"अहंकार"----अलका "अलमिका "

Description of your first forum.
Post Reply
User avatar
admin
Site Admin
Posts: 21569
Joined: Wed Nov 16, 2011 9:23 am
Contact:

"अहंकार"----अलका "अलमिका "

Post by admin » Sat Sep 22, 2018 9:37 am

Alka Agarwal


"अहंकार"

ओ चन्द्र! अपना अहंकार तुम गाते रहे रात भर।
शीतल, मृदु चाँदनी छोड़ अहसान बरसाते रहे तुम।।
अंधियारा अविश्वास का बिखराते रहे हर ओर।
निगल आत्मसम्मान, अजगर सा मुँह फैलाते रहे तुम।।
भुला न पाये तुम स्मृति उस सहज सहयोग की।
लीलने को बदले में हर खुशी, जिह्वा फैलाये रहे तुम।।
क्षुद्र उपकारों की आड़ में, हड़प लिये अधिकार सब।
रक्त संबंधों को भुनाने का करते रहे इंतजाम तुम।।
छद्म आदर्शों ने किया विघ्वंस मधुमय सब पलों का।
किस चाह में आख़िर अब विषडंक मार रहे हो तुम।।
दुःख की अनंत निशि के बाद नवभोर है मुस्काई।
उमगे हैं तुहिन तृण किरणों के, अब जाने की वेला देखो तुम।।
प्रकाश गीत के सच सम्मुख तिमिर राग कब तक़ चलेगा?
मुखरित प्रातः रश्मि तोडे़गी विषदंत ग़र अब भी फुफकारेगा।।
ओ चन्द्र! अपना अहंकार तुम सुनाते रहे उम्र भर।
अब भोर की ज्योतित किरण को चमकते देखो उम्र भर।।

-----अलका "अलमिका "-----
Image
Mail your articles to swargvibha@gmail.com or swargvibha@ymail.com

Post Reply