हिजडा़---डां नन्दलाल भारती

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हिजडा़---डां नन्दलाल भारती

Post by admin » Mon Mar 13, 2017 2:55 pm

डां नन्दलाल भारती

विद्यासागर एवं वाचस्पति सम्मानोपाधि
चलितवार्ता-09753081066/9589611467
सूरत-9512213565


हिजडा़/कहानी
मुबारक हो ,घोपाल,गजब का हवेली तुमने बनाया है,करोड़ो तो खर्च कर दिये होगे ?
निशेध बाबू बधाई दे रह हो या व्यंगबाण छोड रहे हो, साले हिजड़ो ने इज्जत का जनाजा निकाल दिया, तुम हो कि जख्म पर नमक डाल रहे हो ।
घोपाल कैसी बात कर रह हो, हिजड़े तुम्हारी इज्जत का जनाजा कैसे निकाल सकते है?
निशेध बाबू तुम्हारा हिजड़ो से पाला कभी नहीं पड़ा क्या ?
तीज त्यौहार पर बेचारे आते है जो बन पड़ता है, दे देते है बतौर नेग, और क्या पाला पड़ेगा घोपाल बाबू?
इसी नेग के चक्कर में तो सालो ने मेरी इज्जत मांटी में मिला दिया ।
नेग ही तो मांग रहे होगे,हवेली पर कब्जा तो नहीं करने आये थे ?
नेग की रकम सुनोगे तो चक्कर आ जायेगा निशेध बाबू।
क्या कितनी भारी रकम की मांग कर दिया था किन्नरों ने ?
साले भीखारियों ने दस हजार की मांग रख दिया था।
भीख की रकम तो ज्यादा लगती है पर किन्नर भीख नही मांगते है, वे तो न्यौछावर लेते है,बजाते हैं नाचते बधाई गीत गाते है।अपने सामथ्र्य अनुसार दे देना चाहिये।
साले भीखारियों को एक पैसा नही देने लायक है।
कैसी बात कर रहे हो ,घोपाल क्यों नही देना चाहिये ? अरे उन बेचारों के जीने का कोई सहारा तो होना चाहिये।तुम इतने पढ़े लिखे हो करोड़ों का मकान है, अरबपति हो इसके बाद भी दान दक्षिणा के लिये मुंह बाये रहते हो। तुम और तुम्हारे लोग कहते हैे, दान देने से चहूंओर से बरक्त होती है,वह भी तुम और तुम्हारे लोगों को । कभी पोथी का भ्रम दिखाकर,कभी भगवान का अनगिनत बहाने तुम लोगों ने आदमी को लूटने के लिये बना रखे है।इतना ही नहीं पूरे समाज को विखण्डित कर रखा है,अपने फायदे के लिये,पांव पूजवाने के लिये। किन्नरों के पेट पालने का और कोई जरिया तो नही है ना घोपालबाबू।
विक्रम तुम तो सालों को ऐसी तरफदारी कर रहे हो जैसे तुम्हारे रिष्तेदार हो।
,घोपाल बाबू बात तो सही कह रहे हो,बन्दर हमारे रिष्तेदार हो सकते है तो क्या इसंान नही हो सकते,किन्नर है तो इंसान ही।देखा जाये तो किन्नरों से गिरे हुए वे लोग है जो रूढ़िवादिता की आड़ में भ्रम में रखकर लूटते है। ,घोपालबाबू जरा विचार करो किन्नरों के सामाजिक बहिश्कार का जिम्मेदार कौन है ? उन्हें भी मां बाप का सहारा मिलता,घर-परिवार में जगह मिली होती पढ़ने लिखने का मौंका मिला होता,समाज उन्हें बराबरी का हक दिख होता तो, वे भी सभ्य होते,सभ्य समाज के तौर तरीके जानते पर जैसे पता चला पैदा होने वाली औलाद किन्नर है नजरिया बदल गया। एक दिन बेघर हो गये,बाबू आखिरकार जिम्मेदार तो पुरूश प्रधान समाज ही है। कुप्रवृत्तियों को बढा़वा देने में घोपालबाबू आप और आपके लोग आगे रहते है। किन्नर इतने हिंसक नही होते है उनका दिल भी इंसान जैसा ही धड़कता है,उनको भी सुख-दुख और दर्द का एहसास होता है। अगर हिंसक हुए है तो समाज की कू्ररता जिम्मेदार है।
