काश!कोई देखता जी भर हमें---गौरव शुक्ल मन्योरा

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काश!कोई देखता जी भर हमें---गौरव शुक्ल मन्योरा

Post by admin » Sun Oct 28, 2018 10:44 am

गीत

गौरव शुक्ल मन्योरा

काश!कोई देखता जी भर हमें।
(1)
हर तमन्ना ही अधूरी रह गई ,
हर किसी से एक दूरी रह गई ,
बात कुछ सबसे जरूरी रह गई ;

देखता ही रह गया मैं रास्ता, पर मिला कोई नहीं आकर हमें।
काश!कोई देखता जी भर हमें।
(2)
शक्ल भी तो कुछ न मेरी खास थी ,
बुद्धि विद्या भी न मेरे पास थी ,
लच्छिमी मुझसे सदैव उदास थी ;

फिर भला कोई वजह किस खास से, सौंपता कुछ प्रेम कुछ आदर हमें।
काश! कोई देखता जी भर हमें।
(3)
फिर गया वह मिल गई जिससे नजर ,
दिल दिया जिसको न आया लौटकर ,
क्या पता किस बात का था यह असर ;

भाग्य मेरा था लिखा कैसे गया,जो हमेशा ही मिला पतझर हमें। काश! कोई देखता जी भर हमें।
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-गौरव शुक्ल
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