झिगली बिगली --डॉ.प्रणव भारती

Post Reply
User avatar
admin
Site Admin
Posts: 21569
Joined: Wed Nov 16, 2011 9:23 am
Contact:

झिगली बिगली --डॉ.प्रणव भारती

Post by admin » Thu Nov 30, 2017 3:44 pm

झिगली बिगली
---------------------
Image

Image
नन्हा,प्यारा बचपन ,सबका दुलारा बचपन|
मात-पिता,दादा-दादी सबकी आँख का तारा बचपन ||
बचपन की स्मृति आते ही एक चमक सी आँखों में भर जाती है ,अंधेरों से मन कितना भी बुझा हुआ क्यों न हो ,उजालों से दमकने लगता है और हृदय बालपन की खूबसूरत लय पर नृत्य करने लगता है |हमारे सबके भीतर एक बच्चा छिपा रहता है जिसे हम जबरदस्ती मुह पर उँगली लगाकर बैठा देते हैं | किसी ने खूब लिखा है ;
“मेरे दिल के किसी कोने में एक मासूम सा बच्चा,बड़ों की देखकर दुनिया बड़ा होने से डरता है |”
यह सत्य है कि बालपन की ऊंगली पकड़कर हम सहज ही बच्चे की भूमिका में आ जाते हैं,उनके माध्यम से हम पुन: बचपन को जीते हैं |
‘झिगली-बिगली’ श्रीमती प्रभा पारीख का एक ऐसा ही प्रयास है जो उनकी प्यारी,दुलारी पोतियों के साहचर्य का परिणाम है |
इस नन्ही सी पुस्तक में प्रभा जी ने अपनी दो पोतियों का ज़िक्र किया है जिसमें एक सिया है और दूसरी नैनू ! पुस्तक की विशेषता यह है कि लेखिका ने बच्चियों की नन्ही –नन्ही बातों में सुन्दर संदेश भरे हैं ,उनकी छोटी-छोटी बातों के चित्र बारीकी से खींचे हैं | ये संदेश बच्चों के द्वारा बड़ों को दिए गए हैं |लेखिका ने इतने मनोरंजक तरीके से बच्चियों की बातों की प्रस्तुति की है जो सीधे मन के धरातल पर सुगंध बिखेरती है |पुस्तिका की एक और बहुत मनोरंजक बात यह है कि प्रभा जी ने लेखन प्रारंभ करने से पूर्व बच्चियों के द्वारा रचित शब्दकोष प्रस्तुत किया है |
प्रकाशक को तहेदिल से इस सुंदर पुस्तिका को प्रकाशित करने के लिए धन्यवाद है किन्तु साथ ही एक अनुरोध यह है कि छपाई की त्रुटियों पर ध्यान देना आवश्यक है अन्यथा पठन अरुचिकर होने लगता है |
बच्चों की दुनिया को इस रूप में प्रस्तुत करने के लिए श्रीमती प्रभा पारीक को बहुत बहुत बधाई |पूर्ण विशवास है कि वे भविष्य में भी इसी प्रकार बच्चों से जुड़ी रहकर पाठकों को कुछ नवीन प्रदान करेंगी |उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए ;
सस्नेह---डॉ.प्रणव भारती
Image
Mail your articles to swargvibha@gmail.com or swargvibha@ymail.com

Post Reply