अचानक जवान हो जाती हैं बेटियाँ---Jitendra ved

Description of your first forum.
Post Reply
User avatar
admin
Site Admin
Posts: 21569
Joined: Wed Nov 16, 2011 9:23 am
Contact:

अचानक जवान हो जाती हैं बेटियाँ---Jitendra ved

Post by admin » Sun Sep 23, 2018 5:41 am

Jitendra ved

Sat, Sep 22, 12:59 PM (16 hours ago)



अचानक जवान हो जाती हैं बेटियाँ
बुनने लगती हैं ख्वाब
बन जाएगी माँ-बाप की बैशाखियाँ
बन कर जल्दी ही साहब
दूर करेगी माँ-बाप की परेशानियाँ

पर मिल जाते हैं उन्हें दरिंदे
यूनिवर्सिटी के पढ़े-लिखे बंदे
जो जीते हैं खाकर सियासती चंदे
मन से होते हैं वे बड़े गंदे
उनसे पूछ नहीं सकती वे जवाब
दिमाग मेंं ही रह जाते हैं सब ख्वाब
सताने लगती हैं उसे ख्वाबों की नादानियाँ

होस्टल को होटल समझते हैं पुलिस वाले
तोड़ देते हैं बेटियों की अलमारी के ताले
देते हैं भद्दी-भद्दी गालियाँ
बिखेर देते हैं किताबें और कापियाँ
मन हो जाता हैं उनका बहुत खराब
किरचों की तरह चुभते हैं उन्हें ख्वाब
हलाकान करती हैं उन्हें चाहत की रूमानियाँ

और सियासत के गुर्गे कहाँ होते हैं कम
बरसाते हैं बेटियों के चरित्र पर सितम
किसी में होता है छ:तो बताता आठ का दम
हर लड़का लगता उन्हें लड़की का सनम
दुख का हर पल बहने लगता है सैलाब
पाँव के छालों की तरह जलते हैं ख्वाब
और पसीने से तरबतर हो जाती हैं पेशानियाँ
Image
Mail your articles to swargvibha@gmail.com or swargvibha@ymail.com

Post Reply