मोदी जी और जनता--- Nasir Ansari

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मोदी जी और जनता--- Nasir Ansari

Post by admin » Sat Oct 28, 2017 7:02 pm

मोदी जी और जनता
काला धन, भ्रष्टाचार को खत्म करने, टैक्स चोरी के बारे में मोदी जी द्वारा दिये गये भाषण सुन कर सभा में उपस्थित लाखों लोग ताली बजाते हैं, करोड़ों देशवासी उनकी प्रशंसा करते हैं, उनका समर्थन करते हैं।
विचित्र बात ये है कि काला धन तो इस जनता ने ही जमा कर रखा था, टैक्स चोरी तो ये जनता ही कर रही थी, आज भी कर रही है, रिश्वत तो ये जनता ही ले रही थी, दे रही थी। अभी भी ले रही है, दे रही है।
मोदी के स्थान पर ये सब बातें जनता क्युं नहीं कहती कि हम काला धन जमा नहीं करेंगे, टैक्स चोरी नहीं करेंगे, ना रिश्वत लेंगे और ना देंगे।
ये कैसी जनता है जो काला धन बाहर निकालने, भ्रष्टाचार समाप्त करने और जी एस टी जैसे सुधारों पर मोदी की प्रशंसा करती है, उनको जिताने के लिये समर्थन मांगती है। परन्तु ये जनता खुद काला धन भी जमा करेगी, टैक्स भी चोरी करेगी और रिश्वत का लेन-देन भी करेगी काली, कमाई से बेनामी संपत्ति भी खरीदेगी।
अब तक तो नेताओं के दोगलेपन के बारे में सुनते थे, ऐसी दोगली जनता देखी है अबकी बार।
जागो जनता जागो।
कब तक नेता लीड़र बदलते रहोगे? जनता कब खुद को बदलेगी? मोदी की गरीबी, उनकी माता श्री का 8 बाइ 10 के कमरे, उनके भाई की किराने की दुकान के गुण गाती रहेगी।
जनता खुद कैसे आलीशान मकानों में रह रही है, विलासिता का जीवन गुज़ार रही है। ये जनता कब अपनी विलासिता छोड़गी? ये जनता कब अपने खाली पड़े प्लाट और फ्लैट को छोड़कर 8 बाइ 10 के कमरे रहेगी? कब बैंकों से कर्जा लेकर चलने वाली अपनी फैक्ट्री बंद करके किराने की दुकान खोलेगी?
भारतीय जनता कि तो ये पुरानी मानसिकता है कि खुद तो धन जमा करेंगे, आलीशान घर बनायेंगे, विलासिता का जीवन जीयेंगे या उसे हासिल करने को दिन-रात मेहनत करेंगे। परन्तु छोटी सी घास की बनी कुटिया में रहने वाले साधू की पूजा करेंगे उसके सादे जीवन को महानता मानेंगे, उसको महान और पूजनीय मानेंगे, उसकी जय-जयकार करेंगे।
मोदी जी की गरीबी, सादा जीवन अच्छा है तो ये जनता क्युं नहीं उनका अनुसरण करती? क्युं दिन रात बंगले बनाने की जुगत अपने आपको खपा रहे हो?
कभी तो कोई समुदाय, मोदी जी के प्रशंसक लाखों नहीं तो हज़ारों की संख्यां में सामने आयें। और जिस तरह चंबल के दस्यु अपने हथियारों के साथ समर्पण करते थे और गलत कामों को छोड़कर अच्छा जीवन बिताने की प्रतिज्ञा लेते थे उसी प्रकार ये जनता, ये मोदी जी के समर्थक अपने काले धन, अपनी बेनामी संपत्तियों के साथ मंच पर आकर समपर्ण करें और आगे से काला धन जमा ना करने, टैक्स चोरी ना करने, रिश्वत ना लेने-देने और सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करने और रक्षा करने एँव राष्ट्र की गरिमा को बनाये रखने की प्रतिज्ञा लेंगे? क्या ये टैक्स चोरी करने वाली जनता चंबल के उन दस्यओं से भी गई गुजरी है? इनका हृदय परिवर्तन क्युं नहीं होता?
मोदी जी ने तो सुधारों को लागू करके अपना काम कर दिया। जनता अब तुम कब अपने आपको सुधारोगी?
जनता क्या मोदी जी के सुधारों के भाषणों को, उनके मन की बात को सुनकर तालियां बजाती रहेगी, आत्म विभोर होती रहेगी? या उन सुधारों को अपनाकर अमलीजामा भी पहनायेगी?
यदि जनता अपने आपको नहीं सुधारेगी तो मोदी जी को चाहे 5 साल के लिये चुनों या 50 साल के लिये चुनों कुछ लाभ नहीं होने वाला। हर बार मोदी सरकार आने पर भी अच्छे दिन नहीं आने वाले।
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