विक्रम तुम्हारे कहने का मतलग तो ये हुआ कि सालों को चांदी की थाली में बीस हजार रखकर दे कर सालों के पांव छू लेते ।
घोपाल बाबू पांव छूने में कोई बुराई नही पर तुम और तुम्हारे लोग तो पांव छुआने की कसम ले रखे हो कैसे किसी का पांव छू सकते हो ? इतने ही नही जीवन हो चाहे मरन आप दान लेना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हो किन्नरों को नेग कैसे दे सकते हो।
अरे वाह विक्रम क्या बात तुमने कह दी निशेध बाबू बोले।
ऐसी बात नही है हम देने को तैयार थे पर साले हिजड़े जिद पर अडे थे कि दस हजार लेकर जायेगे घोपाल सफाई में बोले।
समझाने से समझ जाते है,इतनी जिद नही करते,घोपालबाबू तुमने रौब झाड़ दी होगी निशेघ बाबू बोले।
मैं पूजा पर बैठा हुआ था,उनके गाने बजाने से तंग आ गया बस इतना कह दिया कि जाओ नही देना है,ज्यादा चिल्ला चोट करोगे तो पुलिस बुला दूंगा।बस क्या साले नंगे होकर धमाचैकडी करने लगे।
घोपाल बाबू सदियों से जमाने को लूटते आ रहे हो जब देने की बारी आयी तो रूतबे की अकड़ दिखने लगे वह भी किन्नरों को।
क्या करता, समझने को तैयार ही नहीं थे साले हिजड़े घोपाल बोले।
निशेध-देखो महराज,ये जो आपका वैभव है,असल में यह लोगों को ठगकर ही आपने खड़ा किया है । इस वैभव के समन्दर से हजार दान कर देते तो क्या बिगड़ जाता,दान करने का तनिक सुख ले लेते।वह भी किन्नरों को जिन्हें लोग दान देना खुदनसीबी समझते हैं।
हिजड़ों को दान देना खुदनसीबी कैसे हुई घोपाल बाबू बोले ।
क्यों बहस कर रहे हो हम ब्रहमा के मुख से पैदा हुए लोग है,हमे दान देने से लोगो को पुण्य मिलता है घोपाल बाबू बोले।
दुुनिया बदल चुकी है, आदमी चांद पर बस्ती बनाने की योजना बना रहे है,और तुम अकूत चल-अचल सम्पति के मालिक जमाने को रूढिवादी,जातिवादी पोथी के अंधेरे में रखकर दान लेने और पांव पूजवाने के चक्रव्यूह से समाज को मुक्त नहीं होने देना चाहते हो निशेध बाबू बोले?
तुम लोग हिजड़ों के इतने पक्षधर क्यों बन रहे हो घोपाल बोले ।
बात पक्ष -विपक्ष की नही है बात अधिकार की है घोपाल बाबू।
क्या हमने अधिकार का अपहरण करके रखा है घोपाल बाबू बोले ।
जी सच तो यही है विक्रम बाबू बोले ।
कैसे घोपालबाबू पूछ बैठे ?
