" हे कोकिल । एक गीत गा "----डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प

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" हे कोकिल । एक गीत गा "----डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प

Post by admin » Wed Dec 06, 2017 6:59 am

" हे कोकिल । एक गीत गा "
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हे कोकिल मन स्वर लुभावनी ।
आ,गीत एक गा मनभावनी ।।

गीत प्रेम का, हो उमंग गा ।
गीत मोद का, हो सुसंग का ।।
क्रीति-शौर्य सच राष्ट्रहित का ।
कर सृजन री नूतन कहानी ।।1।।

तू उन्मुक्त गगन विचरनें वाली ।
कुञ्ज-कुञ्ज , चह-चहानें वाली ।।
मन तेरे हैं निर्मल , चाहे तेरे हैं तन काली ।
अंतरिक्ष को है हर्षाती , वह तू विहंग सुहानी ।।2।।

डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प
( छत्तीसगढ़ )
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