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अमन चाँदपुरी

 

 

 

 

जीवन में परिवर्तन
जरूरी होता हैं
उसे --
उत्कृष्ट बनाने के लिए
जैसे,
कुछ समय पहले
अपनी ही रची हुई कविता में
परिवर्तनत करना

 

 

घास के नुकीले बदन पर
पीठ के बल लेटा था मैं
मैंनें देखा
फ़लक मेरे उपर सोने की कोशिश कर रहा था

 

 

नदी का पानी बहता रहता है
सारी मोह-माया त्यागकर
लेकिन,
बहने का मोह कभी न त्याग पाया।

 

 

ज़िन्दगी के दरवाजे पर
हलचल कर रही है मौत
अन्त समय में ठंडक
कुछ ज़्यादा ही सता रही है मुझे
समेंटकर रख लूँ इसे

 

सुना हैं ---
कब्र में बड़ी गर्मी पड़ती है
तब शायद ये कुछ काम आये मेरे

 

 

 

अमन चाँदपुरी

 

 

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