दुनिया जानती है समाज को विखण्डित और देष को खण्डित करने का श्रेय धर्मवाद और जातिवाद को जाता है,यही नही नारी उत्पीड़न भी रूाढिवादी धर्मवाद की देन है। बताओ जिसे देष में गाय का माता सिर्फ माना जाता हो उसी देष में करोड़ों औरते वेष्यायें है।भला हो अम्बेडकर बाबा का की उन्होने संविधान में महिलाओं को उचित स्थान दे दिया वरना गिद्ध नोंचते रहते। जातिवाद के नाम पर बलात्कार,चीरहरण हो रहा है,आदमी को अछूत बनाकर अमानित किया जा रहा है,जिससे दुनिया लज्जित है पर रूढिवादी व्यवस्थापकों को तनिक भी लज्जा नही आती।जातिवादी व्यवस्था के संरक्षक तुम्हारे पूर्वज ही है घोपालबाबू। हिजड़ों को भी भेदभाव वाले चष्मे से देखे जा रहा हैं ।
क्यों दहीं देखा चाना चाहिये घोपाल बाबू पूछ बैठे ।
क्योंकि किन्नर भी इंसान होते है, उन्हें भी आदमी होने का हक मिलना चाहिये,वे भी इसी धरती पर पैदा हुए है,वह भी मां की कोख से जैसे हम और आप पैदा हुए है निशेध बाबू बोले ।
क्या बात कर रहे हो निशेध बाबू ये घोपाल बाबू तो ब्रहमा के मुख से पैदा हुए है,ये सर्वश्रेश्ठ षक्तिमान है। हिजड़ों को इंसान कैसे मान सकते हैं आप मान सकते हो ? क्योकि आप मां की कोख से पैदा हुए हो विक्रम बाबू बोले ।
ये तो रूढिवादी अंधा कानून मानता होगा,संवैधानिक कानून तो यह नही मानता। कानून की नजर में सभी मानव समान है,इनमें किन्नर भी आते है निशेध बाबू बोले।
बिल्कुल सही कह रहे हो,कई किन्नरों ने तो धकियानूसी आदमी से उपर उठकर दिखा दिया है कि वे सच्चे इसान है,देष और समाज के लिये कुछ कर सकते है। कई किन्नरों ने तो चुनाव जीतकर साबित भी कर दिया है।
हमारी इज्जत का जानाजा तो सालों ने निकाल दिया घोपाल बाबू बोले ।
घोपालबाबू किन्नर भी प्यार के भूखे होते है। वे भी प्रेम,नफरत और दुत्कार की भाशा समझते है।उन्हें इज्जत देते तो वे धमाचैकड़ी क्यों करते ? उनका जीवन तो इसी से चलता है,न तो उनके पास कोई रोजगार है न नौकरी है, और रूढिवादी समाज हेय दृश्टि से देखता है करे तो क्या करे।उन्हें भी षिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में वरीयता मिलती तो वे भी अपने पांव पर खड़े होते क्यों न्यौछावर गाते, क्यों तीज त्यौहार पर दरवाजे दरवाजे दस्तक देते। बाबू पेट का सवाल है। किन्नरों को भी भूख लगती है प्यास लगती है।उन्हें भी खेती की जमीन रखने का अधिकार होना चाहिये पर क्या जमीन का अधिकतर हिस्सा कुछ दबंग लोगों के कब्जे में हैं,अधिकतर जनसंख्या भूमिहीन है,भूमिहीन लोग खेतिहर मजदूर है,इनका जीवन हमेषा दुखों के पहाड के तले दबा होता है। देष में किन्नर समस्या नही है उन्हें बना दिया गया है। उनका उपयोग नीति निर्धारक नही कर पा रहे है विक्रम बाबू बोले ।
