कविता की नदिया बहती है………. - महावीर उत्तरांचली

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कविता की नदिया बहती है………. - महावीर उत्तरांचली

Post by admin » Tue Dec 04, 2018 10:27 am

शब्द कहें तू न रुक भइया कदम बढ़ाकर चल-चल-चल-चल कविता की नदिया बहती है करती जाए कल-कल-कल-कल कविता की नदिया बहती है………. काग़ज़ पर होती है खेती हर भाषा के शब्दों की उच्चारण हों शुद्ध यदि तो शान बढ़े फिर अर्थों की हिंदी-उर्दू के वृक्षों से तोड़ रहे सब फल-फल-फल-फल कविता की नदिया बहती है………. अ आ इ ई के अक्षर हों या फिर अलिफ़ बे पे ते ए बी सी डी भी सीखेंगे सब होनहार हैं बच्चे उपलब्ध नेट पे आज समस्याओं के हल-हल-हल-हल कविता की नदिया बहती है………. मीरो-ग़ालिब हों या फिर हों तुलसी-सूर-कबीरा प्रेम से उपजे हैं सारे कहते संत “महावीरा” बैर भूलकर आपस में जी लो सारे पल-पल-पल-पल कविता की नदिया बहती है………. - महावीर उत्तरांचली teero talwar se nahi hota परिचय महावीर उत्तरांचली साहब उत्तराखंड के रहने वाले है आपका जन्म दिल्ली में २४ जुलाई १९७१ को हुआ | आप वर्तमान में गाज़ियाबाद से प्रकाशित त्रेमासिक पत्रिका कथा संसार के उप संपादक है और बुलंदशहर से प्रकाशित त्रेमासिक पत्रिका बुलंदप्रभा में साहित्य सहभागी है | साथ ही साथ आप उत्तरांचली साहित्य संस्थान के निर्देशक भी है | आपकी अभी तक तीन किताबे प्रकाशित हो चुकी है जिनमे :- 1.) आग का दरिया (ग़ज़ल संग्रह, २००९ / अमृत प्रकाशन), 2.) तीन पीढ़ियां : तीन कथाकार (कथा संग्रह में प्रेमचंद, मोहन राकेश और महावीर उत्तरांचली की 4-4 कहानियां; संपादक : सुरंजन, २००७) मगध प्रकाशन, 3.) मन में नाचे मोर है (जनक छंद, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से प्रकाशित हो चुके है | आपसे m.uttranchali@gmail.com या 8178871097 पर संपर्क कर सकते है |

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