वेटिकन सिटी

 

 

सभी धर्मों मे किसी न किसी स्थान को सर्वोपरि माना गया है । इसी तरह कैथोलिक ईसाईयों के लिए वेटिकन सिटी है । यह इटली के अंदर ,रोम के टाईबर नदी के पश्चिमी किनारे पर एक सौ आठ एकड़ जमीन पर फैला हुआ ,एक स्वतंत्र राज्य है ॥ संसार का यह [क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों में ] सबसे छोटा राज्य है । यहाँ की मुद्रा यूरो है । इसका अपना स्टाम्प , अपना झण्डा , और अपना राष्ट्रीय गान है ।एक स्वतंत्र और आधुनिक राज्य के रूप मे इसे लाने का श्रेय इटली के अधिनायक बेनोटिनी मुसोलिनी को जाता है ।
द्वितीय विश्व युद्ध के समय जर्मन सैनिकों ने रॉम पर विजय प्राप्त कर लिया था ।मगर उन्होने एक तटस्थ देश के रूप मे इसकी इज्जत बरक़रार रखी थी । लेकिन ब्रिटेन की रोम पर बम गिरने की जिद्द ने इसे काफी समय तक दहशत के घने कोहरे मे लपेट रखा था ।
इस शहर [?] का काफी प्राचीन इतिहास रहा है । रोम रिपब्लिक के समय भी यह दलदल भूमि के रूप में अस्तित्व में था , और एक महत्व पूर्ण क्षेत्र माना जाता था ।इसके नाम के बारे में कहा जाता है कि यह वेटिकन नामक पहाड़ के कारण है ।कुछ इतिहासकारों का यह भी मानना है कि लैटिन में इसका अर्थ भविष्य बताने वाला होता है ।उस समय बहुत सारे भविष्य वक्ताओं की यहाँ दुकानें थी ,जिसकी वजह से यह स्थान काफी ख्याति प्राप्त था ।
प्रसिद्ध सम्राट नीरो के बारे मे कहा जाता है कि जब रोम जल रहा था ,नीरो बांसुरी बजा रहा था । मगर इतिहासकारों के अनुसार ही ,यह सही नहीं है । जब रॉम के उस भयंकर आग के बारे में सम्राट को पता चला ,और पुख्ता सबूत उपस्थित किया गया कि ,इस विनाशकारी आग के पीछे ईसाईयों का हाथ है ,तो वह आपा खो बैठा ।उसने वहाँ रहने वाले सारे ईसाईयों पर दिल दहलाने वाली यातनाएँ प्रारम्भ कर दी । उनलोगों को{क्योंकि उस समय वहाँ पगान का बोलबाला था}हाथ पाँव से पकड़ कर चीर डाला गया ,जंगली जानवरों से नुचवाया गया ,शूली पर चढ़ाया गया ,जीवित अग्नि में स्वाहा कर दिया गया ।
इस क्रूर अमानवीय घटना का शिकार उनका नेता ,जो जेसस क्राईस्ट का शिष्य था ,सेंट पीटर उसको भी होना पड़ा । हजारों लाशों से भरा वह स्थान रक्त रंजीत हो चला था ।
चौथी सदी में ,जब सम्राट कौंटेस्टाईन ने ईसाई को राजधर्म स्वीकार कर लिया , इस प्राचीन कब्रगाह के ठीक बीचोबीच सेंट पीटर का कब्र बना दिया { वह संभव तया यूरोप का पहला ईसाई धर्म अपनाने वाला शासक था ,उसने येरूशलम में भी किसी यूनानी मंदिर को तुड़वा कर ईसा के जन्म स्थान पर एक चर्च बनवाया था} ।यह जमीन भी ईसाईयों को उसी ने दिया था ,ऐसा भी कहा जाता है । ईसाईयों ने कोण्टेस्ताईन को सबसे महत्व पूर्ण राजा माना । यहाँ एक बहुत ऊंचा पत्थर का स्तम्भ {,सन डायल } है ,जिसे मिश्र से लाकर जूलियस सीज़र द्वारा अपने सर्कस की शोभा बढ़ाने के लिए स्थापित किया गया था ,कहा जाता है कि इसी के पास सेंट पीटर को उलटा लटका कर शूली पर चढ़ाया गया था ।
अनेक इमारतों से सुसज्जित , विशाल चंद्राकार, इसके प्रांगण की सुंदरता देखते ही बनती है । गोल गोल ऊंचे ऊंचे 284 डोरिक कौलम से सजे इसके ऊपर 140 संतों की खूबसूरत दूधिया मूर्तियाँ खड़ी हैं । सेंट पीटर बैसिलिका वेटिकन सिटी के माथे का ताज है । और यह दुनिया का सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण चर्च है । करीब पाँच सौ सालों से भी ज्यादा समय में इस चर्च को विभिन्न ख्याति प्राप्त कलाकारों ,आर्किटेक्ट ,पेंटर आदि द्वारा , पुनर्निर्मित कर सजाया संवारा जाता रहा है । माईकल एंजेलो जैसे लब्ध प्रतिष्ठित कलाकारों की पेंटिंग्स ने इसे और भी अद्वितीय बना दिया है ।
