रोम , कल और आज

 

 

इटली का एक प्राचीन शहर रोम टाईबर नदी के किनारे सात पहाड़ियों के मध्य बसा एक सुंदर शहर है , जिसके अतीत की भव्यता आज भी विश्व भर को आह्ववलादित करने के साथ जनमानस को उसे देखने के लिए प्रेरित भी करती है । रॉम वास्तव मे बेहद आकर्षक शहर है भी ।चारों ओर की दूध से धुली धुली सी सफ़ेद आकर्षक मूर्तियाँ ,भव्य इमारतें ,ऐतिहासिक अवशेष ,डोमा ,आदि देख कर अङ्ग्रेज़ी की वह मुहावरा बरबस याद आती है रोम वाज़ नौट बिल्ट इन अ डे[ इसके नाम के साथ कई कथा जुड़ी हुई हैजिनमें एक है ,कहा जाता है कि दो अवैध जुड़वे बच्चों{रोमूलस और रेमस } को किसी कारण जंगल में छोड़ना पड़ा ,जहां एक मादा भेड़िए ने {जो खुद अपने बच्चों को दूध पीला रही थी }उन्हें अपना दूध पिला कर पाला । जंगल में रहते ,ये दोनों बच्चे ,बिना किसी अविभावक के, काफी हिंसक हो गए थे । अपने अगल बगल के इलाकों पर कब्जा भी कर लिया था ।फिर एक बार दोनों भाईयों में ही युद्ध हो गया ।रोमूलस ने रेमस कि हत्या कर दी और खुद राजा बन गया । उसी के नाम पर रोम का नाम पड़ा ।रोम का प्रतीक चिन्ह भी एक भेड़िए के नीचे दो नवजात शिशु दूध पीते दिखाई देते हैं । ]


वहाँ उस प्राचीन शहर जो अब एक मेट्रोपॉलिटन सिटी है ,मे जगह की अत्यंत कमी के कारण आधुनिकता के लिए कोई जगह नहीं दिखाई देती । दोनों तरफ बने मकान ,चर्च ,राजशाही अवशेष ,प्राचीन स्मारकें । सड़कों पर सघन यातायात है । जमीन के अंदर खुदाई करने पर सख्त पाबंदी है ।न जाने कहाँ कोई अवशेष क्षतिग्रस्त हो जाए । आलम यह है कि पेट्रोल पंप के मशीन भी जगह जगह फुटपाथ पर लगे हुए हैं । लोग बेहद खूब सूरत हैं फैशन परस्त,स्टाईलिस्ट और ,मेहनती हैं , लेकिन नशा का खूब प्रयोग करते देखे जा सकते हैं । महिलाएं भी खुलकर धूम्र पान करती हैं । खाने के लिए करीब सभी देशों के व्यंजन यहाँ के रेस्त्रों मे मिल जाते हैं ।



रोम और इसके आस पास का दर्शनीय स्थल
कोलोज़ियम –
यह एंफ़िथिएटर ,रोम के उत्तर में बना तीन राजवंशोंके कार्यकाल और एक लाख कैदियों {अकुशल मजदूर ,गुलामों } के अलावा रोम के कुशल प्रोफेशनल ,बिल्डर ,आर्किटेक्ट ,इंजीनियरों ,पेंटरों ,डेकोरेटरों के मेहनत की दास्तान बयान करती है । इसकी शुरुआत करीब 70-72 ईसवी में हुई थी .80 ईसवी में यहाँ खेलों का भव्य उदघाटन किया गया था ।यहाँ 50,000 से 80,000 हजार लोग एक साथ बैठ कर किसी भी उत्सव ,खेल या लोमहर्षक दंड का साक्षी बन सकते थे।
इतिहासज्ञों के अनुसार 217 में यहाँ बिजली गिरने से भीषण आग लगी थी ,जिसके फलस्वरूप इसका ऊपरी तल जो लकड़ी का बना था ,बिलकुल नष्ट हो गया ।उसके मरम्मत के बाद 443 का भूकंप भी कुछ अपना असर छोड़ा था ।
मध्ययुग में ,16 वीं ,17वीं सदी में चर्च के अधिकारियों ने इसे कुछ समय के लिए ऊन फैक्ट्री बना दिया ,जिससे तत्कालीन वेश्याओं को रोजगार मिल सके । फिर इसे बुल फ़ाईट के लिए सुरक्षित किया गया । यहाँ पर ईसाईयों की शहादत को ध्यान में रखते हुए 1749में तत्कालीन पॉप ने इसे पवित्र स्थान माना ।
यह रोम का एक बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल है ।लाखों लोग यहाँ सालों भर भ्रमण के लिए आते हैं । 1993से 2000के बीच एक अत्यंत विशाल परियोजना के तहत ,इसका पुनरुद्धार किया गया ।
वास्तव में यह आधुनिक समाज को एक बहुत बड़ी देन है ।


