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Wed Dec 12, 2018 4:26 pm
Forum: मुक्तक
Topic: देखते आ रहे दृश्य ये सर्वदा---डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
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देखते आ रहे दृश्य ये सर्वदा---डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

मुक्तक द्वयी (गीतिका ) देखते आ रहे दृश्य ये सर्वदा , अश्रु आँखों में छलके सदा सर्वदा । बाढ़ लीला मचाये भयंकर प्रलय , स्वप्न हैं टूटते झेलकर आपदा । रेवड़ी बाटते हो हमें नोच कर । राज पर राज हो फ़ेस ये चेंज कर । गरजते बरसते बादलों की तरह , चेतना जागती क्रोध ये देख कर । “डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव” सीता...
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Wed Dec 12, 2018 4:24 pm
Forum: मुक्तक
Topic: रात की कालिमा छा गयी थी जहां---डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
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रात की कालिमा छा गयी थी जहां---डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

https://plus.google.com/u/0/_/focus/photos/public/AIbEiAIAAABDCLnsu_uO0NugKiILdmNhcmRfcGhvdG8qKDg1ODkyMjZjYzRjMjZjMWQxODg3NWEyMDIwMWRiYTIwMWU4NzgyZTUwAWXzd9Wsr9Y3TRA6PryVqPhM3DQi?sz=32 शृंगारिक मुक्तक (गीतिका ) रात की कालिमा छा गयी थी जहां , प्रात की लालिमा छा गयी थी वहाँ । चाँद का नूर खोया कहीं गु...
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Wed Dec 12, 2018 4:20 pm
Forum: गीत
Topic: प्यार का सार है त्याग की भावना ---डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
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प्यार का सार है त्याग की भावना ---डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

https://plus.google.com/u/0/_/focus/photos/public/AIbEiAIAAABDCLnsu_uO0NugKiILdmNhcmRfcGhvdG8qKDg1ODkyMjZjYzRjMjZjMWQxODg3NWEyMDIwMWRiYTIwMWU4NzgyZTUwAWXzd9Wsr9Y3TRA6PryVqPhM3DQi?sz=32 शृंगार गीत (गीतिका ) प्यार का सार है त्याग की भावना , प्रेम रस धार है प्रीत की कामना । जिंदगी मिल गयी प्यार जिसने ...
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Wed Dec 12, 2018 4:12 pm
Forum: मुक्तक
Topic: है कहाँ नौकरी ये अजब राज है----डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
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है कहाँ नौकरी ये अजब राज है----डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

मुक्तक (गीतिका )--है कहाँ नौकरी ये अजब राज है https://plus.google.com/u/0/_/focus/photos/public/AIbEiAIAAABDCLnsu_uO0NugKiILdmNhcmRfcGhvdG8qKDg1ODkyMjZjYzRjMjZjMWQxODg3NWEyMDIwMWRiYTIwMWU4NzgyZTUwAWXzd9Wsr9Y3TRA6PryVqPhM3DQi?sz=32 ना हमें काम है ना तुम्हें काज है , है कहाँ नौकरी ये अजब राज है । राज ...
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Tue Dec 11, 2018 7:27 pm
Forum: आलेख
Topic: महाप्राण निराला की पुत्री सरोज---- डाॅ0 हरिष्चन्द्र शाक्य
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महाप्राण निराला की पुत्री सरोज---- डाॅ0 हरिष्चन्द्र शाक्य

आलेख महाप्राण निराला की पुत्री सरोज -डाॅ0 हरिष्चन्द्र शाक्य, डी0लिट्0 महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला‘ हिन्दी साहित्याकाष के ऐसे नक्षत्र हैं जिनकी कीर्ति रष्मियाँ युगों-युगों तक निखिल विष्व को आलोकित करती रहेंगी। नवनीत हिन्दी डाइजेस्ट के सम्पादक डाॅ0 गिरिजा षंकर त्रिवेदी बताते हैं, ‘‘बैसवारा क्षेत...
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Tue Dec 11, 2018 6:59 pm
Forum: press news
Topic: सवर्णों और दलितों का ढोंग से मोहभंग होना लोकतंत्र के लिये सुखद संकेत---डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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सवर्णों और दलितों का ढोंग से मोहभंग होना लोकतंत्र के लिये सुखद संकेत---डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

