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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









तुम्हारे आने का आखिर ये आसरा क्यों है?

 

 

तुम्हारे आने का आखिर ये आसरा क्यों है?
हमारा आज भी तुमसे ये वास्ता क्यों है?

 

न जाने कब से हमारी बदल चुकीं राहें,
मिला तुमसा न आजतक मगर सगा क्यों है?

 

कल परिंदे ने नया घोंसला बनाया था,
उजाड़ इसको गया कौन दरिंदा क्यों है?

 

ये तो मुमकिन नहीं कि चाहा हुआ ही हो सब,
तू होके जार जार रो रहा ऐसा क्यों है?

 

खुशी की खोज में मैं उम्र भर भटकता रहा,
मुझे उसका पता मगर न मिल सका क्यों है?

 

तमाम दिन गये, शराब से तौबा कर ली;
छाया अब भी दिमाग पर मेरे नशा क्यों है?

 

अजनबी शहर में पहचानने की हसरत ले,
ओ राहगीर बता दे ठहर गया क्यों है?

 

पुराने ख्वाबों को हमने तो अलविदा कह दी,
मगर तू दिल से ले नहीं रहा विदा क्यों है?

 

 


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- गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

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