लाला सब नेता भये ,सब नेता बिजनसमैन----दीपक शर्मा

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लाला सब नेता भये ,सब नेता बिजनसमैन----दीपक शर्मा

Post by admin » Wed Nov 29, 2017 2:46 pm

लाला सब नेता भये ,सब नेता बिजनसमैन,
कौन सो ऐसो मन्त्र है मन सोचत दिन रैन।

आये ग़रीब कटुम्ब से ,नेता सिगरे नचिल्लात,
ज़रिया पर अरबन का ,नहीं नेता कोई बतात।

अँखिया कुछ बोलत रहें, कहें अधर और बयान,
कैसे दुमुंही तलवार से, फिर प्रजा के बचें प्राण।

अनपढ़ अफ़सर भये सभी, है आरक्षण की मार,
काबिल रिक्शा खींच रहे, हुकूमत को धिक्कार।

क्यूँ मूढों को भगवान् तुम, देत फिरत वरदान,
बोलन को आवत नहीं और घूमत वांचत ज्ञान।

कलयुग में दईया सभी, हो रहे सब अजूबे काम,
एक बस ज़मीन कमीन के, खूब बढ़ रहे दाम।

घर की ही देहरी खा रही, खुद दरवाज़ों को आज,
घरवाले ही लूट रहे,अपनी बच्चियों की लाज।

ऊल्लू सिंहासन पर बैठ के,समझे खुद को मोर,
"दीपक" बरखा ऋतू में मेंढक बहुत मचावत शोर।

सर्वाधिकार@दीपक शर्मा
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