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अफजल को तुम गुरू बताओ,आजादी है !

 

 

"अफजल को तुम गुरू बताओ,आजादी है !
महिषासुर पर दिवस मनाओ, आजादी है!

 

गाँधी को औलाद बताकर शैतानों की,
बाबासाहेब का गुण गाओ, आजादी है!

 

ओसामा को 'जी' कहकर सम्मान करो,फिर,
साठ साल में रास रचाओ,आजादी है!

 

होते रहें जवान शहीद यहाँ सरहद पर,
तुम नवाज घर दावत खाओ, आजादी है!

 

जब चाहो, भारतमाता को डायन बोलो,
शीश तिरंगे को न झुकाओ, आजादी है!

 

जिन्ना को महान कहने मे लज्जा कैसी,
जा मजार पर फूल चढ़ाओ, आजादी है!

 

भगतसिंह, सुखदेव, सुभाष, चंद्रशेखर को,
जमकर आतंकी ठहराओ, आजादी है!

 

मरें भूख से यहाँ गरीब परंतु चीन को,
राहत सामग्री पहुँचाओ, आजादी है!

 

जे एन यू में गद्दारों से हाथ मिलाओ,
और धर्मनिरपेक्ष कहाओ, आजादी है!"

 


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-गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

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