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आचरण तो---शशांक मिश्र भारती

Posted: Thu Sep 28, 2017 7:32 pm
by admin
प्रकाशनार्थ
शशांक मिश्र भारती के 10 हाइकु
हाइकु
1ः.
आचरण तो
श्रेष्ठ आभूषण
कुछ न बचे।
02ः.
अविश्वास
द्वेष जनक बने
तोड़े सम्बन्ध।
03ः.
पराधीनता
सदा ही दुःखदायी
भोग या मोक्ष।
04ः.
धुन्ध छाजाती
जीवन मूल्यों पर
जो पथभ्रष्ट।
05ः.
खेलें बालक
मचल रहा मन
रंग जीवन।
06ः.
आक्रमण तो
कष्टदायी हैं होते
तन या मन।
07ः.
विश्वास युक्त
प्रगाढ़ होते सम्बन्ध।
न चापलूसी।
08ः.
धरा कांपती
सीमाओं को लांघते
मानव देख।
09ः.
आज के खेल
जनतंत्र से पिसा
कौन न फेल।
10ः.
खेल ही खेल
लड़कर मरते
उनका मेल।


‘‘उपरोक्त10हाइकु मेरे अपने नितान्त मौलिक,स्वरचित व किसी भी अन्तरजाल पत्रिका पर अद्यावधि तक अप्रकाषित हैं।’’
दिनांक:- 27/09/2017
षषांक मिश्र भारती सम्पादक देवसुधा हिन्दी सदन बड़ागांव षाहजहांपुर -242401 उ0प्र0
दूरवाणी - 9410985048/9634624150
ईमेलः- ेींेींदाण्उपेतं73/तमकपििउंपसण्बवउध्कमअेनकीं2008/हउंपसण्बवउ