कर याद अपने बर्बादे मुहब्बत--डॉ. श्रीमती तारा सिंह

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कर याद अपने बर्बादे मुहब्बत--डॉ. श्रीमती तारा सिंह

Post by admin » Sat Aug 11, 2018 10:41 am

कर याद अपने बर्बादे मुहब्बत--डॉ. श्रीमती तारा सिंह
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कर याद अपने बर्बादे मुहब्बत,हम बहुत रोये मगर
हमारे अश्कों को तुम्हारे दामन का सहारा न मिला

दर्दे-दिल सुनाता जाकर किसे , मेरे पाँव के नीचे
जमीं तो थी,मगर आसमां पे कोई सितारा न मिला

राहें - जिन्दगी कटती रही यक्का1 ओ तनहा
मुकामे - आशना2 में कोई हमारा न मिला

बे-दवा दिल के छाले हमराज बनकर साथ रहे
बंदे - गम3 से कभी हमें छुटकारा न मिला

हालाते- दर्दे जिगर, कैदे- हयात4 में गिरते- पड़ते
उठते रहे, साहिल तो मिला, किनारा न मिला


1.इक्का 2. पहचानने वालों में 3. दुख का बंधन
4.जिंदगी में कैद
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