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हाइकु -कुछ तथ्य ------सुशील शर्मा

Posted: Wed Dec 05, 2018 3:07 pm
by admin
Sushil Sharma


हाइकु -कुछ तथ्य
सुशील शर्मा

रवीन्द्र नाथ टैगोर और उनके बाद अज्ञेय जी ने अपनी जापान यात्राओं से वापस आते समय जापानी हाइकु कविताओं से प्रभावित होकर उनके अनुवाद किए जिनके माध्यम से भारतीय हिन्दी पाठक 'हाइकु` के नाम से परिचित हुए। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में जापानी भाषा के पहले प्रोफेसर डॉ० सत्यभूषण वर्मा(०४-१२-१९३२ ....... १३-01-२००५) ने जापानी हाइकु कविताओं का सीधा हिन्दी में अनुवाद करके भारत में उनका प्रचार-प्रसार किया। इससे पूर्व हाइकु कविताओं के जो अनुवाद आ रहे थे वे अंगे्रजी के माध्यम से हिन्दी में आ रहे थे प्रो० वर्मा ने जापानी हाइकु से सीधा हिन्दी अनुवाद करके भारत मे उसका प्रचार-प्रसार किया। परिणामत: आज भारत में हिन्दी हाइकु कविता लोकप्रिय होती जा रही है। अब तक लगभग ४०० से अधिक हिन्दी हाइकु कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और निरन्तर प्रकाशित हो है। प्रो० सत्यभूषण वर्मा के जन्म दिन ४ दिसम्बर कैं हाइकु दिवस के रूप मे मनाने का प्रारम्भ हाइकु कविता की पत्रिका `हाइकु दर्पण' ने २००६ से गाजियाबाद से किया।
हाइकु के तीन मूल तत्व

१. ५-७-५ वर्णों के क्रम में व्यवस्थित तीन पंक्तियों कि कविता
२. दो भाव, विचार, बिम्ब, दृश्य आदि कि तुलनात्मक प्रस्तुति
३. विस्मयकारी बोध अथवा चौंकाने वाला तत्त्व

हाइकु लिखने के क्रम

१. भाव या विचारों की सोच व आत्म-मंथन
२. उचित शब्दों का चुनाव
३. उन शब्दों को ५-७-५ वर्णों के क्रम में हाइकु की तकनीक के अनुसार व्यवस्थित करना
४ हाइकु १७ वर्णों व तीन पंक्तियों में कही गयी वक्तव्य, कथन, सूक्ति, लोकोक्ति, संदेश, शब्दों का प्रदर्शन मात्र नहीं होना चाहिए.
५ . हाइकु में दो पृथक भाव, विचार, बिम्ब या दृश्य को दो वाक्यांशों में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि पृथक होते हुए भी परस्पर सम्बंधित हों. इसमे एक वाक्यांश साधारण बात कहती हो तथा विषय वस्तु का केंद्र हो और दूसरा उससे सम्बंधित कोई अचंभित करने वाला विशेष तत्त्व.
६ . हाइकु में दूसरा वाक्य खंड पहले वाक्यांश के अर्थ में घुमाव या मोड़ प्रदान करता है जो विस्मयात्मक प्रस्थिति उतपन्न करता है और यही हाइकु कि सुंदरता होती है. हाइकु जितना विस्मयकारी लगेगा पाठक उतना ही रोमांचित होगा.
७ . हाइकु में सरल, साधारण और सही बातें जो नियमित रूप से हम देखते हैं, सम्मिलित होती हैं. प्रायः यह प्रकृति से सम्बंधित होते है पर जीवन या दैविक सम्बंधित हाइकु (सेनेरयू ) भी लिखे जाते हैं. हाइकु को विषय वस्तु नहीं बल्कि लिखने कि कला उत्तम बनाती है.
8 . हाइकु एक वाक्य के रूप में नहीं होना चाहिए
9 . हाइकु में कथन नहीं बल्कि दर्शन होना चाहिए
१० . हाइकु लेखन में भाव, भाषा व तकनीक तीनों का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए।
११ . हाइकु लिखने के लिए निरंतर अध्ययन व अभ्यास आवश्यक है।
हाइकू को "अधूरी" कविताएं भी कहा जाता है क्योंकि ये कविताएं पाठकों को अपने मन में कविता को पूर्ण करने की इजाज़त देती हैं। इस वजह से, लेखक को मंत्रमुग्ध करने वाली भावनाओं को बताने के बजाय अपने पाठकों को पल के अस्तित्व से जुडे सच को दिखाने की जरूरत है |[२] इस तरह पाठक भी कवि की तरह छवि की कल्पना कर अपनी भावनाओं को महसूस कर पाएंगे। हम स्पष्टता की जरूरत को समझते हैं, लेकिन हाइकू की सार्वभौमिकता यह सुनिश्चित करती है कि आपके पाठकों तक आपका संदेश पहुंच गया है, |
शालीन व सूक्ष्म भाषा का प्रयोग करें। उदाहरण के लिए, गर्मी शब्द का इस्तेमाल करने के बजाय सूरज या तेज़ी से बहती हवा पर अपना ध्यान केंद्रित करें।
रूढोक्ति मुहावरों का इस्तेमाल करने के बजाय सरल भाषा का प्रयोग करें। "अंधेरी, तूफानी रात," जैसी लाइने समय के साथ फीकी पड़ने लगती हैं। आप जिस छवि का वर्णन करना चाहते हैं उसके बारे में सोचें तथा अपनी बात को व्यक्त करने के लिए मौलिक एवं मूल भाषा का उपयोग करें। कठीन शब्दों में लिखने के बजाय सरल व सौम्य शब्दों का प्रयोग करके अपनी भावनाओं को व्यक्त करें।