आंसू----डां नन्द लाल भारती

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आंसू----डां नन्द लाल भारती

Post by admin » Mon Nov 12, 2018 12:15 pm

लघुकथा ःआंसू...प्रकाशनार्थ
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Nandlal Bharati

12:07 PM (7 minutes ago)

to me
लघुकथा :आंसू
काका पांव लागू ।कैसे हो काका।घर मे सब.ठीक है।
खुश रहा बेटवा, दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करा।हम तो पक्के हुए आम जैसे हैं।
काका बैठिये, रमन कुर्सी सरकाते हुए बोला ।
थोड़ा जल्दी में तो हूँ ,कह रहे तो दो मिनट बैठ लेता हूँ, तनिक बातचीत हो जायेगी फिर ना जाने कब मुलाकात हो या न हो सुखचरन कहते हुए कुर्सी मे धंस गये।
ऐसा क्यों बोल रहे काका क्यों नहीं मुलाकात होगी ?
बेटवा बूढी काया का क्या भरोसा, उमर हो चली,ना जाने कब बुलावा आ जाये ।
आप शतायु हो काका ।आप सबकी हौशला अफजाई करते हो,और अब आप निराश ....?
निराशा के आंसू तो भैय्याजी की आंखों मे भी उतरने लगे हैं। सोचो बेटा तुम्हारे पिता के ये हाल तो हमारा क्या होगा ?
काका जानता हूँ पिताजी नाखुश हैं।
बेटा छत का टपकना घर के लिए कितना हानिकारक हो सकता है।छत टपकने का मतलब समझते हो ना।
हां काका ।
रिपेयर के फायदे का मतलब भी ।
बिल्कुल समझ गया काका।
बेटा जिस घर मे बुजर्गो की आंखो मे आंसू आ गये उस दिन से समझो परिवार की दीवारे कमजोर होना शुरू हो गई।
काका आपने हमारी आंखें खोल दी।मैं सास-ससुर और पत्नी की गलत रायशुमारी का शिकार हो गया था।
बेटा रमन मां बाप जीवित भगवान हैं कहते सुखचरन उठ खड़े हो गए ।
काका हमारे मां-बाप की आंखों मे अब कभी नहीं आंसू उतरेंगे।धरती के भगवान को कभी ना नाराज करूंगा। हमें भूल का एहसास हो गया है।मैं दिनेश से भी बात करूँगा, काका आपकी आंखों से भी अब नहीं रिसेंगे....... आंसू ।
बेटा तुम अपने गांव के श्रृंगार हो । शाबाश बेटा रमन ।
डां नन्द लाल भारती
12/11/2018
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