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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









आदमी के आचरण मे हो चली है भरभराहट

 

आज अखबारो और टीवी से यही आती है आहट
गिरावट ही है गिरावट हर जगह भारी गिरावट

 

आदमी के आचरण मे बढती जाती है बुराई
किसी को दिखती नहीं है नीति नियमो की रूकावट

 

कीमती ईमान रूपयो मोल बेचा जा रहा है
छुपाने हर खोट की जाती सुनहरी जगमगाहट

 

शुद्ध कोई सामान कीमत दे भी पाना हुआ मुष्किल
हो रही बाजारो मे असली मे नकली की मिलावट

 

आफिसो मे फाइलो पर धूल जमती जा रही है
कीमती हो गई हर हस्ताक्षर की अब लिखावट

 

स्वच्छता और स्वास्थ्य के सिंद्धांत फीके हो गये है
खाने पीने जीने सबमे समा गई भारी दिखावट

 

रोशनी होते भी गहराता ही जाता है अंधेरा
गिरावट के चलन के चेहरे पर नहीं दिखती थकावट

 

प्रेम और विष्वास के संग लुट गई ईमानदारी
आचरण के भवन मे दिखती दिनो दिन भरभराहट

 

प्रो सी बी श्रीवास्तव "विदग्ध"

 

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