नव दुर्गा आराधना ----रघु आर्यन

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नव दुर्गा आराधना ----रघु आर्यन

Post by admin » Wed Sep 27, 2017 7:02 pm

स्वीकार करो माँ मुझको, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

नव रूप दिखावत, नव ज्ञान बतावत ।
दरबार जो आवत, नव तेज है पावत ।।
नव तेज धरो मां मुझ में, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

स्वीकार करो माँ.....

हे शैलपुत्री, रूप देवी ।
तुम हो जग की, शिखर सेवी ।।
तुम शिखर करो मां मुझ को, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

स्वीकार करो माँ....

हे ब्रह्मचारिणी, सब दुख्ख हारिणी ।
आशीष दो मुझे, तुम ध्यान धारिणी ।।
तुम ध्यान धरो मां मुझ पे, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

स्वीकार करो माँ....

हे चंद्रघंटा नाद की, ले बांड़ तरकश ढाल की ।
करती हो सेवा भक्त की, करना कृपा आशक्त की ।।
आशक्त हरो माँ मेरे, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

स्वीकार करो माँ....

हे माँ कूष्माण्डा, तुम जग निर्माता ।
तुम चेतन दाता, ब्रह्माण्ड-विधाता ।।
ब्रह्माण्ड धरो मां मुझ पे, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

स्वीकार करो माँ....

हे स्कंदमाता, सद्ज्ञान दाता ।
व्यवहार दाता, हो कर्म दाता ।।
कुछ कर्म भरो मां मुझमें, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

स्वीकार करो माँ....

हे कात्यायनी, देवी क्रोधिनी ।
तेरा क्रोध भी, हितकर ज्ञानिनी ।।
कुछ ज्ञान भरो मां मुझ में, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

स्वीकार करो माँ....

हे देवी कालरात्रि, तुम हो प्रकोप धात्री ।
हैं जो जग दुष्ट यात्री, उनकी हो संहार दात्री ।।
संहार करो माँ दनुजों का, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

स्वीकार करो माँ....

हे माँ महागौरी, मन की हो तुम गोरी ।
करूणामयी डोरी, उद्धार कर मोरी ।।
उद्धार करो माँ मेरा, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

स्वीकार करो माँ....

हे सिद्धिदात्री माता, सम्पूर्णता की दाता ।
सिद्धि वही है पाता, गुणगान तेरा जो गाता ।।
गुणगान करूं मां अब तो, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

स्वीकार करो माँ मुझको, तेरे शरण में आए हैं ।
निष्पाप करो मुझ पापी को, तेरे चरण में आए हैं ।।

----रघु आर्यन----
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