अयोध्या में राम मंदिर क्यों न बने ?

 

 

डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव

 

 

मुलायम सिंह एवं पार्टी को यह भय सताता है कि कहीं अयोध्या में राम मंदिर बन गया तसे उनका मुस्लिम वोट बैंक खिसक जायेगा। उत्तरप्रदेश में जो हिन्दु मुस्लिम दंगे भडकेंगे तो उन्हें रोकना मुश्किल हो जायेगा। शायद मुलायम राम मंदिर का समर्थन करंगे तो उनका और उनके कुनबे का धर्म भ्रष्ट ही हो जायेगा। उनका सिंहासन ही उनसे छिन जायेगा। पाकिस्तान और कश्मीर घाटी में हिन्दुओं का कत्लेआम चालू हो जायेगा। वे शान्ति के मसीहा नहीं रहेंगे। उन्हें नोबल प्राइज से वंचित कर दिया जायेगा। आदि-आदि।
मुलायम सिहं इस के दूसरे चमकदार पहलू को नहीं देखते। अयोध्या में राम मंदिर बनने से उन्हें और उत्तरप्रदेश को कितना लाभ होने वाला है। उत्तरप्रदेश के फैजाबाद (अयोध्या) में राम मंदिर बनाने के पक्ष में सबसे सशक्त पहलू यह है कि यदि मक्का, सलनल्लाहू अलह व सल्लम पैगम्बर मोहम्मद साहब का जन्म स्थान होने से पूरे विश्वभर के मुसलमान हज को जाते है तो क्यों नहीं अयोध्या में एक भगवान राम का मंदिर होना चाहिये ? यह मंदिर विश्वभर के हिन्दुओं का एक भव्य तीर्थ स्थान हो जायेगा।
इससे उत्तरप्रदेश में एक और धार्मिक “टूरिज्म” का स्थान बन जायेगा जिससे प्रान्त को अकूत आय होगी। अतः यह प्रान्त के हित में होगा कि अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बने बल्कि उसे रोम की तरह एक आटोनोमस स्टेट का दर्जा मिलना चाहिये।
जहाँ तक हिन्दु मुस्लिम साम्प्रदायिक दंगो का प्रश्न है तो ऐसा कुछ नहीं होगा। भारत एक सहिष्णु देश है। उत्तरप्रदेश कश्मीर की घाटी नहीं है जहाँ व्यवस्थित तरीके से कश्मीरी पंडितो का वध कर दिया गया, वहां से उनकी सम्पति छीन कर भगा दिया गया ? क्या ऐसा मथुरा वृन्दावन में हुआ ? या अयोध्या में ही ऐसा हुआ ?
अयोध्या में रामलला का मंदिर बनना रूकवाकर उन्हें शान्ति में कोई नोबल प्राइज नहीं मिल जायेगा। जब महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू को नोबल प्राइज नहीं मिली तो बगैर धर्म परिवर्तन के मुलायम सिंह यादव को कैसे मिलेगी। मुलायम सिंह यादव बाबर और भगवान राम को समकक्ष रख कर ही अयोध्या में मंदिर या परिक्रमा का विरोध कर रहे हैं। एक तो हम यह कतई मानने को तैयार नहीं कि बाबर भगवान का अवतार था दूसरे बाबर एक आकान्ता था। उसने भारत पर हमला किया था। उसके एक अदना से सिपह सलार द्वारा बनाये एक ढांचे का पक्ष लेकर वे बाबर का ही पक्ष ले रहे है। ऐसा न हो कि इतिहास मुलायम सिंह को मुलायम चंद कहने लगे।
अयोध्या में राम मंदिर बनने पर दंगे कतई नहीं भडकेंगे। क्योंकि वहां राम मंदिर बनने से मुसलमानों के अस्तित्व को खतरा नहीं होगा और यदि दंगे भडकते भी है तो जिस तरह अशोक सिंहल प्रवीण तोगड़िया (24 अगस्त 2013) इत्यादि को जेल में ठूंस दिया गया वैसे ही अयोध्या में राम मंदिर बनने पर दंगाइयों को भी जेल में ठंूसा जा सकता है।
अयोध्या में राम मंदिर बनने से रोजगार के अवसर खुलेंगे। कई दुकानों के बनने से हाथकरघा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। शिर्डी की तरह कई होटले खुल जायेंगी। फोटोग्राफी बढ़ेगी, टैक्सी रिक्शे और तांगे बढ़ जायेंगे। नये तीर्थ स्थल यथा सरयू का किनारा इत्यादि खुल जायेंगे। परिवहन बढ़ेगा, वस्तुओं की बिक्री बढ़ेगी। अतः प्रान्त के हित में वे रोजगार नवयुवको के हित में उद्योग धंधो के हित में वहां भव्य रामलला का मंदिर बनना ही चाहिये।
अखिलेश यादव को अमर होने का यह अच्छा मौका था। शाश्वत विषयों का सहारा लेकर ही शाश्वत हुआ जाता है। जैसे भगवान राम का विषय लेकर महर्षि वाल्मिकी, महाकवि, तुलसीदास, कालिदास मैथिलीशरण गुप्त इत्यादि हो गये है। इसी तरह यदि दोनो यादव अयोध्या में राम मंदिर बनवाने की पहल करते है या राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं करते है तो इतिहास में अमर हो जायेंगे। और हिन्दुओं के सारे वोट उन्हें मिलेंगे। मुसलमानों के वोट भी कहीं नहीं जायेंगे।
राम जन्म भूमि बावरी मस्जिद का मामला जीवित रखने में मुलायम सिंह की पार्टी को ही लाभ होना हैं। वे हिंसा की एक अन्र्तधारा जीवित रखना चाहते है। जिससे कुछ सम्प्रदाय उनकी छत्रछाया में रहें। यदि रामलला का मंदिर अयोध्या में बन गया तो विवाद एक दम ही खत्म हो जायेगा। जिसके बाद मुलायम सिंह स्वयं को असुरक्षित महसूस करने लगेंगे। मगर यह उनकी गलत फहमी है। रामलला का मंदिर बनने से बहुसंख्यक भी उनके समर्थक हो जायेंगे और साम्प्रदायिक सदभाव बनेगा जो सम्भवतः वह नहीं चाहते। अतः मेरे विचार से उत्तरप्रदेश यदि रामलला का मंदिर बनेगा तो
(1) साम्प्रदायिक सद्भाव बढ़ेगा।
(2) धार्मिक टूरिज्म बढ़ेगा।
(3) होटल व्यापार बढ़ेगा।
(4) परिवहन व्यापार बढ़ेगा।
(5) लघु उद्योग बढ़ेगें।
(6) बेरोजगारी कम होगी।
(7) उत्तरप्रदेश की आय बढेगी।
टिप्पणी:- रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद से यह ध्वनित होता है कि भगवान राम का जन्म हुआ था। जबकि भगवान प्रकट होते है जैसे कि तुलसी दास जी ने लिखा है “भये प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी” भगवान कृष्ण ने भी गीता में कहा है “प्रकृति” स्वाम धिषाय सम्भवाभ्यात्म मायया (अध्याय में श्लोक 6) यह गलत फहमी है कि भगवान राम का जन्म वहीं हुआ था जहाँ बावरी मस्जिद है। पूरी अयोध्या ही रामलला की क्रीडा स्थली है। अतः विश्व हिन्दु परिषद आदि संगठनों को अयोध्या में लगभग बीस एकड़ भूमि में एक भव्य राम मंदिर बनवा कर संगठन का नारा भी इतिहास में अमर कर लेना चाहिये।

 

 

 

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