प्यार का सार है त्याग की भावना ---डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

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प्यार का सार है त्याग की भावना ---डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

Post by admin » Wed Dec 12, 2018 4:20 pm

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शृंगार गीत (गीतिका )
प्यार का सार है त्याग की भावना ,
प्रेम रस धार है प्रीत की कामना ।
जिंदगी मिल गयी प्यार जिसने किया ,
प्यार से मिट गयी खोखली वासना ।

प्रेम निस्वार्थ है कामना जब न हो ,
स्नेह स्वीकार है वासना जब न हो ।
साधना , वंदना, धार्मिक भावना ,
प्रेम आराधना है अहम जब न हो ।

मोहिनी रूप से मोहने मन लगा ,
रूप माधुर्य से रीझने मन लगा ।
उज्ज्वला , वत्सला , शारदा माँ , सुधा ,
दे , वरद हस्त माँ भीगने मन लगा।

प्यार में जिंदगी तू हमें मिल गयी ,
यार से खुश- नसीबी हमें मिल गयी ।
मंजिलों तक पहुँचना कठिन था मगर ,
हाथ थामे हमें हर खुशी मिल गयी ।

लालिमा गाल की अब लजाने लगी ,
सुर्खियां होठ की थर थराने लगी ।
रूबरू जब मेरा दिल पिया से हुआ ,
हाथ की चूड़ियाँ खनखनाने लगी ।
“डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव “
सीतापुर ।
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