हीरे जैसा जन्म मिला प्रभु पाने के लिए--Manmohan Bhatia (Blogger)

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हीरे जैसा जन्म मिला प्रभु पाने के लिए--Manmohan Bhatia (Blogger)

Post by admin » Tue Oct 24, 2017 2:57 pm

हीरे जैसा जन्म मिला प्रभु पाने के लिए
बंदे तूने कुछ न किया तर जाने के लिए।

कोड़ी-कोड़ी माया जोड़ी माया हेतु जीता है
अपने हाथों जानबूझ कर जहर प्याला पीता है
कुटुंब कबीला भाई बंधु खाने के लिए
बंदे तूने कुछ न किया तर जाने के लिए।

जब जब तेल दिये में बाती जगमग जगमग हो रहा
जल गया तेल बुझ गई बाती ले चल ले चल हो रहा
चार जने मिल जाते हैं उठाने के लिए
बंदे तूने कुछ न किया तर जाने के लिए।

हाड़ जले ज्यूं सूखी लकड़ी केस जले ज्यों घास
अपने पराये रोते हैं दिखाने के लिए
बंदे तूने कुछ न किया तर जाने के लिए।

अब भी समय है संभलो प्यारे ईश्वर के गुण गा लो
राम नाम के सिमरन से बाकी समय सुधारो
सतगुरु आये हैं हमको समझाने के लिए
बंदे तूने कुछ न किया तर जाने के लिए।

हीरे जैसा जन्म मिला प्रभु पाने के लिए
बंदे तूने कुछ न किया तर जाने के लिए।
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