सुभद्रा (काल्पनिक उपन्यास)--समीक्षक: डाॅ. आशुतोष पारीक

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सुभद्रा (काल्पनिक उपन्यास)--समीक्षक: डाॅ. आशुतोष पारीक

Post by admin » Fri May 12, 2017 5:07 pm

पुस्तक समीक्षा
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पुस्तक: सुभद्रा (काल्पनिक उपन्यास) लेखिका: प्रभा पारीक प्रकाशन वर्ष - 2017
प्रकाशक: बोधि प्रकाशन, जयपुर मूल्य: रुपये 200/- पृष्ठ संख्या - 187

महाभारत के पात्रांे को आधार बनाकर रचे गये साहित्य की महत्परम्परा में लेखिका प्रभा पारीक का एक अनूठा प्रयास है सुभद्रा। वेदव्यास रचित इस महान् ग्रन्थ के अंशों को अपनी काल्पनिक सोच के साथ जोड़ने वाला यह उपन्यास सुभद्रा के मन को पढ़ने का भरसक यत्न करता नज़र आता है।
सुभद्रा जहाँ एक ओर कृष्ण और बलराम की बहन है वहीं दूसरी ओर महान् धनुर्धर अर्जुन की पत्नी और वीर अभिमन्यु की माँ भी है। उपन्यास में सुभद्रा के जीवन और उससे जुड़े प्रसंगों को बड़ी ही खूबसूरती के साथ जोड़ा गया है। कृष्ण और अर्जुन की मैत्री के महत्त्वपूर्ण आधार के रूप में सुभद्रा का वर्णन किया गया है। मेरे विचार से उपन्यास की एक बड़ी विशेषता यह है कि महाभारत के सभी कथानकों और पात्रों को सुभद्रा की दृष्टि से देखा गया है और यह लेखिका की सफलता ही है कि विविध कथानक धीरे-धीरे सुभद्रा से जुड़ते हुए नज़र आते हैं।
सुभद्रा की अभिलाषा को अभिव्यक्ति प्रदान करते श्रीकृष्ण के प्रति कहे ये शब्द - ’’एक प्रार्थना..... आपने कहा है कि मेरे बताये मार्ग पर चलने वाला हर प्राणी मुझमें आकर समा जाता है... प्रार्थना है श्रीकृष्ण कि जग में जब भी आपकी पूजा हो... मुझे भी वहाँ स्थान मिले, जग में अभिमन्यु की माता बनकर याद की जाऊँ... मुझे भी काल तक पृथ्वी पर याद रखा जाये।’’
अतः मेरा पाठकों से यही निवेदन है कि जो भी महाभारत के पात्रों को पूर्व परम्परा से हटकर एक नवीन दृष्टि से देखना चाहते हैं, वे इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें।
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समीक्षक: डाॅ. आशुतोष पारीक
वरिष्ठ प्रवक्ता (संस्कृत)
सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय,
ब्यावर, जिला - अजमेर (राजस्थान)
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