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सावन के हाइकुः- शशांक मिश्र भारती

Posted: Sun Jul 15, 2012 6:00 am
by admin
एक-

सावन आए
बादल उमड़ के
बरखा लाए।

दो-

डाली के झूले
बनते इतिहास
अब सावन।

तीन-

खिल जाता है
साजन का साथ पा
हाथों का रंग।

चार-

मोर नांचते
कोयल है बांचती
घर मेंहदी।