रिश्ते प्यार और विश्वास से बनी -संचिता

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रिश्ते प्यार और विश्वास से बनी -संचिता

Post by admin » Sat Sep 26, 2015 7:12 am

रिश्ते प्यार और विश्वास से बनी नाज़ुक डोर होती है
जो ना निभा पाया इसकी नज़ाकत को ,वो इंसान खुद को आखिर में कमज़ोर और अकेला पाता है
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कोई बेगाना हो कर भी ,यहाँ चंद पलो में अपना बन जाता है
कोई शौहरत की चाह में ,यहाँ अपनों को भूल जाता है


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जीवन में हर मोड़ पे संघर्ष है
यहाँ डठकर आगे बढ़ने वाला सफलता पाता है

संचिता
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Posted by Sanchita Sanchita at 03:14 Email ThisBlogThis!Share to TwitterShare to FacebookShare to Pinterest
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