वक्त की घड़ी----सुशील शर्मा

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वक्त की घड़ी----सुशील शर्मा

Post by admin » Mon Dec 04, 2017 6:13 pm

हाइकु-116

सुशील शर्मा

वक्त की घड़ी
अब भी धड़कती
सीधी सी खड़ी।

रात है लंबी
सर्द बेजा सबेरा
चीखते पल।

दिन का माथा
कोहरे का लबादा
ओस खामोश।

बहती नदी
किनारे पर बैठा
सोचता तुम्हें।

तुम्हारा मन
चिड़िया सा चहका
मैं क्यों बहका।

तुम्हारे लिए
रेत पर उकेरे
मन के भाव।

हाइकु-117
सुशील

श्रम का स्वेद
माथे पर झलके
ओस मानिंद।

शब्द आकृति
अंतर्मन के भाव
बनी कविता।

दिल के साफ
बेशुमार धोखे में
फंसोगे आप।

जीवन खेत
लहलहाता प्रेम
रिश्तों का पानी

जीवन खेत
लहलहाते रिश्ते
स्नेह का पानी

राम मंदिर
राममय मंदिर
तेरे अंदर।

Buds are ope
My heart beats for you
You know not

कलियां खिलीं
मेरा दिल धड़का
तुम्हें है पता?
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