धूल मिट्टी पत्थर ---सुशील शर्मा

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धूल मिट्टी पत्थर ---सुशील शर्मा

Post by admin » Thu Feb 22, 2018 6:06 am

हाइकु -131
धूल मिट्टी पत्थर


धूल नहाया
खेल खेलता नन्हा
माता को भाया।

धूल में मिली
संस्कृति सभ्यताएं
समय बहा

छोटा सा गाँव
धूल से भरे पांव
श्रम की नाव

मिट्टी के लोग
पत्थर बन कर
धूल में मिले

मिट्टी की गोद
जन्मे सभी इसमें
चिर निद्रा भी।

उड़ती धूल
दहकता जीवन
स्मृतियाँ-शूल

चिर उर्वरा
मिट्टी है रत्नगर्भा
सृजन सर्ग।


जिद में अड़ा
पत्थर का हृदय
पानी सा बहा

मैं पत्थर हूँ
गुरुवर गढ़ दो
आकृति मेरी

सबसे जुदा
पत्थर पर ख़ुदा
तेरा चेहरा
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