हाइकु -108 दीवाली -- Sushil Sharma

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हाइकु -108 दीवाली -- Sushil Sharma

Post by admin » Thu Oct 19, 2017 7:49 pm

हाइकु -108
दीवाली

सुशील शर्मा

मन का दीया
जलती रहे बाती
प्रेम का तेल।

दीपमालाऐं
झिलमिल सितारे
जमीं पे सारे।

दीपक तले
छिपता है तिमिर
कहाँ भागता।

सजा रंगोली
बैठीं हूँ दरवाजे
आओ माँ लक्ष्मी।

आई दीवाली
अंधयारी मावस
बनी दुल्हन।

दीपक की लौं
अन्धकार चीरती
अकेली खड़ी

बम फटाखे
अहंकार मिटाके
धूम धड़ाके।

घना तमस
उजियारे की आस
दीये के पास।

नेह के दीये
ज्योतिर्मय ह्रदय
जीवन जिए।

नन्हा दीपक
दूर तक फैलाये
आशा की आभा

हर आँगन
अंजुरी भर कर
बिखरा प्रेम।

दिव्य दीवाली
कलश द्वार द्वार
बंदनवार।

मुक्ति किरण
प्रेम अवतरण
तम हरण।

अटल प्रण
अंतस का दर्पण
ज्वलित क्षण

On 08-Oct-2017 6:23 PM, "Swargvibha" <swargvibha@gmail.com> wrote:
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