हाल के वर्षों में कोलोज़ियम मृत्युदंड के विरोध का एक विश्व व्यापी प्रतीक बन गया है । {इसे इटली में 1948 में समाप्त कर दिया गया था । } अनेक मृत्युदंड सजायाफ्ता उसके सामने सन 2000से विरोध करते आ रहे हैं । तब से इस विरोध को समर्थन देने के लिए रॉम के अधिकारी रात में कोलोज़ियम के अंदर जलते बल्ब का रंग सफ़ेद से सुनहरा कर देते हैं ।कहीं भी विश्व में किसी व्यक्ति को मृत्युदंड दिया जाता है , रिहा किया जाता है या कोई जूरीस्डिकशन डैथ पेनल्टी को समाप्त करता है ,तब यहाँ सुनहारा लाईट जलता है।नवंबर2012 को
अमेरिका के राज्य कनेक्टिकर ने मृत्यु दंड समाप्त किया तबयहाँ सुनहरा लाईट जला था। इतिहास में भले ही यह घोर हिंसा या क्रूर दंड का स्थान बन गया हो ,वर्तमान में यह शांति और मेलमिलाप का एक प्रतीक बन गया है ।
इसकी प्राचीनता और भव्यता को देखते हुए अब इसके आगे ही जो भी उत्सव या समारोह होता है अंदर नहीं ।
पीसा का मीनार इटली का एक अन्य आकर्षण बिन्दु है । जो मनुष्य के गलती का भी प्रतीक है । 11वी सदी से इस बेल टावर को बनाना शुरू किया गया था । तीसरे मंज़िल तक आते आते ही यह झुकने लगी ।
इसके जमीन की मिट्टी भी कुछ ठीक नहीं है ।
14,500टन के इस टावर की नींव केवल तीन मीटर गहरी है । इसके बाद सौ साल तक के लिए इसे यूं ही छोड़ दिया गया था .1272 में इसपर फिर काम शुरू हुआ । और चार मंज़िल और जोड़ दिए गए । 1284 के विरामके बाद 1319 में सातवाँ मंज़िल पूरा हुआ । द्वितीय विश्व युद्ध के समय वहाँ के सारी इमारतें तोड़ दी गई ।इसका बचा रहना एक चमत्कार ही था ।
1964 में इटली ने इसकी सुरक्षा के निमित्त अन्य राष्ट्रों से मदद मांगी ,तब वहाँ इस इमारत के पार्श्व में 800 टन का वजन रखा गया जो उसको संतुलित कर सके ।
1987में इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल कर लिया गया है । 1990 में इसे अंदर से देखने के लिए बंद कर दिया गया था ,जो 2001 में पुनः खोल दिया गया । यहाँ लोगों की काफी भीड़ लगी रहती है ।अब यह सुरक्षित है ।
फ्लोरेन्स यहाँ का बहुत ही आकर्षक और खूबसुरत शहर है अरनो की तीन अन्य छोटी सहायक नदियां और उस पर बना पुल इसे बहुत आकर्षक बनाती है ।ऊंची ऊंची भव्य ,नयनाभिरम मूर्तियाँ ,लगता है जैसे देवताओं ने स्वयम अपने हाथ से फुरसत की घड़ी में बनाया है । बेहद खूबसूरत बैसिलिका ऑफ शांता क्रॉस ,घोड़ों पर भागते ,लड़ाकू योद्धा ,यूनानी देवताओं आदि के अदभूत कलाकृतियाँ देखने वालों को एकदम सम्मोहित कर देती हैं । एक लेखक ने तो इस सुंदरता को निहारते निहारते ,फ्लोरेन्स माईनिया तक कह डाला । नेपोलियन जब यहाँ आया तो उसकी आंखे फटी की फटी रह गई थी ।उसनेआत्मविभोर होकर इसे दुनिया का ड्राईङ्ग रूम कह दिया था ।
मध्य काल में यह अत्यंत प्रसिद्ध और धनी शहर था ।रिनैशा का जन्म भी यहीं माना जाता है । किसी समय यह इटली की राजधानी भी रही थी । लियोनार्डो द वीचि भी यहीं केकिसी गाँव के थे । विशाल उफ़्फिजी गैलरी में उनका महत्वपूर्ण पैंटिंग्स रखा हुआ है। अनेक प्लाज़ा सड़कें ,पार्क ,गलियाँ इसे काफी खुशनसीब बनाती है । अनेक महान लोगों की जन्मभूमि कहलाने का इसे गौरव प्राप्त है ।
वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल यह आज भी वहाँ फैशन का एक महत्वपूर्ण शहर है ।
वेनिस शहर –सपनों के हिंडोलों पर झूलता यह शहर वास्तव में एक अनोखी दास्तां बया करती है । सौ छोटे छोटे द्वीपों पर बसा अड्रीयाटीक समुद्र के लगुन का यह शहर ,सिटी ऑफ वॉटर ,सिटी ऑफ मास्क ,द फ्लोटिंग सिटी,सिटि ऑफ केनाल्सआदि नामों से जाना जाता है । पत्थरों के बने ये इमारत देखने में ऐसे लगते हैं मानो जल से अवतरित हुए हों ।शेक्सपियर की कहानी मर्चेन्ट ऑफ वेनिस की याद यहाँ आना स्वाभाविक है।उस समय यह समृद्ध शाली व्यापारियों के साथ विश्व व्यापार का भी केंद्र था । यहाँ कोई कार नहीं है गलियों में नावें चलती हैं । यह भी वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल है ।


