किसी का हक़ किसी और को क्यूँ दिलाने पे तुली है---दीपक शर्मा

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किसी का हक़ किसी और को क्यूँ दिलाने पे तुली है---दीपक शर्मा

Post by admin » Wed Sep 05, 2018 2:51 pm

Deepak Sharma
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किसी का हक़ किसी और को क्यूँ दिलाने पे तुली है।
सियासत ही इस मुल्क़ में आरजकता फैलाने पे तुली है।।

संविधान देश का अधिकार सबको समानता का देता है।
सरकार क्यूँ देके आरक्षण संविधान मिटाने पे तुली है।।

हरफ़ पिछडा,दलित,निम्न पैदाइश राजनीति के हैं।
थाम के इनका दामन सत्ता ये वतन जलाने पे तुली है।।

ज़रा सोचो कुकुरमुत्ते कभी क्या बरगद बन सकते हैं।
मगर हुकूमत है ज़बरदस्ती फसल उगाने पे तुली है।।

नस्ल सब दानिशमंदों की ख़त्म करने की साज़िश है।
इसी साज़िश के तहत सवर्ण वर्ग मिटाने पे तुली है।।

याद इतना रहे जिस दिन समुंदर आपा खो देगा।
ज़माना रोयेगा लहर क्यूँ ज़माना डूबाने पे तुली है।।

तिलक,तलवार,तराज़ू जिस रोज़ अपनी पे उतर आये ।
सियासत फिर न कहना आग क्यूँ जलाने पे तुली है।।

मैं अपनी नस्ल को घुट घुट के मरते देख नही सकता।
मगर सरकार ही खुदकुशी के लिये उकसाने पे तुली है।।

जो भी काबिल है उसे उड़ने दो खुले आसमानों में।
निज़ामत कबूतरों को ज़बरन बाज़ बनाने पे तुली है।।

'दीपक' दुनिया तुझको गाली देगी पर न घबराना।
टीस एक शायर से भी बगाबत कराने पे तुली है।।
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@ दीपक शर्मा
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