अंतस ----सुशील शर्मा

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अंतस ----सुशील शर्मा

Post by admin » Fri May 25, 2018 4:51 pm

अंतस
सुशील शर्मा

जीवन नि:संग समर्पण
क्षण-क्षण जो मरता,प्रण

बोध भव्य निर्व्यास जीवन
अकुलाहट,असमंजस,मन

आर्त,अनुभव सर्व विज्ञ
विदग्ध, सिसकता प्रेम यज्ञ

अँजुरी भर चांदनी
ठिठक खड़ी संगनी।

अस्मिता विलय हुई
अनागत स्पन्दित प्रलय हुई।

क्यों ये रात बिहानी
अंतस लालसा अकुलानी।

मेरा अन्त:स्पन्दन
आनन्दमग्न नव-सर्जन।

भावों का सतंरगी सेतु
अनिर्वच आल्हाद हेतु।
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