चलता हुआ आदमी---रोहित ठाकुर

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चलता हुआ आदमी---रोहित ठाकुर

Post by admin » Sun Aug 26, 2018 7:19 pm

_____ चलता हुआ आदमी _______

एक चलता हुआ आदमी
रेलगाड़ी की तरह नहीं रुकता
वह तो बस थक कर रुक जाता है
सड़क पर और शून्य को ताकता है
सड़क पर थक कर रुका हुआ आदमी
महसूस कर रहा होता है प्यास
वह नाप रहा होता है दूरी
अपने घर का
वह इस संकोच में रुक जाता है
किस से पूछा जा सके
सस्ते दाम वाले होटल का पता
एक चलता हुआ आदमी
इस लिये भी रूकता है
कि चलते हुए उसका
उखाड़ जाता है दम
एक चलता हुआ आदमी
अपने चलने का हिसाब
लगाने के लिए रुकता है
कभी एक चलता हुआ आदमी
रूकता है
एक हाथ के निढ़ाल हो जाने पर
सामान को
दूसरे हाथ से पकड़ने के लिए
एक थक कर रुके हुए
आदमी के पक्ष में
कोई नहीं रुकता
न तो इस गोलार्द्ध पर
न उस गोलार्द्ध पर ।।
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नाम रोहित ठाकुर

जन्म तिथि - 06/12/ 1978

शैक्षणिक योग्यता - परा-स्नातक राजनीति विज्ञान
विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित
विभिन्न कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ

वृत्ति - सिविल सेवा परीक्षा हेतु शिक्षण

रूचि : - हिन्दी-अंग्रेजी साहित्य अध्ययन

पत्राचार :- जयंती- प्रकाश बिल्डिंग, काली मंदिर रोड,

संजय गांधी नगर, कंकड़बाग , पटना-800020, बिहार

मोबाइल नंबर- 7549191353
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