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आम बौराने लगे, क्या बात है।

 

 

आम बौराने लगे, क्या बात है।
याद वो आने लगे, क्या बात है।

 

लग रहा है ऋतु बसंती आ गई,
लोग पगलाने लगे, क्या बात है।

 

भावना उमगी कि कसकी वेदना,
गीत हम गाने लगे, क्या बात है।

 

आज तक उगला जिन्होंने जहर वो,
अमृत बरसाने लगे, क्या बात है।

 

आस्तीनों में हमारी जो पले,
छोड़कर जाने लगे ,क्या बात है।

 

दैन्य के दामन तले विद्रोह के,
मेघ घहराने लगे, क्या बात है।

 

आज तक दिल्ली जिन्हें थी दूर वो,
जर्मनी जाने लगे, क्या बात है।

 


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-गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

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