दाता तेरे सुमरिन का--मनमोहन भाटिया

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दाता तेरे सुमरिन का--मनमोहन भाटिया

Post by admin » Tue Oct 24, 2017 2:55 pm

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दाता तेरे सुमरिन का--मनमोहन भाटिया
दाता तेरे सुमरिन का वरदान जो मिल जाये
सच कहती हूं मेरी तकदीर बदल जाये।

सुनते हैं तेरी रहमत दिन-रात बरसती है
एक बूंद जो मिल जाये तकदीर बदल जाये
दाता तेरे सुमरिन का वरदान जो मिल जाये
सच कहती हूं मेरी तकदीर बदल जाये।

है नाथ मेरे दिल की इतनी तमन्ना है
पापों से बचा लेना पांव न फिसल जाये
दाता तेरे सुमरिन का वरदान जो मिल जाये
सच कहती हूं मेरी तकदीर बदल जाये।

देवत्व के फूलों से दामन को मेरे भर दो
जीवन यह सुगंधित हो दुर्गन्ध निकल जाये
दाता तेरे सुमरिन का वरदान जो मिल जाये
सच कहती हूं मेरी तकदीर बदल जाये।

ऐ मानव तू दिल से प्रभु नाम का सिमरन कर
दोषों भरे जीवन का कांटा ही बदल जाये
दाता तेरे सुमरिन का वरदान जो मिल जाये
सच कहती हूं मेरी तकदीर बदल जाये।
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