महान रोमन सभ्यता ने विश्व इतिहास को बहुत कुछ दिया है । जिनमें कुछ का उल्लेख करना समीचीन होगा ,
रोमन सड़कें जो तीव्र यातायात का आधार स्तम्भ माना जा ता हैऔर वाणिज्य व्यवसाय ,कृषि ,डाक ,पेडेस्ट्रीयन ट्रैफिक,और सैनिक गतिविधियों के लिए अत्यावश्यक था ।
रोमन सिटी प्लानर ,रोमन शहर निर्माताओं ने शहरी योजना में,स्वच्छता के संदर्भ में ,प्लंबिंग ,नाले सीवर ,कूड़ा फेंकने ,डैम और अक्वाडक्ट्स के मामले में अभूत पूर्व सफलता हासिल की थी ।
रोमन भवन निर्माण ,व स्थापत्य कला ,{हलाकी उस पर कुछ अन्य का प्रभाव भी था } अपने भव्यता के लिए आज तक दैदीप्यमान है ।
रोमन स्नानागार अपने आप में एक अनोखी संकल्पना है । ये रोमन ही थे जब वहाँ पर पानी की भीषण तंगी थी ,सार्वजनिक स्नानागार के माध्यम से ,उन्नत स्वास्थ्य के लिए सबको स्नान का सौभाग्य प्रदान किया गया ।


रोमन कानून ।-इसी की वजह से महान शासक जूलियस सीजर मिश्र की महारानी क्लिओपेट्रा से विवाह नहीं कर सका था ।
रोमन कैलेंडर जूलियस सीजर द्वारा बनाया गया था ।रोमन सप्ताह के दिनों का नाम ,महिना ,साल सभी रॉम से ही आया ।
पब्लिक शौचालय ,ताला चाभी ,न्यूज़पेपर ,जूराब,जूते ,डाकव्यवस्था ,माइग्निफ़ाईंग ग्लास ,सौन्दर्य प्रसाधन और साहित्य मे व्यंग्य का प्रचलन यहीं हुआ था । चिकित्सा ,कानून ,धर्म ,सरकार और युद्ध विषयों पर भी यहाँ बहुत ज्यादा प्रगति हुई थी । रोमन बहुत बड़े कलाप्रेमी साहित्य प्रेमी ,वैज्ञानिक और अनुसंधान कर्ता ,परम योध, दुस्साहसी नाविक , और विश्व यात्री भी थे ।
रोम में आज भी रोम के तेजस्वी इतिहास का महान पृष्ट जीवित खड़ा है ,जो वास्तव में बेहद आश्चर्य जनक और ज्ञानदायक है ।

 

 


।कामिनी कामायनी ॥

 

 

 

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