सेंट पीटर्स बैसिलिका ,चैपल ,और वेटिकन म्यूजियम देखने दुनिया भर के विभिन्न धर्मावलम्बी लोग ,स्त्री ,पुरुष ,बच्चे यहाँ आते हैं ।महिलाओं के लिए खुली बांह का वस्त्र पहन कर अंदर चर्च में जाने पर मनाही है । भीतर एक जगह ऐसा हैं ,जहां सिर्फ प्रार्थना के लिए जा सकते हैं ,फोटो लेना मना है ।{उस का नाम भूल गई हूँ }
हजारों लोग यहाँ पॉप का प्रवचन सुनने के लिए या अनेक धार्मिक अवसरों जैसे क्रिसमस ,ईस्टर आदि पर एकत्रित होते हैं ।यहाँ आज भी नारंगी और ब्लू धारी वाली आकर्षक परंपरागत पोशाक में स्वीश गार्ड ही रखवाली करते हैं । वेटिकन सिटी का विशाल दरवाजा जो पीतल का है ,बेहद आकर्षक बना हुआ है ।जब पोप यहाँ होते हैं ,अपने खिड़की से दर्शकों को आशीर्वचन देते हैं । अपनी गाड़ी में सवार होकर सबको हाथ हिलाते हुए प्रार्थना मे शामिल होते हैं । पॉप को सदेह देखना सभी धर्मावलम्बियों को रुचिकर लगता है ,जो उनके चेहरे से बयान होती रहती है ।
यहाँ की जनसंख्या उँगलियों पर गिनने लायक है । यहाँ के बहुसंख्यक नागरिक विदेशों में रहते हैं । 2011 की जनगणना के मोतबिक वहाँ 594 लोग थे ,जिनमें 71 कार्डिनल ,109 स्वीश गार्ड ,51 क्लरजी,एक नन,करीब 307 सदस्य पादरी ,जो कूटनीतिक पद पर विश्व भर में फैले हुए हैं ।{आंकड़े वहाँ के गाईड ने बताया था }यहाँ जन्म दर शून्य है ।जब कोई नया पोप बनता है तब यहाँ की संख्या में ईजाफ़ा होती है ।
वैटिकन सिटी परिसर में ही रिनेशा युग का बना {कुछ कुछ } वेटिकन गार्डेन है ,जो रंग बिरंगे फूलों ,नयनाभिराम मूर्तियों ,फव्वारों से सुशोभित यह गार्डेन अधिकांश तया पहाड़ी पर है ,जिससे यह और भी चित्ताकर्षक लगता है । लगता है जैसे वास्तव में देवलोक में भ्रमण कर रहे हों ।
पोप का नया निवास भी काफी लंबे चौड़े क्षेत्र में फैला सुखद अनुभूति प्रदान करता है ।
क्षेत्रफल के हिसाब से , यहाँ यातायात की अच्छी सुविधा है । रेलवे लाइन है हेलिकोप्टर है ,लेकिन एयर पोर्ट नहीं है ।[मगर रॉम,इटली में है ] खुले बस में वेटिकन सिटी का मनोरम आनंद उठाया जा सकता है ।
आधुनिक संचार साधन ,इंटरनेट ,टेलीफोन व्यवस्था ,फार्मेसी ,पोस्टल सिस्टम ,टेलीविज़न ,रेडियो आदि है ।
इसकी आर्थिक व्यवस्था ,म्यूजियम के टिकट बिक्री ,स्टाम्प बिक्री ,प्रतीक चिन्हों ,प्रकाशित सामाग्री की बिक्री ,आदि पर निर्भर करता है ।
यहाँ के अन्य कर्मचारी वगैरह इटली में रहते हैं और सामान्यतया वहीं के नागरिक कहलाते हैं ।
यहाँ अपराधों की संख्या कम ही है ,मगर बाहर के अपराधी यहाँ पर्यटकों की जेब काटना ,पर्स खींचना जैसा दुष्कर्म कर इटली पुलिस के शिकंजे में आते रहते हैं । एक दो लोग वहाँ भीख मांगते भी मिल जाएँ तो कोई बड़ी बात नहीं है ।
रोम में जून जुलाई अगस्त में कड़ी धूप रहती है ,इसलिए वहाँ हैट ,छाता लेकर जाना पसंद करते हैं ।
वेटिकन सिटी वास्तव में एक बहुत ही खूबसूरत जगह है ,और बेमिसाल अनुभूति भी । इसे धर्म और कलाकृतियों का अनूठा संगम कहा जाए तो कुछ भी अतिशयोक्ति नहीं होगी ।

 

 


॥ कामिनी कामायनी ॥

 

 

 

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