अब क्या कहने को शेष रहा? ---गौरव शुक्ल मन्योरा

Post Reply
User avatar
admin
Site Admin
Posts: 21569
Joined: Wed Nov 16, 2011 9:23 am
Contact:

अब क्या कहने को शेष रहा? ---गौरव शुक्ल मन्योरा

Post by admin » Wed Sep 05, 2018 3:05 pm

Gaurav Shukla Manyora

Image
अब क्या कहने को शेष रहा?
(1)
गीतों के पाँव लगे दुखने ,पर तुम तक नहीं पहुँच पाए;
थम गई लेखनी की लीला, शब्दों के चेहरे मुरझाए।
मेरा हर गाना व्यर्थ हुआ, छू सका तुम्हारा मन न अगर ;
मेरी हर कला विनष्ट हुई, डाला जिसने तुम पर असर।

ऐसी कविता को आग लगे,
ऐसा कौशल भाड़ में जाय ;

जब हर प्रयत्न असमर्थ भेजने में तुम तक संदेश रहा।
अब क्या कहने को शेष रहा?
(2)
क्या मतलब वाह वाह दुनिया, मेरे गीतों पर कहा करे ;
अपने भावों की झलक देख, रस की धारा में बहा करे।
अपनी वेदना लोग देखें, मेरे वेदना. भरे स्वर में ;
क्या मतलब जगे सहानुभूति, मेरे प्रति जग के अंतर में।

पत्थर पसीज जाएँ तो क्या,
मन में न तुम्हारे हुक उठे ;

तो यही कहूँगा काव्य - जगत में मेरा व्यर्थ प्रवेश रहा।
अब क्या कहने को शेष रहा?
(3)
हाथों में हाथ थाम मंदिर, में घंटी साथ बजाई जो ;
वह चादर हरी जिंदबाबा, को हमने साथ उढ़ाई जो।
लौटते समय हम भीगे थे, बारिश में जो मुसलाधार ;
हँसते गाते थी राह कटी, वह यादें कैसे दूँ बिसार।

वह चिदानंद अनुभव मेरे,
जेहन में अब भी ताजा हैं ;

तुम भूलीं तुम्हें मुबारक हो, मेरा मिटने से क्लेश रहा।
अब क्या कहने को शेष रहा?
------------
गौरव शुक्ल
मन्योरा
Image
Mail your articles to swargvibha@gmail.com or swargvibha@ymail.com

Post Reply