अकेला---राधाकृष्ण अरोरा

Description of your first forum.
Post Reply
User avatar
admin
Site Admin
Posts: 21569
Joined: Wed Nov 16, 2011 9:23 am
Contact:

अकेला---राधाकृष्ण अरोरा

Post by admin » Sat Aug 11, 2018 2:33 pm

अकेला
बिल्कुल अकेला था
युवा गौतम सिद्धार्थ
छोड़कर सोई हुई पत्नी और बेटे को महल मे
निकल पड़ा था उस अंधियारी रात को
जीवन का अर्थ समझने
राजकुमार सिद्धार्थ

बेटे को गले लगा बरसों तक रोती रही यशोधरा
कहती रही अपनी सखियों से
सखि, वे मुझसे कहकर जाते
मना लिया उसने अपने मन को धीरे-धीरे
मैं कमजोर न बनूँगी, न ही स्वार्थी
मेरा स्वामी, मेरा सिद्धार्थ परमार्थ का पथ खोजेगा
जीवन के लिए, जगत के लिए

उधर भटकता रहा सिद्धार्थ
जंगल जंगल, पर्वत पर्वत
तन को सुखाया, मन को मारा उसने


फिर एक रात
बैठ गया चुपचाप पलथी मारकर
सारनाथ के बोधिवृक्ष तले

सुबह हुई
सूरज की पहली किरणों ने आकर
चूमा उसका माथा, चूमी उसकी आँखें
दिव्य आलोक से भर दिया उसके भीतर-बाहर को
गौतम बुद्ध बना सिद्धार्थ
उठा
तमसो मा ज्योतिर्गमय गाता हुआ
वो चल पड़ा हमारी तरफ !
Image
Mail your articles to swargvibha@gmail.com or swargvibha@ymail.com

Post Reply