ठीक कह रहे है विक्रम बाबू सरकार और समाज किन्नरों के उद्धार के लिये काम किये होते तो ये किन्नरों कीे ताकत देष और समाज के लिये उपयोगी साबित होती पर रूढिवादी समाज ने अच्छा काम करने से तौबा कर लिया है,रूढिवादी लोग लोगों को भ्रम में रखकर सूअर ,कुत्ते तक को भगवान का अवतार मान लेते है,पर जब उनके रास्ते में आ जाते है तो घृणा के पात्र बन जाते है,आदमी भी अछूत हो जाता है।समाज के नीतिनिर्धारक दोहरी मानसिकता के षिकार है,बस अपने स्वार्थ को समझते है। किन्नरों के साथ भी यही हो रहा है निशेध बाबू बोले ।
किन्नरों का भी मान मर्यादा होती है,उनमें भी स्वाभिमान होता है। विक्रम बाबू बोले।
खाक होता हैं सालों में जनता को ठग रहें हैं घोपाल बाबू बोले ?
घोपाल बाबू बोले हिजडे़ भी इंसान की औलाद होते है चप क्या तुम्हारे दिलों मिाग में जातिवाद,भेदभाव छाया हुआ है,इसलिये हिजड़े तुमको इंसान नही लगते। वे भी वही काम करते है जो इंसान करता है,वे समाज सेवा एलोगो की मदद, बेसहारा कन्याओं के ब्याह तक ये हिजड़े बिना किसी मोह के करते है,वे भी इसी समाज की सन्तान है,वे भी इसी समाज में आप रहते ह जिस में हम आर आप रहते है पर उन्हें बेदखल कर दिया गया हैै घोपाल बाबू हिजड़े वैसे ही है, जैसा असाध्य रूप से पीड़ित परविार के सदस्य । क्या असाध्य रोग से पीड़ित सदारूा को घर से बाहर किया जाता है विक्रम बाबू बोले ?
हिजड़े भी इंसान हैं एउन्हें भी समान रूप से जीने का हक होना चाहिये,जल,जमीन और जंगल पर अधिकार मिलना चाहिये पर क्या सब पर तो आप जैसे दंबंगों का कब्जा है,अधिकतर आबादह भूमिहीन है निशेध बाबू बोले ।
ठीक कह रहे हो निशेध बाबू उन पर वही कायदे कानून लागू होते है जो इंसान पर तो इतना भेदभाव क्या,बस पैदा कर थपोड़ा बजाकर मांगने को छोड दिया गया लोक लाज की की डर से ,ये कैसी लोक लाज है।बेचारे जो निछावर पाते है उस पर असामाजिक तत्वा और पुलिस का भी हिस्सा लगता है विक्रम बाबू बोले।
बेचारे सब्र की इन्तहा पार कर देते है। कभी किसी हिजड़े को डाक्टर के पास देखा है, वे अपना दुख पीकर जीवन बीता लेते है,मरते हैं तो भी किसी को भनक तक नही लगने देते,कहा लेकर जाते है,कहां दफनाते है पता है नही ना,षायद किसी को यह रहस्य मालूम नही होगा सोचो कितना बड़ा बलिदान करते है,जो समाज उन्हें पैदा होते है फेंक देता है, उनके समाने से हिजड़े षव तक नही आने देते। कितना दर्द होता होगा,घोपाल बाबू अब तो अपने घार्मि विधान में कुछ फेर बदल करो निशेध बाबू पसीना पोछते हुए बोले।
घोपाल बाबू अरे अब खत्म करो,हिजड़े साले क्या हुए जैसे कायनात के कोहिनूर हो गये।साले पांच हजार लेकर ही गये,अब तो बख्ष दो ।
कोहिनूर ही है पर समाज के ठेकेदारो ने उन्हें दूर झटक दिया है सिर्फ छूछी षान के लिये,हिजडें भी इंसान है,उन्हें भी इंसान कहलाने का हक है निशेधबाबू बोले ।
कानून ने किन्नरों को थर्ड जेण्डर की मान्यता तो दे दी है। देखना है समाज और सरकार अपने फर्ज पर कब खरे उतरते है।

