माहौल सराबी ,रात नशीली ,मौसम है बरसात का,---धर्मेन्द्र मिश्र

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माहौल सराबी ,रात नशीली ,मौसम है बरसात का,---धर्मेन्द्र मिश्र

Post by admin » Sat Dec 02, 2017 10:42 am

माहौल सराबी ,रात नशीली ,मौसम है बरसात का,
आँखों में नशा है शराब का ,कुछ तो है प्यार का .
कहो गम है किस बात का,कहो न गम है किस बात का .
ये मौसम की मदहोशी ये आँखों की उदासी ,
मौसम है ये प्यार का ,खवाबो की बरसात का.
कहो गम है किस बात का,कहो न गम है किस बात का .
ये रुस्वाई ,ये वेवफाई ,मौसम है तन्हाई का ,
आँखों में नासा है जुदाई का ,
कहो गम है किस बात का कहो न गम है किस बात का .
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