है कि बगैर आस लगाये कोई वस्तु स्वयं जल उठे। या तो चिता का स्वयं जलना काल्पनिक है या वह घटना। फिर उसके जलने पर अग्निदेव स्वयं सीता को प्रज्जवलित अग्नि से लेकर आये। क्या आज कोई मानेगा कि अग्नि का एक पुरूष रूप भी यही होता है। फिर इतनी अग्नि के बाद भी सीता दमकती हुई बाहर आई। आज यदि ऐसा हो तो व्यक्ति बिल्कुल ही जल भुन जायेगा, काला कोयला हो जायेगा सीता कैसे दमकती हुई बाहर आयी ? यह प्रसंग निरी कविता की कल्पना है।
जैसे कहा जाये कि एक व्यक्ति का समूल नाश हो गया। अब व्यक्ति कोई पेड़ तो नहीं होता जो उसकी जड़ हो या कहा जाये कि चन्द्रमुखी । अब मानवीय शरीर के घड़ का ऊपर कोई चन्द्रमा नहीं देखा। अग्नि परीक्षा की कल्पना उसी तरह काल्पनिक है जैसे राम का वाण के द्वारा नागपाश में बंधना और गरूड़ का उस पाश को तोड़ना। इस वाद पर राम जेठमलानी ने उसका प्रतिवाद नहीं किया। यहां उनकी तर्क शक्ति की तीखी धार मोथरी हो गयी थी, न्यायालय में तो वे बड़े तर्क देते है। भारतीय जनता पार्टी ने यह दूसरी बड़ी गलती की हैं पहली तो सुषमा स्वराज का राष्ट्रपति के पद के लिये प्रणब मुखर्जी के नाम का समर्थन देना और दूसरा इस व्यक्तव्य पर कि राम एक आदर्श पति नहीं थे, राम जेठमलानी को तत्काल भारतीय जनता पार्टी से निकाल बाहर न करना। राम जेठमलानी भारतीय जनता पार्टी को केवल कुछ लाख वोट दी दिलवा पायेंगे बल्कि राम के नाम पर वे करोड़ो वोट झटकते है।

 

 

 

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