डां.नन्दलाल भारती
दिनांकः06.11.2016


डा.नन्दलाल भारती
कवि,लघुकथाकार,कहानीकार,उपन्यासकार
षिक्षा - एम.ए. । समाजषास्त्र । एल.एल.बी. । आनर्स ।
पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन ह्यूमन रिर्सोस डेवलपमेण्ट ;च्ळक्भ्त्क्द्ध
जन्म स्थान- जिला-आजमगढ ।उ.प्र।
प््राकाषित पुस्तकें


अप्रकाषित पुस्तकें.........




सम्पादन उपन्यास-अमानत, चांदी की हंसुली
उखड़े पांव।लघुकथा संग्रह। एवं अन्य प्रतिनिधि पुस्तकें

उपन्यास-दमन,वरदान, अभिषाप एवं डंवरूआ
कहानी संग्रह -मुट्ठी भर आग,हंसते जख्म, सपनो की बारात,अण्डरटेकिंग
लघुकथा संग्रह-उखड़े पांव / कतरा-कतरा आंसू
काव्यसंग्रह -कवितावलि / काव्यबोध, मीनाक्षी, उद्गार,भोर की दुआ,चेहरा दर चेहरा
आलेख संग्रह- विमर्ष एवं अन्य

इंसा न्यूज मासिक,इंदौर

सम्मान/पुरस्कार विद्यावाचस्पति एवं विद्याासागर विक्रमषिला हिन्दी विद्यापीठ,
हिन्दी भाशा भूशण,साहित्य मण्डल,श्रीनाथद्वारा,
वरि.लघुकथाकार सम्मान.2010,दिल्लीस्वर्ग विभा तारा राश्ट्रीय सम्मान-2009,मुम्बई,
साहित्य सम्राट,मथुरा।उ.प्र.। विष्व भारती प्रज्ञा सम्मान,भोपल,म.प्र.,
विष्व हिन्दी साहित्य अलंकरण,इलाहाबाद।उ.प्र.। लेखक मित्र ।मानद उपाधि।देहरादून।उत्तराखण्ड।
भारती पुश्प। मानद उपाधि।इलाहाबाद, भाशा रत्न, पानीपत ।
डां.अम्बेडकर फेलोषिप सम्मान,दिल्ली, काव्य साधना,भुसावल, महाराश्ट्र,
ज्योतिबा फुले षिक्षाविद्,इंदौर ।म.प्र.। डां.बाबा साहेब अम्बेडकर विषेश समाज सेवा,इंदौर ,
विद्यावाचस्पति,परियावां।उ.प्र.। कलम कलाधर मानद उपाधि ,उदयपुर ।राज.।
साहित्यकला रत्न ।मानद उपाधि। कुषीनगर ।उ.प्र.।
साहित्य प्रतिभा,इंदौर।म.प्र.। सूफी सन्त महाकवि जायसी,रायबरेली ।उ.प्र.।एवं अन्य

आकाषवाणी से काव्यपाठ का प्रसारण । रचनाओं का दैनिक जागरण,दैनिक भास्कर,पत्रिका,पंजाब केसरी एवं देष के अन्य समाचार पत्र-पत्रिकाओ प्रकाषन , अन्य ई-पत्र पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाषन।

सदस्य इण्डियन सोसायटी आफ आथर्स ।इंसा। नई दिल्ली
साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी,परियांवा।प्रतापगढ।उ.प्र.।
हिन्दी परिवार,इंदौर ।मध्य प्रदेष। अखिल भारतीय साहित्य परिशद न्यास,ग्वालियर,मध्य प्रदेष ।
आषा मेमोरियल मित्रलोक पब्लिक पुस्तकालय,देहरादून ।उत्तराखण्ड।
साहित्य जनमंच,गाजियाबाद।उ.प्र.। म.प्र..लेखक संघ,म.्रप्र.भोपाल,

स्थायी सम्पर्क सूत्र आजाद दीप, 15-एम-वीणा नगर ,इंदौर ।म.प्र.!
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जनप्रवाह।साप्ताहिक।ग्वालियर द्वारा उपन्यास-चांदी की हंसुली का धारावाहिक प्रकाषन
उपन्यास-चांदी की हंसुली,सुलभ साहित्य इंटरनेषल द्वारा अनुदान प्राप्त
नेचुरल लंग्वेज रिसर्च सेन्टर,आई.आई.आई.टी.हैदराबाद द्वारा भाशा एवं षिक्षा हेतु रचनाओं पर षोध ।
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