चुनावी नतीजों पर त्वरित टिप्पणी: सवर्णों और दलितों का ढोंग से मोहभंग होना लोकतंत्र के लिये सुखद संकेत! Inbox x डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-National President-BAAS & National Chairman-JMWA चुनावी नतीजों पर त्वरित टिप्पणी: सवर्णों और दलितों का ढोंग से मोहभंग होना लोकतंत्र के लिये सुखद संकेत! लेखक: ड...
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Mon Dec 10, 2018 6:08 pm
Forum: गीत
Topic: ज़बानें हमारी हैं-----महावीर उत्तरांचली
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ज़बानें हमारी हैं-----महावीर उत्तरांचली

ज़बानें हमारी हैं कवि: महावीर उत्तरांचली https://plus.google.com/u/0/_/focus/photos/public/AIbEiAIAAABDCIORiOnA7ZqWYiILdmNhcmRfcGhvdG8qKDUzYTY2ZGVhMmNkMTJkMDk2NTViNGYxOTE3Y2VkMTQ1NzcwMjEwZjMwAdu-Ig4D-0jpG4Uu1sRlaXJrVmXi?sz=32 ज़बानें हमारी हैं, सदियों पुरानी ये हिंदी, ये उर्दू, ये हिन्दोस्तानी ज़बान...
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Sun Dec 09, 2018 6:32 pm
Forum: कहानी
Topic: स्मृति लौट आई है ---डॉ. श्रीमती तारा सिंह
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स्मृति लौट आई है ---डॉ. श्रीमती तारा सिंह

स्मृति लौट आई है ---डॉ. श्रीमती तारा सिंह http://www.swargvibha.in/horizontalmenu/tara%20singh.png भाग्य के विश्रृंखल पवन ने , माधव की जिंदगी के हिसाब के पन्नों को, जगत के आँचल पर, जब तितर-वितर कर दिया , वह टूट गया | स्नेह छवि की पूजा के लिए नित्य नए-नए उपकरण जुटाने वाला माधव ,मन तूलिका को ह्रदय-रक्...
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Sun Dec 09, 2018 6:30 pm
Forum: कहानी
Topic: सुख का सौदागर---डॉ. श्रीमती तारा सिंह
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सुख का सौदागर---डॉ. श्रीमती तारा सिंह

सुख का सौदागर---डॉ. श्रीमती तारा सिंह http://www.swargvibha.in/horizontalmenu/tara%20singh.png छोटी-छोटी पहाडियों से घिरा नीमका गाँव, और गाँव के बीचो -बीच नदी का रूप लेकर बहता ,पहाडियों की तलहटी से कल-कलकर निकलता , कलनाद करता, पानी सदियों से गाँव के लोगों की प्यास बुझाता आ रहा है | लहलहाते खेत, खिला...
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Sun Dec 09, 2018 6:27 pm
Forum: कहानी
Topic: शरणार्थी ----डॉ. श्रीमती तारा सिंह
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शरणार्थी ----डॉ. श्रीमती तारा सिंह

http://www.swargvibha.in/horizontalmenu/tara%20singh.png पौष का महीना था | सलीम अन्यमनस्क मस्जिद के गुम्बद को निहारता , उसकी आँखों में उसके नैराश्य जीवन की क्रोधाग्नि , किसी सैलाब की तरह डुबो देने ,उसकी ओर बढ़ता चला आ रहा था | जब से उसका ह्रदय सजीव प्रेम से आलुप्त हुआ, तब से उसके एकांत जीवन बिताने ...